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आखिर मंडला को कब मिलेगा सामान्य सीट का दर्जा...विधानसभा, लोकसभा सीट को बनाया जाए सामान्य

 



दैनिक रेवाँचल टाईम्स- मंडला, आखिरकार सामान्य वर्ग की ऊपेक्षा कब तक की जाएगी । लगातार सामान्य वर्ग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसकी वजह से नागरिकों में आक्रोश बन रहा है ।काफी लंबे समय से मांग की जा रही है कि मंडला लोकसभा व विधानसभा को सामान्य सीट घोषित किया जाए लेकिन शासन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसकी वजह से नागरिकों में नाराजगी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। नागरिकों का कहना है कि सामान्य वर्ग सीट आरक्षित करने से इस जिले का विकास तेजी के साथ पूरा होगा और यह जिला विकास की मुख्य धारा से जुड़ेगा लेकिन शासन प्रशासन द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। जिसकी वजह से नागरिकों का आक्रोश  ज्यादा बढ़ता जा रहा है। नागरिकों की मांग है कि मंडला लोकसभा व विधानसभा को इस बार आवश्यक रूप से सामान्य सीट घोषित किया जाए ताकि सामान्य वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिले और उनके द्वारा विकास की गति को आगे बढ़ाया  जाए।मंडला जिसे आदिवासी संस्कृति का गहना कहा जाता है, आज भी विकास की दौड़ में पिछड़ता जा रहा है।रेलवे लाइन से लेकर उद्योग, शिक्षा से लेकर रोज़गार हर मोर्चे पर मंडला सिर्फ वादों के सहारे जिंदा है।लोगों का सवाल सीधा है — क्या इस हालात का एक बड़ा कारण यह नहीं कि सांसद और विधायक सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रखा गया है, और इस वजह से यहां के प्रतिनिधियों पर राजनीतिक दबाव और प्रतिस्पर्धा उतनी नहीं है, जितनी एक सामान्य सीट पर होती?

सच्चाई कड़वी है — जब देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, तब मंडला आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है।

अगर यहां के जनप्रतिनिधि वास्तव में जागरूक और दूरदर्शी होते, तो आज जबलपुर से सीधे मंडला, धंसौर से मंडला, और बिलासपुर से डिंडोरी होकर मंडला तक रेलवे लाइन बिछ चुकी होती।लेकिन हुआ उल्टा — पद की कुर्सी को निजी विकास का साधन बनाया गया और मंडला को अंधकार में छोड़ दिया गया।जनता अब कह रही है:

"सांसद और विधायक सीट को सामान्य सीट बनाया जाए — ताकि इस क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हो, और जो भी प्रतिनिधि बने, वह मंडला के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाए!"

ये सिर्फ एक मांग नहीं — मंडला की गरिमा और भविष्य का सवाल है।अगर अब भी चुप्पी रही, तो आने वाले वर्षों में हम और पीछे चले जाएंगे, और बाकी दुनिया हमें सिर्फ पिछड़े जिले के नाम से याद करेगी।

अब मंडला उठे, बोले, और अपने हक के लिए लड़े — क्योंकि चुप्पी अब अपराध है! नागरिकों को आगे आना होगा इस मांग को पूरा करने के लिए दमदारी के साथ प्रयास करना पड़ेगा तब यह मांग पूरी होगी क्या मंडला जिले की नागरिक इस विषय पर आगे आएंगे और अपनी मांग को पूरा करने के लिए शासन प्रशासन से प्रयास करेंगे यह मांग अब अत्यंत जरूरी है। इस मांग का पूरा होना भी बेहद जरूरी है शीघ्र इस मांग को शासन प्रशासन द्वारा पूरा किया जाए ऐसी  जन अपेक्षा है।

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