34 से अधिक घटनाओं के बावजूद नहीं चेता प्रशासन, छोटे लाल उर्फ चीनी सोनी की मौत के बाद उठे बड़े सवाल
नारायणगंज बंद और उग्र आंदोलन की चेतावनी के बाद हरकत में आया प्रशासन
दैनिक रेवांचल टाइम्स - नारायणगंज। नगर में वर्षों से जारी बंदरों के आतंक ने आखिरकार एक और परिवार की खुशियां छीन लीं। लगातार हो रही घटनाओं और नागरिकों की शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने पर अब लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते वर्षों में बंदरों के कारण लगभग 34 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोग घायल हुए, किसी के हाथ टूटे तो किसी के पैर, लेकिन प्रशासन ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
जानकारी के अनुसार, 1 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 7 बजे नारायणगंज निवासी छोटे लाल उर्फ चीनी सोनी अपने घर की छत पर टहल रहे थे। तभी बंदरों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के प्रयास में वह जल्दबाजी में सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे, लेकिन उनका पैर फिसल गया और वे सीढ़ियों से सीधे नीचे गिर पड़े। हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जबलपुर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद प्रशासन ने तीन दिनों के भीतर बंदरों को पकड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आज तक एक भी बंदर नहीं पकड़ा जा सका। लोगों का कहना है कि जनाक्रोश को शांत करने के लिए प्रशासन ने केवल दो दिनों तक औपचारिक अभियान चलाया और उसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
मृतक की मौत के बाद नगरवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी कि यदि बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो नारायणगंज पूर्णतः बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि नगर बंद और आंदोलन की चेतावनी के बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तथा कार्रवाई का आश्वासन दिया।
नगरवासियों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी स्थायी समाधान प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।
अब नागरिकों ने मांग की है कि बंदरों को पकड़ने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
