दैनिक रेवाँचल टाईम्स - नाग पंचमी कालसर्प दोष निवारण के लिए श्रेष्ठ दिन है यह दिन दुर्लभ माना जाता है शास्त्रों में सरपमुख को राहु व पूछ को केतु माना गया है इनके बीच आने वाले ग्रहों के कारण ही कालसर्प दोष बनता है इसलिए नाग पंचमी के दिन पूजन करने से कालसर्प दोष निवारण के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन है
सर्प दश का नहीं रहेगा भय
इस दिन घर में विधि विधान से नाग देवता की पूजा की जाती है इससे घर में सुख समृद्धि में वृद्धि होती है और परिवार को सर्प दश का भय नहीं रहता है नाग पंचमी के दिन आठ मुखी रुद्राक्ष व नौ मुखी रुद्राक्ष का पूजन कर धारण करने से कालसर्प का दोष मिट जाता है जिस जातक के जीवन में कालसर्प दोष हो वे नाग पंचमी के दिन शिव मंदिर में चांदी के नाग नागिन का जोड़ा चढ़ाने से कालसर्प के दोस से मुक्ति मिलती है
नाग पंचमी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहने उसके बाद भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी श्रद्धापूर्वक पूजा करें पूजा स्थल पर नाग देवता की तस्वीर स्थापित करें नाग देवता की प्रतिमा को लाल कपड़े पर स्थापित करें इसके बाद हल्दी रोली कच्चा दूध सफेद पुष्प अर्पित करें यदि संभव हो तो इस दिन रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है
वही पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि इस दिन जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है उस व्यक्ति को चांदी के नाग नागिन का जोड़ा पूजन कर बहते जल में प्रवाहित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है
नागों की उत्पत्ति कैसे हुई
पौराणिक मान्यता के अनुसार सृष्टि सृजन के आरंभ में एक बार किसी कारणवश या ब्रह्मा जी को बड़ा क्रोध आया जिनके परिणाम स्वरूप उनके आंसुओं की कुछ बूंद
पृथ्वी पर गिरी और इस बूंद के रूप में नागो की उत्पत्ति हुई ब्रह्मा जी ने इन्हें पुत्र मानते हुए ग्रहों के बराबर ही शक्तिशाली बनाया इनमें अनंतनाग सूर्य के वासुकी चंद्रमा के मंगल तक्षक मंगल के करकोट बुद्ध के पद में बृहस्पति के महापदम शुक्र के कालिक और शंखपाल शनि ग्रह के रूप में है यह सभी नाग भी सृष्टि संचालन में ग्रहों के समान भूमिका निभाते हैं यह शेषनाग रूप में स्वयं पृथ्वी को अपने फन पर धारण करते हैं इनकी पूजा अर्चना से आर्थिक तंगी और वंश वृद्धि में आ रही रुकावट से छुटकारा मिलता है ग्रामीण अंचलों में नाग पंचमी के दिन लोग अपने-अपने दरवाजे पर गाय के गोबर से सांपों की 9 आकृति बनाते हैं और नागों की पूजा करते हैं इसलिए कहा जाता है कि जहां नाग देवता का वास होता है वहां लक्ष्मी जरूर रहती है
