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पीवीआर मॉल के बाहर खाली स्थान पर वाहन खड़े करने से रोकने का आरोप, पार्किंग व्यवस्था को लेकर उठे सवाल



दैनिक रेवाँचल टाईम्स - जबलपुर। शहर में पीवीआर मॉल के आसपास पार्किंग व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। आरोप है कि मॉल के आसपास स्थित दुकानों में खरीदारी अथवा अन्य कार्य से आने वाले ग्राहकों को मॉल के समीप उपलब्ध खाली स्थान पर वाहन खड़े करने से मॉल के कर्मचारियों द्वारा रोका जाता है। कर्मचारियों का कहना बताया जा रहा है कि वाहन केवल मॉल के तलघर में बने पार्किंग स्टैंड में शुल्क देकर ही खड़े किए जाएं।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि मॉल के बाहर अथवा आसपास कोई ऐसा स्थान है, जहां वाहन यातायात नियमों का पालन करते हुए, आवागमन में बाधा उत्पन्न किए बिना और सार्वजनिक रास्ते/फुटपाथ को अवरुद्ध किए बिना खड़ा किया जा सकता है, तो निजी मॉल के कर्मचारी आखिर किस अधिकार के तहत लोगों को वहां वाहन खड़ा करने से रोकते हैं?

क्या सार्वजनिक स्थान पर पार्किंग का निर्णय मॉल कर्मचारी करेंगे?

मामला केवल पार्किंग शुल्क का नहीं, बल्कि अधिकार और यातायात व्यवस्था से जुड़ा हुआ भी है। यदि कोई वाहन गलत स्थान पर खड़ा किया जाता है, यातायात बाधित करता है अथवा नो-पार्किंग क्षेत्र में खड़ा है, तो नियमानुसार कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित नगर निगम, यातायात पुलिस अथवा सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था के पास है।

ऐसे में सवाल उठता है कि किसी निजी प्रतिष्ठान के कर्मचारी स्वयं लोगों से विवाद करने के बजाय संबंधित यातायात विभाग को सूचना क्यों नहीं देते? यदि वाहन नियम विरुद्ध खड़ा है तो यातायात पुलिस द्वारा नियमानुसार चालानी कार्रवाई अथवा वाहन हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

दुकानदारों के ग्राहकों के सामने भी समस्या

मॉल के आसपास संचालित दुकानों पर आने वाले ग्राहकों के सामने भी पार्किंग को लेकर परेशानी पैदा होने की बात कही जा रही है। ग्राहकों का कहना है कि वे आसपास की दुकानों में कुछ समय के लिए आते हैं, लेकिन मॉल के कर्मचारियों द्वारा वाहन खड़ा करने से रोका जाता है और उन्हें मॉल की पार्किंग में शुल्क देकर वाहन खड़ा करने के लिए कहा जाता है।

इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या आसपास की दुकानों में आने वाले प्रत्येक ग्राहक को केवल इसलिए मॉल की पार्किंग का उपयोग करने के लिए बाध्य किया जा सकता है क्योंकि वहां भुगतान आधारित पार्किंग उपलब्ध है?

नियम स्पष्ट करने की मांग

स्थानीय नागरिकों की मांग है कि नगर निगम एवं यातायात पुलिस द्वारा मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाए कि पीवीआर मॉल के आसपास उपलब्ध स्थान की वास्तविक स्थिति क्या है। वह निजी भूमि है, सार्वजनिक भूमि है, फुटपाथ है, पार्किंग के लिए निर्धारित क्षेत्र है या किसी अन्य प्रयोजन के लिए आरक्षित है—इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

यदि संबंधित स्थान पर वाहन खड़ा करना नियमसम्मत है तो निजी कर्मचारियों द्वारा वाहन चालकों को रोकने और विवाद करने की स्थिति पर भी प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए। वहीं यदि उस स्थान पर पार्किंग प्रतिबंधित है तो प्रशासन द्वारा स्पष्ट नो-पार्किंग संकेतक एवं यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वाहन चालकों और मॉल कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा

नागरिकों का कहना है कि पार्किंग व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें यातायात नियमों का पालन भी हो और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना भी न करना पड़े। यदि मॉल की पार्किंग शुल्क आधारित है तो उसके संचालन, प्रवेश-निकास और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र पर उसके प्रभाव की भी संबंधित विभागों द्वारा जांच की जानी चाहिए।


अब देखना यह है कि नगर निगम और यातायात पुलिस इस पूरे मामले का स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं। नागरिकों की मांग है कि पार्किंग को लेकर स्पष्ट नियम और संकेतक लगाए जाएं तथा नियम विरुद्ध पार्किंग होने पर कार्रवाई केवल अधिकृत विभाग द्वारा ही की जाए, जिससे आम नागरिकों और निजी प्रतिष्ठान के कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों पर रोक लग सके।

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