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नवागत पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी की प्राथमिकता: अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और जनता की सुरक्षा





*एसपी राजेश रघुवंशी की पुलिसिंग में खुलने लगीं पुरानी अपराध की फाइलें अपराधियों को सताने लगा ख़ौफ*


*छह साल पुराने रोशनलाल चक्रवर्ती हत्याकांड से लेकर डकैती लूटपाट का किया खुलासा, तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ से जुड़ीं अपराध की कड़ियां*


दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला/मंडला जिले में नवागत पुलिस अधीक्षक जिले की कमान संभालने के बाद से ही पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी की कार्यप्रणाली को लेकर अब पुलिस महकमे के साथ-साथ आम लोगों में चर्चा बनी हुई है और सभी की निगाहें भी टिकी हुई हैं। की अब अपराध और अपराधियों में लगाम लग सकती है और खास बात यह है कि पुलिस की कार्रवाई अब केवल नए अपराधों तक सीमित दिखाई नहीं दे रही, बल्कि पुराने और लंबित गंभीर मामलों की फाइलों को भी जांच के दायरे में लाने के संकेत मिल रहे हैं। साथ ही अबैध कारोबारियों और अपराधियों में भी कौतूहल का माहौल बना हुआ जहाँ सालों से फरार आपराधिक वारंटी को पकड़ा जा रहा है साथ ही लगातार कार्यवाही जारी है।

      वही हाल ही में बीजाडांडी थाने के अंतर्गत मनेरी में अतुलित पेट्रोल पंप पर की गई लूट और लूट को अंजाम देने वाले गुनहगारों तक पुलिस का पहुंचना यह साबित करता हैं की मंडला पुलिस कप्तान की नजरों से अपराधियों का बचना मुश्किल ही नहीं अब नामुमकिन हैं। मनेरी स्थित अतुलित पेट्रोल पंप पर जिस तरह से रात्रि का फायदा उठाते हुए लूट करने वाली गैंग ने तत्परता दिखाते हुए फायदा उठाना चाहा उससे कहीं ज़्यादा तत्परता के साथ मंडला पुलिस कप्तान ने अपनी कमान सम्हालते हुए घटना स्थल पर पहुंच कर बारीकी से निरीक्षण कर कार्यवाही करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और उसी का परिणाम हैं कि आज आधे से ज्यादा लुटेरे पुलिस की गिरफ्त से होते हुए सलाखों के पीछे दिखाई दे रहे हैं। 

  इसके साथ ही हालिया कुछ दिनों पूर्व में भी मंडला पुलिस कप्तान की नजरों में अन्य पुरानी फाइलों को खंगाला जा रहा हैं जिसमें जिले में हुए अन्य पुराने आपराधिक मामलों का खुलासा निरंतर किया जा रहा हैं। ऐसा ही एक मामला महाराजपुर थाना क्षेत्र के रानू नंदा हत्याकांड की जांच के दौरान बम्हनी थाना क्षेत्र के वर्ष 2020 के रोशनलाल चक्रवर्ती हत्याकांड से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार छह वर्ष पुराने इस मामले में रामसिंह चक्रवर्ती से पूछताछ और उपलब्ध तथ्यों के क्रॉस-वेरिफिकेशन के बाद पुराने हत्याकांड से संबंधित सुराग मिले हैं।


पुलिस कप्तान के अनुसार रोशनलाल चक्रवर्ती का शव 20 नवंबर 2020 की रात से 21 नवंबर की सुबह के बीच सिलगी रोड स्थित चिरई पहाड़ी के पास मिला था। शव पर सिर और गले में चोट के निशान पाए गए थे। उस समय अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

    छह वर्ष बाद इस मामले की कड़ियों का दोबारा जुड़ना मंडला पुलिस की जांच व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि पुलिस ने पुराने मामले में सामने आए तथ्यों का सत्यापन जारी रखा है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसलिए जांच पूरी होने और न्यायालयीन प्रक्रिया से पहले किसी व्यक्ति को दोषी कहना उचित नहीं होगा।


*तीन-चार दिन की मेहनत में खुली कई कड़ियां*


रानू नंदा हत्याकांड की जांच में पुलिस टीम ने लगातार तीन-चार दिनों तक काम किया। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक तकनीकी साक्ष्यों, पूछताछ और क्रॉस-वेरिफिकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ी। इस कार्रवाई में एसडीओपी पीयूष मिश्रा, हिरदेनगर चौकी प्रभारी सहित पुलिस टीम की भूमिका रही और पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीम को पुरस्कृत भी किया।

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में आधुनिक पुलिसिंग में केवल घटनास्थल की पारंपरिक जांच ही पर्याप्त नहीं रह गई है। मोबाइल, तकनीकी साक्ष्य, घटनाओं की कड़ियों का मिलान और संदिग्धों से वैज्ञानिक तरीके से पूछताछ अपराध की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।


*अब बारी बाकी लंबित मामलों की*


मंडला जिले में पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि ऐसे ही अन्य लंबित गंभीर मामलों की भी समीक्षा कितनी तेजी से होती है।

जिले के विभिन्न थानों में वर्षों से लंबित हत्या, चोरी, पैसा दोगुना करने के नाम पर संगठित लूट खसोट, महिला अपराध, गुमशुदगी और अन्य गंभीर मामलों की यदि थाना-वार समीक्षा की जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं जिनमें नई तकनीक और नए सिरे से जांच के जरिए महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

यही वह क्षेत्र है जहां नए पुलिस कप्तान की वास्तविक परीक्षा होगी।


*अपराधी के लिए सबसे बड़ा संदेश समय बीतने से मामला खत्म नहीं होता*


अपराधियों में कानून का डर केवल पुलिस की छापेमारी या गिरफ्तारी से पैदा नहीं होता। असली डर तब पैदा होता है जब अपराधी को यह महसूस हो कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, पुलिस उसकी कड़ियां जोड़कर उस तक पहुंच सकती है।


*रोशनलाल चक्रवर्ती मामले में छह साल बाद सामने आया सुराग इसी संदेश को मजबूत करता है।*


यदि आने वाले समय में मंडला पुलिस पुराने गंभीर अपराधों की फाइलों की नियमित समीक्षा करती है, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तेज करती है, अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई करती है और नए अपराधों की जांच तकनीकी साक्ष्यों के साथ करती है तो इसका सीधा असर अपराधियों के मनोबल पर पड़ सकता है।


*पुलिस कप्तान के सामने असली चुनौती*


पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी के सामने अब केवल अपराधों का खुलासा करने की चुनौती नहीं है। चुनौती यह भी है कि मंडला के प्रत्येक थाने में कार्रवाई की यही गति दिखाई दे।

    वही थाना स्तर पर लंबित गंभीर अपराधों की समीक्षा, फरार आरोपियों की धरपकड़, वारंटियों पर कार्रवाई, नशे और अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा, सट्टा-जुआ जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक और साइबर अपराधों की जांच—इन सभी मोर्चों पर पुलिस की सक्रियता जनता के विश्वास को मजबूत कर सकती है। इसके साथ ही पुलिस कप्तान के सामने तरह तरह की चुनौतियां जिसमें अपराध रोकने, कानून कायम रखने और जनता की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में रखना  भी है।


*खुलासे के साथ न्याय तक पहुंचना जरूरी*


किसी भी अपराध का खुलासा पुलिस की सफलता का पहला चरण है। अंतिम सफलता तब मानी जाएगी जब जांच मजबूत साक्ष्यों के साथ न्यायालय तक पहुंचे और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा हो।

इसलिए मंडला पुलिस के सामने आने वाले दिनों में एक तरफ पुराने मामलों की गुत्थियां सुलझाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी कि जांच की गुणवत्ता इतनी मजबूत हो कि अपराधी कानून की प्रक्रिया से बच न सके।

        वही नवागत पुलिस अधीक्षक मंडला जिले की कमान संभालने के बाद अब पुलिसिंग का नया पैमाना यही होना चाहिए—अपराध छोटा हो या बड़ा, नया हो या छह साल पुराना, कानून की नजर से बचने की कोई गुंजाइश नहीं।


अगर पुलिस इस संदेश को जमीन पर लगातार साबित करती है तो निश्चित तौर पर अपराधियों में कानून का भय और आम नागरिकों में पुलिस के प्रति विश्वास दोनों बढ़ेंगे।

     वही इसके साथ ही विगत 31 जुलाई 2026 को एसपी राजेश रघुवंशी की अध्यक्षता में मासिक अपराध समीक्षा बैठक में संपत्ति संबंधी अपराधों पर सख्ती और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। जिससे यह साबित होता हैं कि मंडला जिले के आम नागरिकों को पुलिस पर विश्वास और अपराधियों  पर लगाम जरूर लगेगी।


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