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भुआ-बिछिया में ‘बने गार्डन’ पर घमासान! जनता पूछ रही—कहां बना, कितने का बना और किसके लिए बना?

दैनिक रेवांचल टाईम्स | मण्डला

भुआ-बिछिया में ‘बने गार्डन’ पर घमासान! जनता पूछ रही—कहां बना, कितने का बना और किसके लिए बना?

नगर परिषद के कथित गार्डन निर्माण पर उठे सवाल; स्वीकृति से भुगतान और मौके की स्थिति तक पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

दैनिक रेवांचल टाईम्स - मण्डला, भुआ-बिछिया। नगर परिषद भुआ-बिछिया में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के नाम पर खर्च होने वाली राशि को लेकर एक और मामला सवालों के घेरे में है। 15 वार्डों वाली नगर परिषद में गार्डन निर्माण की चर्चा है, लेकिन कई वार्डवासियों के बीच यह स्पष्ट नहीं है कि कथित गार्डन आखिर कहां बनाया गया, किस योजना से राशि स्वीकृत हुई और निर्माण पर सरकारी खजाने से कितनी रकम खर्च हुई।

गार्डन कितने में बना या कागजों में विकास?

सवाल सीधा है—यदि नगर परिषद द्वारा गार्डन का निर्माण कराया गया है तो उसका स्थान, स्वीकृत राशि, योजना अथवा मद, प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, निर्माण एजेंसी और भुगतान का विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए।

जानकारी के अभाव में स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि केवल सवाल उठने से किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं होती। वास्तविक स्थिति नगर परिषद के अभिलेखों और मौके के भौतिक सत्यापन के मिलान से ही स्पष्ट हो सकती है।

जब पैसा जनता का है तो काम का हिसाब भी जनता के सामने होना चाहिए

जनप्रतिनिधियों को भी पूरी जानकारी नहीं?

नगर में चर्चा है कि कुछ जनप्रतिनिधियों को भी कथित गार्डन निर्माण की प्रक्रिया और स्थान की विस्तृत जानकारी नहीं है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। यदि ऐसा है तो यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि विकास कार्यों से संबंधित जानकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों तक किस व्यवस्था के तहत पहुंचाई जा रही है।

इन सवालों का रिकॉर्ड से चाहिए जवाब

गार्डन किस स्थान पर बनाया गया?
किस योजना अथवा मद से राशि स्वीकृत हुई?
कितनी राशि स्वीकृत हुई और वास्तविक खर्च कितना हुआ?
प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति कब जारी हुई?
निविदा प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं?
कार्यादेश किस ठेकेदार अथवा एजेंसी को दिया गया?
माप पुस्तिका में कितना कार्य दर्ज किया गया?
बिल-वाउचर के आधार पर कितना भुगतान हुआ?
कार्य की गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की?
क्या मौके पर स्वीकृत नक्शे और प्राक्कलन के अनुरूप गार्डन मौजूद है?

सरकारी योजनाएं जनता के लिए, जानकारी भी जनता तक पहुंचे

नगर विकास के नाम पर खर्च होने वाली सरकारी राशि की जवाबदेही अंततः जनता के प्रति होती है। यदि किसी विकास कार्य की पहचान, लागत और निर्माण की स्थिति को लेकर नागरिकों में भ्रम है तो संबंधित निकाय द्वारा रिकॉर्ड आधारित जानकारी सार्वजनिक किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फाइल में दर्ज गार्डन और जमीन पर मौजूद निर्माण—दोनों का मिलान ही वास्तविक स्थिति सामने ला सकता है।

जिला प्रशासन से भौतिक सत्यापन की मांग

अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं। मांग की जा रही है कि मामले में केवल फाइलों की जांच न हो, बल्कि निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन भी कराया जाए। स्वीकृति आदेश, तकनीकी स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाए।

यदि निर्माण नियमानुसार हुआ है तो रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। यदि दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा निर्माण एजेंसी की भूमिका की नियमानुसार जांच की जा सकती है।

जनता को चाहिए विकास का हिसाब

भुआ-बिछिया के नागरिकों के सामने अब मूल सवाल कथित गार्डन से आगे बढ़कर सरकारी धन की पारदर्शिता का है। नगर परिषद को स्पष्ट करना चाहिए कि गार्डन कहां बनाया गया, किस योजना से बनाया गया, किस एजेंसी ने निर्माण किया और उस पर कुल कितनी राशि खर्च हुई।

अब सवाल सिर्फ गार्डन का नहीं, सरकारी धन की पारदर्शिता का है
यदि विकास कार्य जमीन पर मौजूद है और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी हुई हैं तो उसका पूरा विवरण सार्वजनिक होने से स्थिति साफ हो सकती है। जनता का सवाल है—विकास हुआ है तो उसका हिसाब सामने आने में परेशानी कैसी?
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