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PM आवास निर्माण में नियमों की अनदेखी का आरोप, जनपद पंचायत बजाग ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति

🔴 दैनिक रेवाँचल टाईम्स | बजाग

PM आवास निर्माण में नियमों की अनदेखी का आरोप, जनपद पंचायत बजाग ने गठित की जांच समिति

शासकीय व दूसरे भू-स्वामी के नाम दर्ज भूमि पर आवास निर्माण-जियो टैगिंग की शिकायत, तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

📅 जांच आदेश
17 सितंबर
👥 जांच समिति
3 सदस्य
⏱️ रिपोर्ट
3 दिवस

दैनिक रेवाँचल टाईम्स, बजाग। जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत अंगई, पनिकाटोला में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता सतीश बघेल ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि शासकीय भूमि सहित अन्य भू-स्वामी के नाम दर्ज भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के आवासों का निर्माण और जियो-टैगिंग कराई गई।



मामले को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत बजाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर आरोपों की जांच के निर्देश दिए हैं। समिति से तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।

🏠 प्रधानमंत्री आवास योजना
जमीन किसी और की, आवास-जियो टैगिंग कैसे?
शिकायत में उठे सवाल, अब दस्तावेज और मौके की जांच करेगी समिति

📑 खसरा नंबर 309 को लेकर शिकायत

शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत अंगई में मध्यप्रदेश शासन की भूमि खसरा नंबर 309 पर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही बिसाहू दास पिता सुग्रीव दास के आवास का जियो-टैग/निर्माण कराए जाने का आरोप है।

🔎 जांच में क्या स्पष्ट होना है?
भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व क्या है, संबंधित हितग्राही को उस स्थान पर आवास निर्माण की पात्रता अथवा वैधानिक अनुमति थी या नहीं—यह राजस्व और योजना अभिलेखों की जांच से स्पष्ट होगा।

🗂️ खसरा 328, 332 और 333 पर भी उठे सवाल

आवेदन में खसरा नंबर 328, 332 एवं 333 की भूमि समई पति बौड़े के नाम दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में आरोप है कि इसी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अवध पड़वार पिता दया दास, अनुज दास पिता नन्हू दास, लक्ष्मण दास पिता लालू दास और मानिक दास पिता सुखदास के नाम से आवासों का जियो-टैग अथवा निर्माण कराया गया।

हालांकि उपलब्ध शिकायतों में कुछ हितग्राहियों के नाम अलग-अलग रूप में दर्ज होने की बात भी सामने आई है। इसलिए हितग्राहियों के सही नाम, आवास आईडी, भूमि और संबंधित अभिलेखों का मिलान विभागीय रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है।

⚡ तत्कालीन सचिव और सरपंच की कार्यप्रणाली पर सवाल

शिकायत में सरपंच और तत्कालीन पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित हितग्राहियों के पास स्वयं की भूमि होने के बावजूद शासकीय अथवा दूसरे भू-स्वामी के नाम दर्ज भूमि पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना आवास निर्माण कराया गया और जियो-टैगिंग कर दी गई।

यह आरोप जांच का विषय है। संबंधित हितग्राहियों की स्वयं की भूमि, आवास स्वीकृति, जियो-टैग लोकेशन और निर्माण स्थल के रिकॉर्ड का मिलान होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

📍 पटवारी के पंचनामे का भी दावा

शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले को लेकर तहसील कार्यालय में भी आवेदन दिया गया था और पटवारी द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थल निरीक्षण तथा पंचनामा तैयार किया गया।

हालांकि जिन चार हितग्राहियों के आवास दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज भूमि पर बनाए जाने की शिकायत की गई है, उस भूमि की वास्तविक स्वामित्व स्थिति को राजस्व रिकॉर्ड से प्रमाणित किया जाना बाकी है।

👥 तीन सदस्यीय जांच समिति गठित

जनपद पंचायत बजाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 17 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार जांच समिति में शामिल हैं—

🔹 अभिनंदन पुपाम — खंड पंचायत अधिकारी
🔹 मनोज चौधरी — उपयंत्री
🔹 प्रेमसिंह उद्दे — ब्लॉक समन्वयक, आवास
⏱️ तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन देने के निर्देश
🔍 जांच के अहम बिंदु
✅ खसरा नंबर 309 की वास्तविक राजस्व स्थिति
✅ खसरा नंबर 328, 332 और 333 का भूमि स्वामित्व
✅ संबंधित हितग्राहियों की स्वयं की भूमि का रिकॉर्ड
✅ प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति और पात्रता
✅ आवास की वास्तविक जियो-टैग लोकेशन
✅ स्वीकृत स्थान और वास्तविक निर्माण स्थल का मिलान
✅ पंचायत स्तर पर अपनाई गई प्रक्रिया
✅ पटवारी द्वारा तैयार कथित पंचनामे और राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन

⚖️ जांच रिपोर्ट से खुलेगी वास्तविक स्थिति

अब जांच समिति संबंधित खसरों के राजस्व रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व, प्रधानमंत्री आवास योजना के अभिलेख, हितग्राहियों की पात्रता, जियो-टैगिंग और मौके पर हुए निर्माण का परीक्षण करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आवास निर्माण और जियो-टैगिंग में निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।


⚠️ महत्वपूर्ण

समाचार में संबंधित व्यक्तियों के बारे में उल्लेखित बातें शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। जांच समिति की रिपोर्ट आने तक इन्हें सिद्ध अनियमितता नहीं माना जा सकता। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

दैनिक रेवाँचल टाईम्स
निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग

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