वायु स्वच्छता सर्वेक्षण में छाया जबलपुर: देश में तीसरा स्थान, मिले 50 लाख रुपये
जनभागीदारी, वृक्षारोपण, आधुनिक सफाई व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों ने दिलाया राष्ट्रीय सम्मान; अब प्रथम स्थान और AQI 70 से नीचे लाने का लक्ष्य
💰 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
🌿 औसत AQI को 130 से घटाकर 77 तक लाने का दावा
🎯 अगला लक्ष्य — राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान और AQI 70 से नीचे
दैनिक रेवांचल टाइम्स, जबलपुर। जनता-जनार्दन, स्वयंसेवी संस्थाओं और नगर निगम जबलपुर के समन्वित प्रयासों से संस्कारधानी ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान हासिल करते हुए 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि अर्जित की है।
स्वच्छता मित्रों और अधिकारियों की दिन-रात की मेहनत, वायु गुणवत्ता सूचकांक पर नियंत्रण, व्यापक वृक्षारोपण, आधुनिक सफाई मशीनों का इस्तेमाल और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को इस उपलब्धि के पीछे महत्वपूर्ण कारण माना गया है।
स्वच्छ हवा सिर्फ रैंकिंग नहीं, सीधे हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल
स्वच्छ वायु गुणवत्ता का मानव स्वास्थ्य से गहरा संबंध है। बेहतर हवा जीवन की गुणवत्ता और कार्यक्षमता के लिए आवश्यक है। देश के कई बड़े महानगरों में बढ़ते वायु प्रदूषण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहरों के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी प्राथमिकता है।
इलेक्ट्रिक-CNG वाहन और ई-रिक्शा को बढ़ावा, प्रदूषण घटाने की कोशिश
शहर में इलेक्ट्रिक एवं CNG वाहनों, ई-रिक्शा, बसों और कचरा संग्रहण वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। इसके साथ शहर के ग्रीन कवर को बढ़ाने के लिए डिवाइडरों, पार्कों और उपलब्ध खाली स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया।
खास बात यह रही कि केवल पौधे लगाने तक अभियान सीमित नहीं रखा गया, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी स्थिति की निगरानी पर भी जोर दिया गया।
अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने जन्मदिन और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधे लगाने तथा उपहार और पुरस्कार के रूप में पौधों के आदान-प्रदान की संस्कृति को प्रोत्साहित किया। इससे पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने में मदद मिली।
मैकेनिकल स्वीपिंग से डी-फॉगर तक, सड़कों की धूल पर नियंत्रण
वायु प्रदूषण कम करने के लिए धूलरहित फुटपाथों के निर्माण, प्रमुख सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग, आधुनिक स्प्रिंकलर और उन्नत डी-फॉगर मशीनों के इस्तेमाल जैसे कदम उठाए गए। नाले-नालियों और कंजरवेंसी की सफाई के दौरान धूल नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
✓ प्रमुख सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग
✓ स्प्रिंकलर और डी-फॉगर मशीनों का इस्तेमाल
✓ खुले में कचरा और पत्तियां जलाने पर सख्ती
✓ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कोयले के इस्तेमाल पर नियंत्रण
✓ निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट के प्रयोग पर जोर
✓ कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था
✓ व्यापक वृक्षारोपण और पौधों का संरक्षण
रैंक दूसरे से तीसरे स्थान पर, लेकिन प्रदर्शन में सुधार का दावा
आलेख के अनुसार, इस बार जबलपुर की राष्ट्रीय रैंकिंग दूसरे से तीसरे स्थान पर पहुंची है, लेकिन पिछले सर्वेक्षण की तुलना में शहर ने दो प्रतिशत अधिक अंक अर्जित किए हैं। प्रथम स्थान प्राप्त शहर से अंतर भी अपेक्षाकृत कम बताया गया है।
जबलपुर के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार को माना जा रहा है। कुछ वर्ष पहले शहर का औसत AQI करीब 130 बताया गया था, जिसे इस वर्ष 77 तक लाने का दावा किया गया है।
नागरिकों और मीडिया की भागीदारी भी बनी ताकत
शहर के नागरिकों की जागरूकता और सहयोग को भी इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। पर्यावरण और मां नर्मदा की भूमि की पवित्रता के प्रति नागरिक जिम्मेदारी ने स्वच्छता अभियानों को जन आंदोलन का स्वरूप देने में मदद की।
प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी वायु प्रदूषण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरण में अपनी भूमिका निभाई।
अब लक्ष्य आत्ममूल्यांकन के साथ कमियों को दूर करते हुए अगले वायु सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करना और शहर के AQI को 70 से नीचे लाना है। नागरिकों, स्वच्छता मित्रों, नगर निगम के अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से जबलपुर को अधिक स्वच्छ, हरित, सुंदर और बेहतर आबोहवा वाला शहर बनाने का संकल्प लिया गया है।
ब्रांड एंबेसडर, स्वच्छता अभियान, जबलपुर
