Breaking

revanchal times new

भुआ-बिछिया नपा में पुरानी फाइलें फिर सवालों के घेरे में! नियुक्ति से वित्तीय मामलों तक जांच की मांग

दैनिक रेवांचल टाईम्स | मण्डला | भुआ-बिछिया

भुआ-बिछिया नपा में पुरानी फाइलें फिर सवालों के घेरे में!

नियुक्ति से वित्तीय मामलों तक जांच की मांग, कर्मचारी शिवकुमार झरिया के मूल दस्तावेजों को लेकर भी उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स - मण्डला, भुआ-बिछिया। नगर परिषद भुआ-बिछिया में विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और पुराने वित्तीय मामलों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अब मांग की जा रही है कि पुराने प्रकरणों की फाइलें खोलकर यह सार्वजनिक किया जाए कि जांच में क्या सामने आया, किसकी जिम्मेदारी तय हुई, कितनी वसूली प्रस्तावित अथवा की गई और संबंधित मामलों में विभागीय कार्रवाई कहां तक पहुंची।

शिवकुमार झरिया की नियुक्ति के दस्तावेजों पर भी सवाल

इसी बीच नगर परिषद के कर्मचारी शिवकुमार झरिया की नियुक्ति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध दावे के अनुसार उनकी नियुक्ति तत्कालीन सीएमओ लक्ष्मण सिंह सारस के कार्यकाल में हुई थी। हालांकि नियुक्ति में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं, इसकी पुष्टि मूल शासकीय अभिलेखों की जांच के बिना नहीं की जा सकती।



इसीलिए मांग की जा रही है कि नियुक्ति आदेश, स्वीकृत पद, पात्रता, चयन प्रक्रिया, नियुक्ति के समय प्रस्तुत शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेज, सेवा पुस्तिका तथा संबंधित नोटशीट का परीक्षण कराया जाए।

“नियुक्ति सही है तो मूल दस्तावेज सामने आने चाहिए”

नियुक्ति के बाद क्या-क्या जिम्मेदारी मिली?

जांच का दायरा केवल नियुक्ति तक सीमित रखने के बजाय यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नियुक्ति के बाद संबंधित कर्मचारी को समय-समय पर कौन-कौन से दायित्व दिए गए। क्या उन्हें किसी वित्तीय, लेखा, खरीदी, भुगतान अथवा निर्माण संबंधी कार्य से जोड़ा गया था?

यदि किसी अवधि में वित्तीय जिम्मेदारी दी गई थी तो उस अवधि से जुड़े बिल, भुगतान आदेश, खरीदी रिकॉर्ड, माप पुस्तिका तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों का भी नियमानुसार परीक्षण कराया जाना चाहिए। इससे व्यक्तिगत आरोपों के बजाय दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुरानी फाइलें खुलें तो सामने आए पूरी तस्वीर

नगर परिषद के पुराने वित्तीय मामलों में संबंधित अवधि के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका, उनके अधिकार, भुगतान प्रक्रिया, जांच रिपोर्ट, वसूली आदेश तथा विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति सामने लाने की मांग की जा रही है।

प्रशासन से इन सवालों का चाहिए रिकॉर्ड आधारित जवाब
क्या नगर परिषद के पुराने वित्तीय प्रकरणों की दोबारा समीक्षा होगी?
शिवकुमार झरिया की नियुक्ति के मूल अभिलेख क्या कहते हैं?
नियुक्ति किस स्वीकृत पद और किस प्रक्रिया के तहत हुई?
नियुक्ति के बाद उन्हें कौन-कौन से दायित्व सौंपे गए?
पुराने वित्तीय मामलों में किस अधिकारी-कर्मचारी की क्या भूमिका थी?
यदि वसूली निर्धारित हुई थी तो कितनी राशि की और कितनी वसूली हुई?
विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति क्या है?

एक कर्मचारी नहीं, पूरी प्रक्रिया की जांच हो

मामले में केवल किसी एक कर्मचारी को केंद्र में रखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यदि पुराने वित्तीय मामलों को लेकर संदेह या शिकायतें हैं तो संबंधित अवधि की पूरी प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। किस अधिकारी के पास क्या अधिकार थे, किसने फाइल आगे बढ़ाई, किसने स्वीकृति दी और किस स्तर से भुगतान हुआ—इन सभी पहलुओं का रिकॉर्ड से परीक्षण जरूरी है।

जनता को आरोप नहीं, दस्तावेज चाहिए—किसकी क्या भूमिका थी और कार्रवाई कहां तक पहुंची?

जिला प्रशासन की जांच से ही साफ होगी स्थिति

स्थानीय स्तर पर उठ रहे आरोपों और सवालों की वास्तविकता का निर्धारण सक्षम प्रशासनिक जांच से ही हो सकता है। नियुक्ति अथवा वित्तीय अनियमितता के संबंध में फिलहाल कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संबंधित मूल दस्तावेजों, आदेशों और वित्तीय अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों का पालन हुआ या कहीं प्रक्रिया में अनियमितता रही।

“पुरानी फाइलें खोलिए, जिम्मेदारी बताइए!”

भुआ-बिछिया में उठ रहे सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मूल अभिलेखों से मिल सकता है। नियुक्ति नियमों के अनुसार हुई है तो रिकॉर्ड स्थिति साफ कर देगा और पुराने वित्तीय मामलों में कार्रवाई हुई है तो उसका विवरण भी जनता के सामने आना चाहिए।

दैनिक रेवांचल टाईम्स
मण्डला | भुआ-बिछिया | नगर परिषद | नियुक्ति | वित्तीय अभिलेख | जांच

Post a Comment

Previous Post Next Post
revanchal times new