दैनिक रेवाँचल टाईम्स - नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जिसे हर वर्ष सावन में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है धार्मिक मान्यता है कि इस दिन नागों की विधिवत पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परिवार को सांपों के भय से सुरक्षा मिलती है नाग पंचमी के दिन 12 प्रमुख है नागों की आराधना की जाती है अनंत वासुकी शेष पदम कंबल कर्कोटक अश्वतर धृतराष्ट्र शंखपाल कालिया तक्षक और पिंगल
तिथि एवं मुहूर्त
नाग पंचमी पर्व 17 अगस्त को मनाई जाएगी इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह है 5:51 बजे से 8:29 बजे तक रहेगा पंचमी तिथि 16 अगस्त को शाम 4. 52 बजे से आरंभ होकर 17 अगस्त को शाम के 5:00 बजे तक रहेगी
इस दिन सावन सोमवार भी है इसलिए बहुत लोग सोमवार का शिव व्रत और सांपों की पूजा करेंगे !
नाग पंचमी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहने उसके बाद भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी श्रद्धापूर्वक पूजा करें पूजा स्थल पर नाग देवता की तस्वीर स्थापित करें नाग देवता की प्रतिमा को लाल कपड़े पर स्थापित करें इसके बाद हल्दी रोली कच्चा दूध सफेद पुष्प अर्पित करें यदि संभव हो तो इस दिन रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि इस दिन जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है उस व्यक्ति को चांदी के नाग नागिन का जोड़ा पूजन कर बहते जल में प्रवाहित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है
नागों की उत्पत्ति कैसे हुई
पौराणिक मान्यता के अनुसार सृष्टि सृजन के आरंभ में एक बार किसी कारणवश या ब्रह्मा जी को बड़ा क्रोध आया जिनके परिणाम स्वरूप उनके आंसुओं की कुछ बूंद
पृथ्वी पर गिरी और इस बूंद के रूप में नागो की उत्पत्ति हुई ब्रह्मा जी ने इन्हें पुत्र मानते हुए ग्रहों के बराबर ही शक्तिशाली बनाया इनमें अनंतनाग सूर्य के वासुकी चंद्रमा के मंगल तक्षक मंगल के करकोट बुद्ध के पद में बृहस्पति के महापदम शुक्र के कालिक और शंखपाल शनि ग्रह के रूप में है यह सभी नाग भी सृष्टि संचालन में ग्रहों के समान भूमिका निभाते हैं यह शेषनाग रूप में स्वयं पृथ्वी को अपने फन पर धारण करते हैं इनकी पूजा अर्चना से आर्थिक तंगी और वंश वृद्धि में आ रही रुकावट से छुटकारा मिलता है ग्रामीण अंचलों में नाग पंचमी के दिन लोग अपने-अपने दरवाजे पर गाय के गोबर से सांपों की 9 आकृति बनाते हैं और नागों की पूजा करते हैं इसलिए कहा जाता है कि जहां नाग देवता का वास होता है वहां लक्ष्मी जरूर रहती है !
2019 में भी सोमवार को पड़ी थी नाग पंचमी
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि 7 वर्ष पूर्व सोमवार को 5 अगस्त 2019 को पड़ी थी उसे बार भी इस वर्ष की तरह सावन का तीसरा सोमवार था जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष या राहु केतु से जुड़ी समस्याएं होती हैं उनके लिए इस दिन नाग पूजा शिव जी का रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत फलदाई होता है !
कालसर्प दोष है क्या
ज्योतिष के अनुसार जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी सातों मुख्य ग्रह सूर्य चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं तब कालसर्प दोष बनता है कुंडली में यह दोष होने से व्यक्ति के जीवन में अत्यधिक संघर्ष मानसिक तनाव और हर काम में रुकावट आने लगती है ।

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