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नल कनेक्शन से पाइप-कबाड़ तक… भुआ-बिछिया नगर परिषद में आखिर किसका चल रहा ‘खेल’?

दैनिक रेवांचल टाइम्स | भुआ-बिछिया

नल कनेक्शन से पाइप-कबाड़ तक… भुआ-बिछिया नगर परिषद की जलप्रदाय शाखा पर गंभीर सवाल

सैकड़ों अवैध कनेक्शनों की स्थानीय स्तर पर चर्चा; नगर परिषद गठन से अब तक खरीदी, खपत, स्टॉक और कबाड़ निस्तारण का भौतिक सत्यापन कराने की उठी मांग

दैनिक रेवांचल टाइम्स | भुआ-बिछिया। नगर परिषद भुआ-बिछिया में विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब जलप्रदाय शाखा भी चर्चा के केंद्र में है। मामला सिर्फ घरों तक पानी पहुंचाने का नहीं, बल्कि जलप्रदाय व्यवस्था के लिए खरीदी गई सरकारी सामग्री, उसके उपयोग, स्टॉक और अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की पारदर्शिता से जुड़ा है।



स्थानीय लोगों के बीच नगर में बड़ी संख्या में कथित रूप से अवैध नल कनेक्शन संचालित होने की चर्चा है। इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यदि व्यापक सर्वे में यह दावा सही पाया जाता है तो नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था के साथ संभावित राजस्व नुकसान का प्रश्न भी खड़ा होगा।

बड़ा सवाल—अवैध कनेक्शन काटे तो निकला पाइप और सामान गया कहां? यदि नगर परिषद द्वारा पूर्व में अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई कर पाइप, वाल्व अथवा अन्य सामग्री निकाली या जब्त की गई है, तो उसका रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। कितनी सामग्री निकली, कहां जमा हुई, स्टॉक रजिस्टर में दर्ज हुई या नहीं और अनुपयोगी घोषित होने पर उसका निस्तारण किस प्रक्रिया से किया गया—इन तथ्यों का दस्तावेजों से सत्यापन किया जा सकता है।

सैकड़ों अवैध नल कनेक्शन हैं तो निगरानी पर उठेंगे सवाल

अवैध नल कनेक्शन का मुद्दा केवल पानी के अनधिकृत उपयोग तक सीमित नहीं है। इससे नगर परिषद के राजस्व का प्रश्न भी जुड़ता है। यदि लंबे समय से बिना अनुमति कनेक्शन संचालित हो रहे हैं तो यह जांच का विषय है कि उनका सर्वे कब हुआ, कितने कनेक्शन चिन्हित किए गए और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

इस स्थिति को स्पष्ट करने का सबसे सीधा तरीका पूरे नगर का कनेक्शनवार सर्वे हो सकता है। इससे वैध और अवैध कनेक्शनों की वास्तविक संख्या के साथ नगर परिषद को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान की स्थिति भी सामने आ सकती है।

ब्लीचिंग पाउडर, फिटकरी, पाइप और वाल्व—खरीदी हुई तो खपत का रिकॉर्ड भी होना चाहिए

जलप्रदाय व्यवस्था में समय-समय पर ब्लीचिंग पाउडर, फिटकरी, पाइप, वाल्व, मशीनरी के स्पेयर पार्ट्स और अन्य सामग्री की जरूरत पड़ती है। ऐसे में खरीदी गई सामग्री और उसके वास्तविक उपयोग का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाता है।

जांच में इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए ◆ नगर परिषद गठन से अब तक कितनी जलप्रदाय सामग्री खरीदी गई? ◆ खरीदी गई कितनी सामग्री वास्तव में प्राप्त हुई? ◆ स्टॉक रजिस्टर में कितना माल दर्ज किया गया? ◆ किस कर्मचारी या कार्य के लिए कितनी सामग्री जारी हुई? ◆ वास्तविक रूप से कितनी सामग्री उपयोग हुई? ◆ कितनी सामग्री खराब अथवा अनुपयोगी घोषित की गई? ◆ पुराने पाइप और कबाड़ का निस्तारण किस प्रक्रिया से किया गया?

कागज का स्टॉक और गोदाम का स्टॉक मिलाकर देखने की जरूरत

मामले की वास्तविकता जानने के लिए केवल दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। आवश्यकता इस बात की है कि स्टॉक रजिस्टर में दर्ज सामग्री का गोदाम अथवा संबंधित स्थान पर मौजूद वास्तविक सामग्री से भौतिक मिलान कराया जाए।

यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में कोई अंतर नहीं मिलता है तो सवाल स्वतः समाप्त हो सकते हैं। लेकिन अंतर सामने आता है तो उसके कारण और जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच जरूरी होगी।

नगर परिषद गठन से अब तक ये रिकॉर्ड जांचे जाएं ◆ स्टॉक रजिस्टर और सामग्री प्राप्ति रजिस्टर ◆ खरीदी बिल, भुगतान और संबंधित स्वीकृतियां ◆ सामग्री वितरण एवं उपयोग रिकॉर्ड ◆ पाइप और वाल्व की खरीदी तथा जारी करने का विवरण ◆ पुराने पाइप और अनुपयोगी सामग्री का रिकॉर्ड ◆ कबाड़ नीलामी/निस्तारण से संबंधित दस्तावेज ◆ मशीनरी मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की खरीदी ◆ रिकॉर्डेड स्टॉक बनाम मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक

जांच केवल वर्तमान की नहीं, पुराने रिकॉर्ड तक पहुंचे

स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जांच को केवल वर्तमान वित्तीय वर्ष अथवा हाल की खरीद तक सीमित न रखा जाए। नगर परिषद के गठन से लेकर वर्तमान समय तक जलप्रदाय शाखा की सामग्री खरीदी, वितरण, उपयोग और निस्तारण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

पुराने पाइप और अन्य अनुपयोगी सामग्री यदि कबाड़ के रूप में बेची गई है तो उसकी नीलामी अथवा बिक्री से संबंधित प्रक्रिया, प्राप्त राशि और नगर परिषद के खाते में जमा रकम का भी मिलान किया जाना चाहिए।

अवैध कनेक्शन मिले तो राजस्व नुकसान का भी हो आकलन

यदि नगर में बड़ी संख्या में अनधिकृत कनेक्शन होने की बात सर्वे में प्रमाणित होती है तो यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि ये कनेक्शन कितने समय से संचालित थे और इनके कारण नगर परिषद को कितना संभावित राजस्व नुकसान हुआ।

इसके साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि अनधिकृत कनेक्शनों की पहचान और कार्रवाई की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी तथा संबंधित अवधि में क्या कार्रवाई की गई।

रेवांचल टाइम्स का सवाल—जांच से परहेज क्यों? यदि जलप्रदाय शाखा की सामग्री खरीदी, उपयोग, स्टॉक और निस्तारण पूरी तरह नियमों के अनुसार हुआ है तो दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

CMO राजेश मार्को से पक्ष जानने का प्रयास, फोन पर नहीं हो सकी बात

इस मामले में रेवांचल टाइम्स की टीम ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेश मार्को से कबाड़ की बिक्री, भंडारण तथा सामग्री के क्रय-विक्रय से जुड़े सवालों पर उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

इसलिए इस समाचार में संबंधित अधिकारी का पक्ष शामिल नहीं किया जा सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

जनप्रतिनिधियों से भी जवाबदेही की उम्मीद

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद से जुड़े सार्वजनिक धन और बुनियादी सुविधाओं के मामलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ विधायक और सांसद को भी प्रशासन से तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट कराने की पहल करनी चाहिए।

मांग है कि आरोप-प्रत्यारोप के बजाय एक निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिसमें दस्तावेजों के साथ भौतिक स्टॉक सत्यापन, कनेक्शन सर्वे और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान हो। इससे नगर परिषद पर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सकेगा।

एक-एक पाइप, एक-एक किलो ब्लीचिंग पाउडर का हिसाब क्यों न हो? जनता के पैसे से चल रही जलप्रदाय व्यवस्था में खरीदी से खपत और कबाड़ तक का रिकॉर्ड सार्वजनिक और सत्यापन योग्य होना चाहिए
संपादकीय स्पष्टता: समाचार में अवैध नल कनेक्शन, सामग्री के हिसाब और संभावित अनियमितताओं से जुड़े बिंदु स्थानीय स्तर पर उठाए जा रहे सवालों एवं जांच की मांग पर आधारित हैं। इन्हें प्रमाणित गड़बड़ी या दोषसिद्धि के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति सक्षम प्राधिकारी द्वारा रिकॉर्ड परीक्षण, सर्वे और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

मुकेश श्रीवास | रेवांचल टाइम्स, मंडला

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