बिना डायवर्जन, बिना TNCP ले-आउट और बिना अनुमति बिक गए 7 प्लॉट, रजिस्ट्रियां जारी... आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?
दैनिक रेवांचल टाइम्स | विशेष संवाददाता | निवास (मंडला)मंडला जिले में अवैध कॉलोनियों का कारोबार अब केवल आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी जांच रिपोर्टों में भी इसकी पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। निवास के ग्राम आमाडोंगरी में बिना डायवर्जन, बिना सक्षम अनुमति और बिना स्वीकृत ले-आउट के कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने का मामला सामने आया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्व विभाग की 23 जनवरी 2026 की मौका जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि संबंधित भूमि से 7 लोगों को प्लॉट बेचे जा चुके हैं, लेकिन भूमि का व्यपवर्तन (डायवर्जन) नहीं कराया गया, TNCP का स्वीकृत ले-आउट उपलब्ध नहीं कराया गया और कॉलोनी में सड़क, नाली तथा पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। इसके बावजूद न प्लॉट बिक्री रुकी और न ही रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक दिखाई दे रही है।
क्या प्रशासन जनता को लुटते हुए देख रहा है?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सरकारी जांच रिपोर्ट स्वयं अनियमितताओं की ओर संकेत कर रही है तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन किसी बड़े नुकसान का इंतजार कर रहा है?
हर व्यक्ति अपने जीवन की जमा-पूंजी लगाकर घर का सपना देखता है। लेकिन यदि बिना वैधानिक अनुमति वाली कॉलोनियों में प्लॉट बिकते रहे और भविष्य में वे अवैध घोषित हुए, तो सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ेगी। जिन परिवारों ने वर्षों की कमाई लगाई है, उनका सपना कागजों में ही सिमट सकता है।
रजिस्ट्रियां कैसे हो रही हैं?
जब जांच में बिना अनुमति कॉलोनी विकसित होने, डायवर्जन न होने और स्वीकृत ले-आउट न होने का उल्लेख है, तब सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसे प्लॉटों की रजिस्ट्रियां किस आधार पर हो रही हैं? क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव है, या फिर नियमों की अनदेखी की जा रही है?
सरकार सख्त, लेकिन मंडला प्रशासन नरम क्यों?
प्रदेश सरकार लगातार अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देती रही है। कई जिलों में अवैध कॉलोनियों पर एफआईआर, बुलडोजर कार्रवाई और प्लॉट बिक्री पर रोक जैसे कदम उठाए गए हैं। लेकिन मंडला जिले में शिकायत, नोटिस, मौका जांच और रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई का अभाव यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर यहां कानून का डंडा कमजोर क्यों पड़ जाता है?
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
यह मामला अब केवल राजस्व विभाग तक सीमित नहीं है। जनता पूछ रही है कि क्षेत्र के विधायक, जिले के प्रभारी मंत्री और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि आखिर कब हस्तक्षेप करेंगे? क्या आम लोगों की जिंदगी भर की कमाई को दांव पर लगाने वाले इस कथित अवैध कारोबार पर रोक लगेगी या फिर प्रशासनिक खामोशी भू-माफियाओं के हौसले और बढ़ाती रहेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब सरकारी जांच में अनियमितताएं दर्ज हैं, तब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी? या फिर मंडला में अवैध कॉलोनियों का कारोबार इसी तरह बेखौफ चलता रहेगा और आम जनता अपने "आशियाने के सपने" के नाम पर ठगी का शिकार होती रहेगी?
वही शिकायत कर्ता के आवेदन के अनुसार आधार पर यह स्पष्ट है कि:
27.05.2025 को एसडीएम निवास को अवैध कॉलोनी एवं प्लॉट विक्रय की शिकायत दी गई।
21.01.2026 को राजस्व निरीक्षक ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए।
23.01.2026 की मौका जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि संबंधित खसरा 51/1... एवं 51/2 की भूमि से 7 लोगों को भूमि विक्रय की जा चुकी है।
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि भूमि का डायवर्जन नहीं कराया गया, TNCP प्लानिंग एवं स्वीकृत ले-आउट उपलब्ध नहीं कराया गया, तथा कॉलोनी में सड़क, नाली, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
आखिर क्यों इन भू माफियाओं अबैध कॉलोनी को पनपने दे रहा हैं प्रशासन क्यों नही कर रहे कार्यवाही।



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