रेवांचल टाइम्स घुघरी - तहसील मुख्यालय घुघरी के सलवाह क्षेत्र के बाजार में जीएसटी नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कथित तौर पर एक ही बिल नंबर पर अलग-अलग राशि की दोहरी बंदी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि शिकायतों की जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल कर व्यवस्था के साथ खिलवाड़ होगा, बल्कि सरकारी राजस्व को भी बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला मामला माना जाएगा।
बताया जा रहा है कि कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों में ग्राहक को सामान की बिक्री के समय अलग हिसाब या पर्ची दी जाती है, जबकि कथित रूप से कर विभाग के रिकॉर्ड में कम राशि अथवा अलग विवरण दर्ज किए जाने की आशंका है। सबसे गंभीर आरोप एक ही बिल नंबर के अलग-अलग उपयोग को लेकर हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एक बिल नंबर, दो हिसाब—आखिर किसके संरक्षण में?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि व्यापारिक रिकॉर्ड में वास्तव में दोहरे बिल या दोहरी बंदी का खेल चल रहा है, तो लंबे समय से संबंधित विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? क्या प्रतिष्ठानों के बिक्री रजिस्टर, स्टॉक और जीएसटी रिटर्न का मिलान किया गया है? और यदि नहीं किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ग्रामीणों का आरोप है कि आम उपभोक्ता से पूरी रकम वसूलने के बाद यदि सरकारी रिकॉर्ड में कम बिक्री अथवा कम कर योग्य राशि दर्शाई जाती है, तो इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ता है। वहीं ईमानदारी से कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के सामने भी प्रतिस्पर्धा का संकट खड़ा होता है।
जीएसटी विभाग करे रिकॉर्ड का मिलान
मामले की गंभीरता को देखते हुए वाणिज्यिक कर विभाग से मांग उठ रही है कि सलवाह के बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के जीएसटी रिटर्न, टैक्स इनवॉइस, बिक्री रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक बिक्री का मिलान कराया जाए। साथ ही बिल नंबरों की क्रमवार जांच कर यह पता लगाया जाए कि कहीं एक ही नंबर पर अलग-अलग राशि के बिल तो जारी नहीं किए गए।
यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित कानूनों के तहत जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सिर्फ छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कर नियमों का पालन करने वाले छोटे व्यापारियों पर विभाग की नजर रहती है, लेकिन यदि बड़े कारोबारियों पर दोहरे रिकॉर्ड रखने जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं तो उनकी जांच कब होगी? क्या नियम सभी के लिए समान हैं या फिर बड़े कारोबारियों के लिए अलग व्यवस्था है?
सलवाह के लोगों ने मांग की है कि मामले को केवल शिकायत मानकर फाइलों में दबाने के बजाय निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए। जांच के बाद यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है तो दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जो भविष्य में कर चोरी और दोहरी बिलिंग के खेल पर रोक लगा सके।
अब निगाहें जीएसटी विभाग की कार्रवाई पर हैं—क्या सलवाह के कथित दोहरे बिलिंग खेल की परतें खुलेंगी या मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
