मंडला से बीजाडांडी, बबैहा, फूलसागर तक जर्जर पुलों पर दौड़ रहे हजारों वाहन, समय रहते नए पुल नहीं बने तो कभी भी हो सकती है बड़ी त्रासदी
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडलामंडला से जबलपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-30 आज विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण और उन्नयन किया गया, लेकिन वर्षों पुराने और जर्जर पुलों को आज भी नए पुलों से नहीं बदला गया। ऐसे में हर दिन हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।
वर्ष 2014 में इस मार्ग के उन्नयन को स्वीकृति मिली थी, लेकिन 2026 तक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी। फोरलेन की उम्मीद दिखाकर आखिर दो लेन का निर्माण किया गया, जबकि सबसे महत्वपूर्ण पुलों को पुराने हालात में ही छोड़ दिया गया। सवाल उठता है कि आखिर जिले के विकास के दावे करने वाले जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों हैं?
मरम्मत नहीं, नए पुलों की जरूरत
मंडला से जबलपुर मार्ग पर फूलसागर, बबैहा, लालीपुर, बालई और हिंगना के पुल आज भी वर्षों पुराने हैं। विभाग नए पुल बनाने के बजाय केवल मरम्मत और लीपापोती कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है।
इन पुलों की रेलिंग कमजोर हो चुकी है, कई स्थानों पर सरिया बाहर निकल आया है, पुलों पर गड्ढे बन गए हैं और किनारों पर मिट्टी जमा होने से उनकी चौड़ाई भी कम हो गई है। बालई पुल सहित कई पुलों पर पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया।
सड़क नई, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के विशेषज्ञों की सलाह पर डोबी गांव से मंडला सीमा तक लगभग 63 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण किया गया था। दावा किया गया कि विशेष तकनीक से सड़क की गुणवत्ता सुधारी गई है, लेकिन पहली ही बारिश में जगह-जगह डामर उखड़ गया और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए। इससे एक बार फिर दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
हाइवे पर नहीं डिवाइडर, नहीं संकेतक
नेशनल हाईवे-30 पर कई स्थानों पर न डिवाइडर हैं, न ट्रैफिक संकेतक और न ही ज़ेब्रा क्रॉसिंग। तेज रफ्तार वाहन आमने-सामने दौड़ते हैं, जिससे सड़क पार करना आम नागरिकों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। रात के समय यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
जनता का सवाल—कब जागेगा प्रशासन?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते पुराने पुलों को हटाकर नए पुलों का निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी दिन बड़ा हादसा कई परिवारों की खुशियां छीन सकता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि लोगों को सुरक्षित सफर नहीं मिल पा रहा है, तो ऐसे विकास पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनहित में प्रमुख मांगें:
मंडला से जबलपुर मार्ग के सभी जर्जर पुलों का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराया जाए। फूलसागर, बबैहा, लालीपुर, बालई और हिंगना में नए पुलों का निर्माण कराया जाए।
उखड़े हुए डामरीकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी एजेंसी पर कार्रवाई की जाए। पूरे हाईवे पर डिवाइडर, रिफ्लेक्टर, ट्रैफिक संकेतक और ज़ेब्रा क्रॉसिंग की व्यवस्था की जाए।
दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी बोर्ड एवं सुरक्षा बैरियर तत्काल लगाए जाएं।
वही जब तक जर्जर पुलों की जगह नए पुल नहीं बनते और हाईवे की खामियां दूर नहीं होतीं, तब तक नेशनल हाईवे-30 पर हर सफर लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं कहा जा सकता।

