*पहली बारिश में बह गई गुणवत्ता, अब जिम्मेदारों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में*
*100.58 लाख की सड़क पर लकड़ी भारी पड़ गई, जनमन योजना की राह में 'जनधन' का खेल तो नहीं?*
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला कहते हैं सड़क विकास की पहचान होती है, लेकिन मोहगांव विकासखंड के मंगलू बैगाटोला में बनी सड़क ने विकास से ज्यादा व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जनमन योजना के तहत लगभग 100.58 लाख रुपये की लागत से बनी 1.75 किलोमीटर सड़क पहली ही बारिश में उखड़ने लगी। पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गई। अब सवाल यह है कि सड़क बनी थी जनता के चलने के लिए या पहली बारिश में बह जाने के लिए?
हैरानी की बात तब सामने आई जब निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष गत सिंह भवेदी ने सड़क की सतह को केवल एक छोटी-सी लकड़ी से हल्का-सा खुरचा और डामर व गिट्टी ऐसे उखड़ने लगे मानो सड़क नहीं, रेत का ढेर हो। यदि एक लकड़ी लाखों रुपये के निर्माण की परतें उधेड़ सकती है, तो फिर भारी वाहनों का क्या होगा? यह दृश्य देखकर ग्रामीणों ने भी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में न तो मानकों का पालन हुआ और न ही गुणवत्ता का। यदि ये आरोप सही हैं, तो सवाल केवल ठेकेदार पर नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी उठता है जिन्होंने निर्माण की निगरानी की, माप पुस्तिका (एम.बी.) भरी, गुणवत्ता प्रमाणित की और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। क्या निरीक्षण केवल कागजों में हुआ? क्या गुणवत्ता जांच भी फाइलों तक सीमित रही?
अब हास्यास्पद वाली बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में सड़क शायद आज भी "उत्तम गुणवत्ता" की श्रेणी में होगी, लेकिन धरातल पर उसकी असलियत पहली ही बारिश ने उजागर कर दी। लगता है निर्माण एजेंसी ने सड़क को मौसम विभाग की भविष्यवाणी के भरोसे बनाया था—"बारिश होगी या नहीं, बाद में देखेंगे।"
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जनमन योजना का उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत और टिकाऊ सड़क सुविधा देना है, लेकिन यदि निर्माण कुछ ही महीनों में उखड़ने लगे तो इससे शासन की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। जनता का पैसा यदि गुणवत्ताहीन निर्माण में खर्च हो रहा है, तो यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के प्रति गंभीर जवाबदेही का विषय है।
*अब जिला प्रशासन को केवल जांच समिति बनाकर औपचारिकता पूरी नहीं करनी चाहिए।*
आवश्यकता इस बात की है कि निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, भुगतान प्रक्रिया, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित ठेकेदार, गुणवत्ता नियंत्रण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए तथा सड़क और पुलिया का पुनर्निर्माण उनके खर्च पर कराया जाना चाहिए।
*मंगलू बैगाटोला की यह सड़क आज एक बड़ा सवाल पूछ रही है*—क्या करोड़ों रुपये की योजनाएं जनता के विकास के लिए बनती हैं, या कुछ लोगों के विकास के लिए? जब सड़क की सच्चाई एक लकड़ी उजागर कर दे, तब व्यवस्था को आईना देखने की जरूरत है, क्योंकि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, जवाब चाहती है।


