छिंदवाड़ा से जितेन्द्र अलबेला की रिपोर्ट
वाहिनी परिसर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सेनानी कमांडेंट श्रीमती निवेदिता गुप्ता द्वारा गरिमामय वातावरण में झंडा वंदन ध्वजारोहण किया गया। इसके तत्पश्चात राष्ट्रगान की बहुत ही मधुर और सुमधुर धुन प्रस्तुत की गई, जिसने पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान संपूर्ण इकाई में अनुशासन देखते ही बन रहा था। मंच से गूंजती देशभक्ति की शायरियों और ऊर्जावान माहौल ने समारोह की शोभा और बढ़ा दी।
अति उत्कृष्ट सेवा पदक से 3 पुलिस कर्मचारी सम्मानित
पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा उत्कृष्ट सेवाओं के लिए स्वीकृत 'अति उत्कृष्ट सेवा पदक' से 3 कर्मचारियों को अलंकृत किया गया। सेनानी श्रीमती निवेदिता गुप्ता ने स्वयं पदक लगाकर कर्मचारियों को सम्मानित किया:
प्रधान आरक्षक 142 सुधे सिंह कुलस्तेअति उत्कृष्ट सेवा पदक (2022)
प्रधान आरक्षक 774 भूप सिंह मरकाम अति उत्कृष्ट सेवा पदक (2022)
प्रधान आरक्षक 112 हीरा चंद कंगाली अति उत्कृष्ट सेवा पदक (2023)
समयबद्ध पदोन्नति कार्यों हेतु D.O. लेटर (प्रशंसा पत्र) से सम्मान
इकाई के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदोन्नति संबंधी कार्यवाही को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अथक प्रयास, कड़ी मेहनत और उच्च कोटि की व्यावसायिक दक्षता के साथ पूर्ण करने पर अधिकारियों को D.O. लेटर प्रदान कर सम्मानित किया गया:
उपसेनानी अरुण कश्यप
सहायक सेनानी श्रीमती उषा राय
निरीक्षक संतोष कुमार उईके
सराहनीय कार्य हेतु प्रशस्ति पत्र वितरण
समारोह के दौरान इकाई के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को पूरी लगन, निष्ठा और मेहनत से संपादित करने पर प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। सम्मानित कर्मचारियों ने एक-एक कर मंच पर उपस्थित होकर उच्च अनुशासन का परिचय देते हुए अपने प्रशस्ति पत्र प्राप्त किए।
*देश आज़ाद, मन अभी भी ग़ुलाम -सेनानी कमांडेंट श्रीमती निवेदिता गुप्ता*
बाहरी स्वतंत्रता बनाम आंतरिक स्वतंत्रता: देश सीमाओं और औपनिवेशिक शासन से मुक्त हो चुका है, किंतु हम स्वयं के रचे अदृश्य पिंजरों में कैद हैं।
*भय का साम्राज्य* असफलता का डर, 'लोग क्या कहेंगे' का भय, और बदलाव से घबराहट ये विचार हमें खुलकर जीने और अपनी पूरी क्षमता से काम करने से रोकते हैं।
*आंतरिक बेड़ियों से मुक्ति की ज़रूरत* असली स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं होती। सच्ची आज़ादी तब मिलेगी जब हम अपने भीतर के डर, झिझक और संकीर्ण सोच पर विजय प्राप्त करेंगे।
रेवांचल टाइम्स का निष्कर्ष
देश की आज़ादी एक पड़ाव थी, लक्ष्य नहीं। असली आज़ादी तब है जब आपका मन निर्भय हो और विचार स्वतंत्र हों।



