भगवान भरोसे रह रहे छात्रावास के बच्चे बेहोशी में जिम्मेदार
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में संचालित सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। छात्रावासों में पदस्थ अधीक्षकों के मुख्यालय में नहीं रहने, बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं में लापरवाही बरतने सहित कई गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था सुधारने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं, जिसके कारण छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी एवं जरूरतमंद बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले के कई सरकारी छात्रावासों में अधीक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। कई अधीक्षक मुख्यालय छोड़कर अन्य स्थानों से आवागमन कर रहे हैं, जिससे छात्रावासों की निगरानी और बच्चों की देखरेख प्रभावित हो रही है। बताया जा रहा है कि कुछ छात्रावासों में अधीक्षकों ने अपनी जगह निजी तौर पर चौकीदार या अन्य लोगों को जिम्मेदारी सौंप रखी है, जबकि बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन की जवाबदारी शासन द्वारा नियुक्त अधीक्षकों की होती है।
अधीक्षक गायब, व्यवस्थाएं बदहाल
छात्रावासों में अधीक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बच्चों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। कई जगहों पर भोजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती की जा रही है।
छात्रावासों को मिलने वाली खाद्य सामग्री, स्टेशनरी, खेल सामग्री सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं का भी सही उपयोग हो रहा है या नहीं, यह जांच का विषय बना हुआ है। लंबे समय से छात्रावासों में मिलने वाली सामग्री का कोई स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आने से गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है।
खेल सामग्री और शैक्षणिक सुविधाएं भी नदारद
सरकारी छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल सामग्री और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश हैं, लेकिन जिले के कई छात्रावासों में खेल सामग्री का अभाव बताया जा रहा है। खेल मैदानों की कमी के कारण बच्चे खेल गतिविधियों से भी वंचित हो रहे हैं।
वहीं शाम और रात्रि के समय बच्चों की पढ़ाई के लिए कोचिंग शिक्षक या अतिरिक्त शिक्षण व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रावासों में नियमित अध्ययन व्यवस्था सुनिश्चित करने के दावे भी जमीनी स्तर पर कमजोर दिखाई दे रहे हैं।
निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छात्रावासों की निगरानी कौन कर रहा है? विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने के कारण व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से किया जा रहा है या नहीं, इसको लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते छात्रावासों की जांच नहीं की गई तो सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले बच्चों के साथ अन्याय होता रहेगा।
नैनपुर क्षेत्र के छात्रावासों को लेकर ज्यादा शिकायतें
जिले की नैनपुर तहसील क्षेत्र के सरकारी छात्रावासों को लेकर सबसे अधिक शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई छात्रावासों में लंबे समय से इसी तरह की लापरवाही चल रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है।
आकस्मिक जांच और कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिलेभर के सभी सरकारी छात्रावासों की अचानक जांच कराई जाए। मुख्यालय में नहीं रहने वाले अधीक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाए और छात्रावासों में पर्याप्त सामग्री, बेहतर भोजन, नियमित पढ़ाई एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
लोगों का कहना है कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चे शासन की जिम्मेदारी हैं। इनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर शिकायतों पर कब तक कार्रवाई करता है।

