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"सरकारी दावों पर भारी जमीनी हकीकत, मंडला की समस्याओं का आखिर कब होगा समाधान?"




दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल मंडला जिले में विकास और सुशासन के सरकारी दावों के बीच जमीनी तस्वीर लगातार चिंताजनक होती दिखाई दे रही है। जिले में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पेयजल, सिंचाई, आवास, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि समस्याओं का अंबार बढ़ता जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग अभियान चलाने और बैठकों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। परिणाम यह है कि आम लोगों की परेशानियां कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही हैं।

जिले के अनेक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़कें बदहाल हैं। कई मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। बरसात में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। नई सड़कों के निर्माण की गति बेहद धीमी है, जबकि पुरानी सड़कों की मरम्मत केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को गुणवत्तापूर्ण सड़कें नहीं मिल पा रही हैं।

सरकारी भवन जर्जर, जल संरक्षण के दावे भी सवालों में

जिले के अनेक सरकारी भवन बदहाल स्थिति में हैं। वर्षों से रंग-रोगन और मरम्मत नहीं होने के कारण भवन खस्ताहाल हो चुके हैं। वहीं तालाबों के गहरीकरण, नए जलाशयों के निर्माण, कुओं की मरम्मत और जल संरक्षण के स्थायी कार्यों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हर वर्ष जल संरक्षण अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन धरातल पर उनका प्रभाव नगण्य दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में भी उठ रहे सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों हितग्राहियों के मकान अधूरे पड़े होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई पात्र परिवार अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति दोनों का अभाव है।

कागजों में ओडीएफ, जमीनी हकीकत अलग

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी अनेक स्थानों पर शौचालयों की कमी, अधूरे निर्माण और अनुपयोगी शौचालयों की शिकायतें सामने आती रहती हैं। लोगों का कहना है कि कागजों में उपलब्धियां दिखाई गईं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग है।

राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल

भूमि सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, नक्शा सुधार सहित अनेक राजस्व प्रकरण वर्षों से लंबित बताए जा रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि कई पटवारी और राजस्व निरीक्षक मुख्यालय में नियमित उपलब्ध नहीं रहते, जिससे ग्रामीणों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से वंचित किसानों की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।

जल जीवन मिशन और सिंचाई व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह

जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कई स्थानों पर पाइपलाइनें बिछीं, लेकिन नल सूखे पड़े हैं। दूसरी ओर सिंचाई संसाधनों का अभाव किसानों की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।

स्वास्थ्य सेवाओं की हालत चिंताजनक

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी, दवाइयों का अभाव, एएनएम के मुख्यालय में नहीं रहने की शिकायतें तथा आयुष्मान और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के कमजोर क्रियान्वयन को लेकर भी लगातार असंतोष बढ़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित आरोग्य सेवाएं भी कई स्थानों पर प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही हैं।

आयुर्वेदिक अस्पतालों की दवाइयां कहां जा रही हैं?

आयुर्वेदिक औषधालयों में मरीज कम पहुंचने के बावजूद शासन से मिलने वाली दवाइयों के उपयोग और वितरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिक मांग कर रहे हैं कि दवा वितरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

रोजगार और उद्योगों की कमी से बढ़ रही बेरोजगारी

मंडला जिले में बड़े उद्योग स्थापित नहीं हो पाए हैं। स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे। साक्षर भारत मिशन से जुड़े शिक्षा प्रेरक वर्षों से कार्य मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अनेक पूर्व अतिथि शिक्षक भी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।

पंचायत व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

ग्रामीण क्षेत्रों में सचिव, रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों के मुख्यालय में नियमित उपस्थित नहीं रहने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। कई पंचायत कार्यालय समय पर नहीं खुलते, जिससे आम नागरिकों के कार्य प्रभावित होते हैं।

मनरेगा और मध्यान्ह भोजन योजना में भी उठ रहे सवाल

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पर्याप्त कार्य नहीं मिलने और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। वहीं मध्यान्ह भोजन समूहों को समय पर भुगतान नहीं मिलने और कम राशि उपलब्ध कराने के आरोप भी चर्चा में हैं।

खनिज संपदा की लूट और अवैध कारोबार पर कार्रवाई की मांग

जिले में अवैध उत्खनन, अवैध स्टोन क्रेशरों के संचालन तथा प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर भी लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई के अभाव में अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं। इसके साथ ही अवैध शराब, जुआ और सट्टे के कारोबार पर भी सख्त कार्रवाई की मांग लगातार की जा रही है।

शिक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और निजी स्कूलों की नियमित जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक चेतना केंद्रों और साक्षरता अभियान की गतिविधियों को लेकर भी लोगों का आरोप है कि अधिकांश कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं।

अभियान बहुत, समाधान नहीं

संकल्प से समाधान, ग्राम उदय से भारत उदय, जल संरक्षण अभियान, राजस्व महाअभियान और अन्य सरकारी अभियानों के बावजूद आम जनता की मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि शिविर लगाए जाते हैं, आवेदन लिए जाते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में स्थायी समाधान नहीं निकलता।

जनसंपर्क व्यवस्था पर भी उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर प्रकाशित जनहित के समाचारों और शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का मानना है कि यदि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई हो तो अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।

जनता का सीधा सवाल—कब टूटेगा समस्याओं का यह साम्राज्य?

लगातार बढ़ती जनसमस्याओं ने अब आम नागरिकों का धैर्य तोड़ना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक तंत्र जवाबदेही के साथ काम करे, विभागीय लापरवाही पर कठोर कार्रवाई हो और योजनाओं का ईमानदारी से क्रियान्वयन कराया जाए तो जिले की अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है। जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहती है। मंडला जिले में विकास के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बढ़ती खाई अब शासन-प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

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