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ACR के अभाव में रुकी पदोन्नति पर हाईकोर्ट सख्त, 30 दिन में रिव्यू DPC के निर्देश



जूनियरों को पदोन्नति मिलने पर उठाया था सवाल, पात्र पाए जाने पर पिछली तारीख से मिलेगा प्रमोशन और सभी परिणामी लाभ

दैनिक रेवाँचल टाईम्स - जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में विभाग को 30 दिनों के भीतर रिव्यू डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि विभागीय स्तर पर ACR उपलब्ध न होने की कमी के कारण किसी कर्मचारी को पदोन्नति के लिए विचार किए जाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की पीठ ने 20 अगस्त 2026 को W.P. No. 32857/2026, विनीत कुमार तिवारी बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने पैरवी की।

71 प्लाटून कमांडरों को मिली पदोन्नति, याचिकाकर्ता रह गए बाहर

मामले के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश के तहत 71 प्लाटून कमांडरों को कंपनी कमांडर (एग्जीक्यूटिव) के पद पर पदोन्नत किया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता विनीत कुमार तिवारी का नाम पदोन्नति सूची में शामिल नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता का दावा था कि पदोन्नति पाने वाले कुछ कर्मचारी उनसे कनिष्ठ थे। ऐसे में उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति दिए जाने के बावजूद उनके मामले पर विचार नहीं किया जाना उचित नहीं था।

ACR उपलब्ध नहीं होने से नहीं हो सका था विचार

याचिका में बताया गया कि विभाग की ओर से याचिकाकर्ता को मौखिक रूप से जानकारी दी गई थी कि उनकी Annual Confidential Reports (ACRs) उपलब्ध नहीं होने के कारण पदोन्नति के लिए उनके मामले पर विचार नहीं किया जा सका।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया और वर्ष 2020-21, 2021-22 एवं 2022-23 की ACRs तैयार करवाकर पूर्ण कराईं तथा विभाग के समक्ष प्रस्तुत कीं।

ACRs उपलब्ध होने के बाद भी विभाग की ओर से उनके पदोन्नति प्रकरण पर विचार करने के लिए रिव्यू DPC आयोजित नहीं की गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

राज्य सरकार ने किया याचिका का विरोध

राज्य की ओर से याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया गया कि DPC उन्हीं अधिकारियों के पदोन्नति मामलों पर विचार कर सकती है, जिनका सेवा रिकॉर्ड और ACR बैठक की तारीख तक पूर्ण रूप से उपलब्ध हो।

राज्य की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता की ACR उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके मामले पर उस समय विचार नहीं किया जा सका। वहीं, प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हो, इसलिए पात्र कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति प्रदान कर दी गई।

ACR का रखरखाव विभाग की जिम्मेदारी: हाईकोर्ट

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी को संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार प्राप्त है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ACR का संधारण और उसकी अभिरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। विभागीय कमी के कारण कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने माना कि जब लापता ACRs बाद में उपलब्ध होकर रिकॉर्ड पर आ गईं, तो विभाग के लिए याचिकाकर्ता के पदोन्नति प्रकरण की समीक्षा करना आवश्यक था। विभागीय या संस्थागत चूक के कारण किसी कर्मचारी को उसके कनिष्ठ कर्मचारियों के अधीन कार्य करने के लिए बाध्य करना मनमाना हो सकता है।

30 दिन में रिव्यू DPC आयोजित करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर रिव्यू DPC आयोजित की जाए।

रिव्यू DPC में उपलब्ध संपूर्ण ACR रिकॉर्ड के आधार पर याचिकाकर्ता के कंपनी कमांडर, होमगार्ड (एग्जीक्यूटिव) पद पर पदोन्नति के दावे पर नियमानुसार विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।

पात्र पाए जाने पर पिछली तारीख से मिलेगा प्रमोशन

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं, तो उन्हें उस तारीख से पूर्व प्रभाव से पदोन्नति दी जाएगी, जिस तारीख को उनके कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति प्रदान की गई थी।

इसके साथ ही उन्हें नियमानुसार सीनियरिटी, वेतन का पुनर्निर्धारण, बकाया वेतन तथा अन्य सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएंगे।

इस आदेश से यह महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आता है कि विभागीय रिकॉर्ड या ACR के रखरखाव में हुई कमी का खामियाजा किसी कर्मचारी को उसकी पदोन्नति के अधिकार से वंचित करके नहीं भुगताया जा सकता।

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