*माखा टोला-पचलू टोला की सड़कें बनीं कीचड़ और दलदल का मैदान, ग्रामीणों का गांव से निकलना हुआ मुश्किल*
*बारिश में सड़कें हुईं बेहाल, बच्चों-बुजुर्गों से लेकर किसानों तक की बढ़ी परेशानी — ग्रामीणों ने पंचायत से तत्काल टॉप मरम्मत की उठाई मांग*
दैनिक रेवांचल टाईम्स - नैनपुर। ग्राम पंचायत गौराछापर में बारिश के साथ ही गांवों की बदहाल सड़कों की तस्वीर सामने आ गई है। ग्राम माखा टोला और पचलू टोला की सड़कें इन दिनों भारी कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। सड़क पर जगह-जगह पानी, कीचड़ और फिसलन होने के कारण ग्रामीणों का गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलने वाले ग्रामीणों को भी कदम-कदम पर संभलकर चलना पड़ रहा है।
इस बदहाल स्थिति को लेकर अब ग्रामीणों का गुस्सा ग्राम पंचायत की सरपंच भागीरथी गोंड के खिलाफ खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पंचायत की जिम्मेदारी संभाल रही सरपंच भागीरथी गोंड कब जागेंगी और कब ग्रामीणों को कीचड़ एवं दलदल से मुक्ति मिलेगी?
“जनता कीचड़ में, सरपंच भागीरथी गोंड कब जागेंगी?”
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति हर साल खराब होती है, लेकिन समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। इस समय माखा टोला और पचलू टोला की सड़कें ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गई हैं।
स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, किसान और रोजमर्रा के काम से बाहर निकलने वाले ग्रामीण सबसे ज्यादा परेशान हैं। कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन फिसलने का खतरा बना हुआ है। कई जगह सड़क पर दलदल जैसी स्थिति होने से वाहन निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को बरसात से पहले ही सड़कों की स्थिति सुधारने की तैयारी करनी चाहिए थी। यदि समय पर टॉप मरम्मत और आवश्यक सामग्री डाली जाती तो आज ग्रामीणों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
पंचायत एजेंसी से तत्काल टॉप मरम्मत कराने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत गौराछापर द्वारा पंचायत एजेंसी के माध्यम से माखा टोला और पचलू टोला की सड़कों पर तत्काल टॉप मरम्मत, मुरम एवं आवश्यक सामग्री डलवाई जाए, ताकि सड़क को कम से कम बरसात के दौरान आवागमन योग्य बनाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क कोई विलासिता नहीं बल्कि गांव की मूलभूत आवश्यकता है। गांव की सड़क खराब होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, किसानों की आवाजाही, मरीजों को अस्पताल ले जाने और ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है।
विकास कार्यों को लेकर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता और उनके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि पंचायत क्षेत्र में विकास के नाम पर कार्य कराए जा रहे हैं तो उनका लाभ जमीन पर दिखाई देना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत क्षेत्र की सड़कों एवं अन्य विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जहां भी कमी पाई जाए, वहां जिम्मेदारी तय की जाए।
हालांकि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
“अब आश्वासन नहीं, चाहिए सड़क पर काम”
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं। बरसात के दिनों में समस्या कई गुना बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। पंचायत को मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति देखनी होगी और तत्काल मरम्मत का काम शुरू करना होगा।
ग्रामीणों ने कहा कि सरपंच भागीरथी गोंड को जनता की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर पहुंचना चाहिए। आखिर जिन ग्रामीणों ने पंचायत का नेतृत्व करने के लिए जनप्रतिनिधि चुना है, उनकी समस्याओं की जिम्मेदारी भी पंचायत प्रतिनिधियों की है।
प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
माखा टोला और पचलू टोला की बदहाल सड़क को लेकर अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन पर भी टिकी हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और पंचायत को तत्काल सड़क सुधारने के निर्देश दें।
वही स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। खासकर लगातार बारिश के दौरान सड़क पूरी तरह दलदल में बदलने की आशंका है।
ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब टूटेगी सरपंच भागीरथी गोंड की नींद?
गौराछापर पंचायत के माखा टोला और पचलू टोला के ग्रामीणों की आवाज अब एक ही सवाल पर आकर टिक गई है—जब जनता कीचड़ और दलदल में चलने को मजबूर है, तो सरपंच भागीरथी गोंड कब जागेंगी?
ग्रामीणों ने पंचायत से दो टूक मांग की है कि सड़क की तत्काल टॉप मरम्मत कराई जाए, कीचड़-दलदल से राहत दिलाई जाए और बरसात में ग्रामीणों का आवागमन सुचारु किया जाए।
वही अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की लगातार उठ रही आवाज सरपंच भागीरथी गोंड और पंचायत प्रशासन तक कब पहुंचती है और माखा टोला-पचलू टोला की बदहाल सड़कों पर आखिर कब विकास की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है।

