Breaking

revanchal times new

आदिवासी अंचल के महाकौशल-छत्तीसगढ़ रेल क्रांति: पेंड्रा रोड-अमरकंटक-मंडला-गोटेगांव रेल कॉरिडोर के FLS हेतु विधायक मार्को का रेल मंत्री को पत्र



देश का पहला 'जंगल एवं इको-टूरिज्म रेल कॉरिडोर'

दैनिक रेवाँचल टाईम्स - नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर से पेंड्रा अचनकमार अमरकंटक, कान्हा घुगुआ फासिल और पेंच राष्ट्रीय उद्यान सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे*नर्मदा-विंध्य रेल मार्ग से महाकौशल में पर्यटन क्रांति: एक ही ट्रैक पर दिखेंगे धार्मिक, सांस्कृतिक और वाइल्डलाइफ केंद्र




अनूपपुर/डिंडोरी /मंडला:मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती वनांचल एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रेल विकास की उम्मीदों को नया बल मिला है। पुष्पराजगढ़ विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर प्रस्तावित पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–गोटेगांव (श्रीधाम) रेल कॉरिडोर (406.2 किमी) के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (Final Location Survey - FLS) की तत्काल नीतिगत स्वीकृति और बजट आवंटन की मांग की है।

1944 की ऐतिहासिक परिकल्पना और 2015 के सर्वे का आधार

विधायक मार्को ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2015 में इस 406.2 किमी लंबे मार्ग का प्रारंभिक टोह सर्वेक्षण (Reconnaissance Survey - RECT) पूर्ण हो चुका था। यह रेल मार्ग न केवल दो राज्यों के बीच एक वैकल्पिक और छोटा संपर्क मार्ग तैयार करेगा, बल्कि बिलासपुर और जबलपुर के बीच की वर्तमान यात्रा दूरी में लगभग 100 किलोमीटर तक की भारी कमी लाएगा। ऐतिहासिक रूप से मध्य भारत को जोड़ने वाली इस रणनीतिक रेल लाइन की परिकल्पना दशक पहले की गई थी, जिसे अब धरातल पर उतारने का सही समय आ गया है।

SECR बिलासपुर और नागपुर मंडल का सकारात्मक रुख

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर द्वारा 09 जुलाई 2026 को जारी पत्र का हवाला देते हुए विधायक ने बताया कि क्षेत्रीय स्तर पर बिलासपुर मुख्यालय और नागपुर मंडल दोनों ने ही इस परियोजना की सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता पर सहमति जताई है। रेलवे प्रशासन के इस सकारात्मक रुख के बाद अब केवल रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से FLS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

*देश का पहला 'जंगल एवं इको-टूरिज्म रेल कॉरिडोर'*

प्रस्तावित मार्ग मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक केंद्रों को एक सूत्र में पिरोएगा:

*धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र:* नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक और झोलेश्वर धाम तक श्रद्धालुओं की पहुंच सुगम होगी।

*टाइगर रिजर्व कनेक्टिविटी:* कान्हा नेशनल पार्क, पेंच राष्ट्रीय उद्यान और अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ते हुए यह देश का अनूठा "जंगल रेल कॉरिडोर" बनेगा।

*रेल मंत्रालय से प्रमुख मांगें:*

*1.FLS स्वीकृति:* 406.2 किमी लंबी पेंड्रा रोड-अमरकंटक-डिंडोरी-मंडला-गोटेगांव रेल परियोजना के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) के तत्काल आदेश जारी हों।

*2.DPR निर्माण व बजट:* FLS हेतु आवश्यक धनराशि आवंटित कर संबंधित अधिकारियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।

*3.क्षेत्रीय सशक्तिकरण:* वनांचल और आदिवासी अंचल के सर्वांगीण विकास एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को देखते हुए सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

*आदिवासी अंचल में उत्साह की लहर*

विधायक द्वारा सीधे रेल भवन को पत्र भेजे जाने के बाद स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने बताया की पूरे महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र के जन-प्रतिनिधियों व रेल प्रेमी जनता में उत्साह है। यदि FLS की मंजूरी मिलती है, तो यह परियोजना मध्य भारत के रेल नेटवर्क के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post