शिकायत की तो दबाव! मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी नगर परिषद का पहरा?
शिकायत वापस लेने के लिए कथित दबाव का आरोप, भुआ-बिछिया में शिकायत निवारण व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल
भुआ-बिछिया। नगर परिषद की व्यवस्थाओं से परेशान होकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत करना क्या अब शिकायतकर्ता के लिए ही परेशानी का कारण बन रहा है? भुआ-बिछिया में दर्ज कुछ शिकायतों के बाद संबंधित शाखा की ओर से शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर शिकायत वापस लेने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आए हैं। आरोप यह भी है कि शिकायत वापस लेने से इनकार करने पर धमकी जैसी बात कही गई।
इन आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी अधिकारी या कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराने से पहले शिकायत की ऑनलाइन हिस्ट्री, उसके निराकरण की कार्रवाई, शिकायतकर्ता के बयान और संबंधित शाखा के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आरोप सही हैं तो सवाल शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है
यदि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक निराकरण हो चुका है तो उसका रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन यदि समस्या जस की तस रहते हुए शिकायत वापस लेने के लिए कहा गया, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है, तो यह जांच का विषय बनता है कि ऐसा किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुआ।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन की शिकायत निवारण व्यवस्था है। ऐसे में किसी नागरिक द्वारा अपनी समस्या दर्ज कराने के बाद संबंधित विभाग से अपेक्षा होती है कि वह शिकायत की जांच कर नियमानुसार निराकरण करे और की गई कार्रवाई को रिकॉर्ड पर दर्ज करे।
भुआ-बिछिया में सामने आए आरोपों के बाद सवाल यह है कि संबंधित शिकायतों पर वास्तव में क्या कार्रवाई हुई? क्या शिकायतकर्ताओं की मूल समस्या दूर की गई, या उनसे शिकायत वापस लेने के लिए संपर्क किया गया? इसका जवाब केवल दस्तावेजी जांच से स्पष्ट हो सकता है।
मामले की वास्तविकता जानने के लिए शिकायत की ऑनलाइन हिस्ट्री महत्वपूर्ण हो सकती है। शिकायत कब दर्ज हुई, किस अधिकारी या शाखा को भेजी गई, किस स्तर पर क्या जवाब दर्ज हुआ, निराकरण के लिए कौन-सी कार्रवाई बताई गई और शिकायत किस स्थिति में बंद हुई या लंबित है— इन रिकॉर्डों की समीक्षा से कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
इसके साथ शिकायतकर्ता का बयान और संबंधित शाखा के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी का पक्ष भी लिया जाना चाहिए, ताकि जांच केवल आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि दोनों पक्षों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर हो।
यदि आरोप निराधार हैं तो जिम्मेदार अधिकारी शिकायत से जुड़े रिकॉर्ड और की गई कार्रवाई के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। वहीं यदि जांच में शिकायत वापस कराने के लिए अनुचित दबाव डालने की बात सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति की भूमिका और जवाबदेही तय किए जाने की मांग स्वाभाविक है।
अब निगाह जिला प्रशासन पर है। आरोपों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है या शिकायत वापस लेने के लिए किसी स्तर पर अनुचित दबाव बनाया गया।
शिकायत व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब शिकायतकर्ता बिना भय या दबाव के अपनी समस्या रख सके और विभाग उसका जवाब दस्तावेजों एवं वास्तविक कार्रवाई के आधार पर दे।
शिकायत वापस लेने के लिए दबाव अथवा धमकी दिए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित शिकायतों के रिकॉर्ड, शिकायतकर्ताओं के बयान और नगर परिषद का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित अधिकारी अथवा नगर परिषद का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।
मंडला | भुआ-बिछिया | नागरिक शिकायत एवं नगरीय प्रशासन
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