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मां नर्मदा के दरबार में भी चढ़ावे पर डाका? 25 साल का हिसाब गायब, रिकॉर्ड लापता, CCTV बंद और करोड़ों के जेवरात पर उठे सवाल..






विशेष प्रतिनिधि | 


दैनिक रेवांचल टाइम्स/अमरकंटकदेश में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब मध्यप्रदेश के आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक मां नर्मदा उद्गम स्थल, अमरकंटक का मंदिर ट्रस्ट भी गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। आरोप हैं कि पिछले लगभग 25 वर्षों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी, जेवरात और नकद दान का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। मंदिर ट्रस्ट, नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन के बयानों में भी विरोधाभास सामने आने से मामला और अधिक गंभीर हो गया है।

यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला होगा।


*25 वर्षों का हिसाब कहां गया?*


सूत्रों के अनुसार वर्ष 2001 में अमरकंटक उद्गम स्थल ट्रस्ट के गठन के बाद से मंदिर में प्राप्त सोने-चांदी, आभूषण और अन्य कीमती चढ़ावों का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2021 के बाद नई सूची तैयार किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन उससे पहले के वर्षों का पूरा विवरण आज भी अस्पष्ट बताया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों से भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये मूल्य के जेवरात और कीमती सामग्री आज कहां है?


*ट्रस्ट और पुलिस के दावों में विरोधाभास*


ट्रस्ट प्रबंधन का दावा है कि दान में मिले जेवरात समय-समय पर अमरकंटक थाने में जमा कराए जाते रहे हैं और इसकी रसीदें भी उपलब्ध हैं।

दूसरी ओर, अमरकंटक थाना प्रभारी का कहना है कि थाने में ट्रस्ट द्वारा ऐसा कोई सोना, चांदी या चढ़ावे की सामग्री जमा नहीं कराई गई। पुलिस का कहना है कि थाने के मालखाने में केवल जब्तशुदा या न्यायालयीन प्रकरणों से संबंधित सामग्री ही रखी जाती है।

दो सरकारी पक्षों के इस विरोधाभासी बयान ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।


*CCTV बंद, रजिस्टरों में कटिंग और सफेद निशान*


निरीक्षण के दौरान दानकक्ष में लगे कई CCTV कैमरे बंद पाए जाने के आरोप हैं। वहीं दान रजिस्टरों में कटिंग, ओवरराइटिंग और कई स्थानों पर सफेद करेक्शन फ्लूइड (व्हाइटनर) के निशान मिलने की बात भी सामने आई है।

मंदिर के पुजारी दुर्गेश तिवारी ने आरोप लगाया है कि दानपेटी खोलने और गिनती की प्रक्रिया में गलत तरीके से हस्ताक्षर कराए गए। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो दान की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।


*नगर परिषद के पास भी पूरा रिकॉर्ड नहीं*


अमरकंटक उद्गम स्थल ट्रस्ट का संचालन नगर परिषद के माध्यम से किया जाता है, लेकिन आरोप है कि परिषद के पास भी ट्रस्ट से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। इससे ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

श्रद्धालुओं ने लगाए गंभीर आरोप

रेवांचल टाइम्स से चर्चा में कई श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में कुछ पुजारियों द्वारा श्रद्धालुओं से सीधे दक्षिणा देने का दबाव बनाया जाता है तथा कई बार दानपेटी में राशि न डालने की सलाह भी दी जाती है।

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि दानपेटियों को फूलों और कपड़ों से इस प्रकार ढका जाता था कि श्रद्धालुओं का ध्यान सीधे दानपेटी की ओर न जाए।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।


*पुजारियों की संपत्ति पर भी उठे सवाल*


कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में पूजा कराने वाले कुछ व्यक्तियों ने वर्षों में होटल, रेस्टोरेंट, महंगे प्लॉट और कृषि भूमि खरीदी है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आए हैं। ऐसे में यदि शिकायतें हैं तो संबंधित एजेंसियों द्वारा पुजारियों की आय के स्रोतों की जांच कराई जानी चाहिए।


*10 दानपेटियां, करोड़ों की आस्था*


मंदिर ट्रस्ट के अनुसार परिसर में कुल 10 दानपेटियां संचालित हैं, जिनमें मुख्य उद्गम मंदिर, कार्तिक स्वामी मंदिर, राम मंदिर, ग्यारह रुद्र मंदिर, विष्णु मंदिर, उद्गम स्थल, माई की बगिया सहित अन्य स्थान शामिल हैं।

ट्रस्ट के अनुसार उसके बैंक खाते में वर्तमान में लगभग 1.41 करोड़ रुपये जमा हैं, लेकिन वर्ष 2001 से प्राप्त सोने-चांदी और जेवरात का समग्र रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात स्वयं प्रबंधन स्वीकार कर रहा है।

2021 के बाद शुरू हुई नई सूची

वर्तमान प्रभारी गणेश पाठक के अनुसार वर्ष 2021 से जेवरातों का फोटो सहित रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि पूर्व के रिकॉर्ड अधूरे और अस्पष्ट थे, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने जेवरात ट्रस्ट के पास हैं।

जांच से ही सामने आएगा सच

पूरे घटनाक्रम में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—


*25 वर्षों का सोना-चांदी और चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड कहां है?*


*ट्रस्ट और पुलिस के बयान अलग-अलग क्यों हैं?*


*CCTV कैमरे बंद क्यों मिले?*


*दान रजिस्टरों में कटिंग और संशोधन किसने किए?*


*यदि कोई अनियमितता नहीं हुई तो रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?*


इन सवालों का उत्तर केवल निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच ही दे सकती है।


(क्रमशः... अगले अंक में: ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, दानपेटियों की गिनती की प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा खुलासा)

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