मामूली घरेलू विवाद ने लिया खूनी रूप, नेवसा बहेरा में सनसनी — एक भाई की मौत, दूसरा पहुंचा सलाखों के पीछे
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला-बिछिया। एक परिवार उजड़ गया… एक भाई दुनिया छोड़ गया और दूसरा अब जेल की सलाखों के पीछे है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि हत्या किसने की? बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर गांव-गांव पहुंच रहे नशे ने कितने परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है?
ग्राम नेवसा बहेरा में 27 अगस्त की रात मामूली घरेलू विवाद ने ऐसा खूनी रूप लिया कि भाई ने ही भाई के सिर पर फावड़ा दे मारा। बजारी मरकाम (45) की मौत हो गई, जबकि उसका छोटा भाई अनिल मरकाम (42) हत्या के आरोप में गिरफ्तार हो चुका है।
वही बताया गया कि दोनों भाइयों के बीच घरेलू बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद बढ़ा और गुस्से में अनिल ने फावड़े से बजारी के सिर पर वार कर दिया। एक वार ने परिवार की पूरी तस्वीर बदल दी।
नशा गांव-गांव, मौत घर-घर?
यह घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि गांवों में बढ़ती नशाखोरी पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। यदि नशे की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ती रही और समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो घरेलू विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।
शराब बेचने वाला कमाता है पैसा, नशे में डूबा परिवार गंवाता है अपना सुकून—और जब कोई अनहोनी होती है तो सवाल परिवार के हिस्से में आता है।
ठेकेदार की कमाई या परिवार की बर्बादी—जिम्मेदार कौन?
शराब की बिक्री से राजस्व और कारोबार चलता है, लेकिन जब यही शराब किसी घर में हिंसा और तबाही का कारण बनती है तो जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या गांव-गांव बिक रही शराब पर जिम्मेदार विभागों की नजर है?
क्या अवैध बिक्री पर वास्तव में लगाम लग रही है?
क्या नशे के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
और सबसे बड़ा सवाल—
जब नशे के कारण एक परिवार उजड़ जाए, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
यह सवाल किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का है।
पुलिस ने आरोपी को दबोचा
घटना की सूचना ग्राम कोटवार प्रतापदास भासंत द्वारा दिए जाने के बाद थाना बिछिया पुलिस मौके पर पहुंची। प्रार्थी की रिपोर्ट पर धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 28 अगस्त 2026 को आरोपी अनिल मरकाम को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को रिमांड के लिए न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक रंजीत सिंह सैयाम, उपनिरीक्षक सुरेश कुमार विजयवार, सउनि बालमुकुन्द चौरसिया, प्रधान आरक्षक अनिल मर्सकोले, प्रधान आरक्षक जितेन्द्र परते, आरक्षक गजरूप उद्दे, अमृत मरावी एवं विशाल मरावी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अब असली सवाल—क्या सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी से कहानी खत्म?
एक व्यक्ति गिरफ्तार हो गया, लेकिन गांवों में नशे की समस्या का क्या?
अगर शराब और नशे की वजह से परिवार लगातार बर्बाद होते रहे तो केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी।
वही आज नेवसा बहेरा में एक परिवार उजड़ा है। कल किसी और गांव की बारी न आए, इसके लिए अवैध शराब के नेटवर्क और नशे की बढ़ती पहुंच पर जिम्मेदार विभाग कब सख्त कार्रवाई करेंगे?
रेवांचल टाइम्स का सवाल साफ है—
शराब बिकती रहे, पैसा बनता रहे और परिवार उजड़ते रहें… आखिर इस पूरी व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा?
