जबलपुर। शहर के गोरखपुर क्षेत्र से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाली महिलाओं को राशन और बच्चों के स्कूल में प्रवेश दिलाने का झांसा देकर फर्जी BPL कार्ड बेचने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। आरोप है कि गोरखपुर तहसील से जुड़े कुछ कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों की मिलीभगत से महिलाओं से 10-10 हजार रुपये वसूले गए और बदले में नकली सील और दस्तावेजों से तैयार फर्जी BPL कार्ड थमा दिए गए।
स्कूल में एडमिशन के दौरान खुली पोल
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित महिलाएं सोना शर्मा, गीता विश्वकर्मा, मेधा बर्मन, प्रभा पटेल, क्रांति सेन और महक पटेल अपने बच्चों का स्कूल में प्रवेश कराने के लिए BPL कार्ड लेकर पहुंचीं। स्कूल प्रबंधन ने कार्ड पर नगर निगम की आधिकारिक सील और हस्ताक्षर कराने को कहा। इसके बाद महिलाएं नगर निगम पहुंचीं, जहां से उन्हें गोरखपुर तहसील भेज दिया गया।
तहसील में कार्ड बताए फर्जी, महिलाओं को दी गई धमकी
गोरखपुर तहसील पहुंचने पर वहां मौजूद एक कर्मचारी ने कार्डों को फर्जी बताते हुए महिलाओं की मदद करने के बजाय उन्हें ही पुलिस कार्रवाई की धमकी दी और चुपचाप घर लौट जाने की सलाह दी। इससे घबराई महिलाओं ने हिम्मत जुटाकर गोरखपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
राशन कार्ड की मजबूरी का उठाया गया फायदा
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। उन्होंने कई बार ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से राशन कार्ड के लिए आवेदन किए, लेकिन उनके आवेदन लगातार निरस्त कर दिए गए। आरोप है कि कभी भी उनके घर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन नहीं किया गया।
इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए तहसील से जुड़े कथित सिंडिकेट ने महिलाओं को जल्द BPL कार्ड बनवाने का भरोसा दिया। इसके एवज में प्रत्येक महिला से 10 हजार रुपये लिए गए और आधार कार्ड, फोटो सहित अन्य दस्तावेज लेकर नकली BPL कार्ड तैयार कर सौंप दिए गए।
25 से अधिक शिकायतें, संगठित रैकेट की आशंका
गोरखपुर पुलिस के अनुसार अब तक करीब 25 महिलाओं की लिखित शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। मामले की जांच उपनिरीक्षक (SI) रवींद्र तिवारी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह मामला किसी एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि संगठित रैकेट का प्रतीत हो रहा है, जिसमें तहसील के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी गोरखपुर तहसील से जुड़े फर्जी राशन कार्ड का मामला सामने आया था, जिसमें एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी। अब पुलिस पुराने रिकॉर्ड खंगालते हुए वर्तमान कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच के प्रमुख बिंदु
- प्रत्येक महिला से 10-10 हजार रुपये वसूले जाने का आरोप।
- करीब 25 महिलाओं ने लिखित शिकायत दर्ज कराई।
- फर्जी सील और दस्तावेजों से तैयार किए गए BPL कार्ड।
- तहसील से जुड़े कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में।
- पुराने फर्जी राशन कार्ड प्रकरण से भी जोड़े जा रहे हैं जांच के तार।
