कंप्यूटर ऑपरेटर की तकनीकी दक्षता पर सवाल, जवाब देने से अधिकारी क्यों बच रहे?
नगर परिषद में ऑनलाइन कामकाज की निष्पक्ष जांच की मांग, योग्यता और कार्यक्षमता की समीक्षा पर उठे सवाल
भुआ-बिछिया। नगर परिषद भुआ-बिछिया में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर की तकनीकी दक्षता और ऑनलाइन कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि संबंधित कर्मचारी की योग्यता और कार्यक्षमता को लेकर शिकायतें या आपत्तियां सामने आ रही हैं, तो उनकी वास्तविकता का पता निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण और संबंधित अभिलेखों की जांच से लगाया जा सकता है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब नगर परिषद का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन और डिजिटल व्यवस्था से जुड़ चुका है, तब तकनीकी जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी की वास्तविक दक्षता की जांच कराने में परेशानी क्या है? जांच से कर्मचारी की योग्यता भी स्पष्ट होगी और उसके खिलाफ उठ रहे सवालों की वास्तविकता भी सामने आ सकेगी।
संबंधित कर्मचारी की तकनीकी दक्षता को लेकर उठ रही आपत्तियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अभिलेखों और तकनीकी परीक्षण के आधार पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई चर्चाओं के अनुसार संबंधित कर्मचारी के कंप्यूटर संचालन, ऑनलाइन प्रविष्टियों और तकनीकी कार्यों को लेकर आपत्तियां उठाई जा रही हैं। इन आपत्तियों की सत्यता स्थापित करने के लिए किसी स्वतंत्र और सक्षम तकनीकी अधिकारी या विशेषज्ञ से परीक्षण कराया जाना एक पारदर्शी विकल्प हो सकता है।
इसके साथ कर्मचारी की शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता, नियुक्ति से संबंधित अभिलेख, आवश्यक प्रमाण-पत्र तथा वर्तमान में उसके द्वारा किए जा रहे ऑनलाइन एवं कार्यालयीन कार्यों का परीक्षण भी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
नगर परिषद के शासकीय पोर्टलों पर होने वाली प्रविष्टियां, ऑनलाइन रिकॉर्ड, डिजिटल अभिलेख और कार्यालयीन पत्राचार सीधे प्रशासनिक कामकाज से जुड़े होते हैं। ऐसे में तकनीकी जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारी की दक्षता महत्वपूर्ण हो जाती है।
यदि ऑनलाइन कार्यों में तकनीकी कमी होती है तो उसका प्रभाव नागरिक सेवाओं और पात्र हितग्राहियों से जुड़े कार्यों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि संबंधित कर्मचारी निर्धारित योग्यता रखता है और अपना कार्य नियमानुसार कर रहा है, तो निष्पक्ष जांच उसके खिलाफ उठ रहे सवालों पर भी विराम लगा सकती है।
शिकायत गलत है तो दस्तावेज स्थिति स्पष्ट करेंगे, सही है तो जिम्मेदारी तय करने का रास्ता खुलेगा
सवाल यही है कि यदि किसी कर्मचारी की योग्यता को लेकर आपत्तियां उठ रही हैं तो उनका परीक्षण क्यों न कराया जाए? यदि शिकायतें निराधार हैं तो नगर परिषद संबंधित दस्तावेज और निर्धारित पात्रता के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
पारदर्शिता का तकाजा है कि नियुक्ति से लेकर वर्तमान कार्यप्रणाली तक उपलब्ध सरकारी अभिलेखों की नियमानुसार समीक्षा हो, ताकि न किसी कर्मचारी पर बेवजह सवाल खड़े हों और न ही किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी की आशंका बनी रहे।
मामले में नगर परिषद भुआ-बिछिया के सीएमओ राजेश मार्को का पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। समाचार प्रकाशन तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी संबंधित कर्मचारी की योग्यता या कार्यक्षमता को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती। इसलिए आरोपों को तथ्य मान लेने के बजाय योग्यता, नियुक्ति अभिलेख और तकनीकी कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग के स्तर पर अभिलेखों की समीक्षा तथा आवश्यक होने पर तकनीकी परीक्षण कराया जाता है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि उठाए जा रहे सवालों का आधार क्या है और संबंधित नियुक्ति एवं कार्यप्रणाली निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं।
इस समाचार का उद्देश्य किसी कर्मचारी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि उठ रहे सवालों पर दस्तावेज आधारित स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता को सामने रखना है। संबंधित कर्मचारी अथवा नगर परिषद प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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