रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला नारायणगंज क्षेत्र इन दिनों अवैध नशे के कारोबार का गढ़ बनता जा रहा है। क्षेत्र में महुआ से तैयार होने वाली कच्ची हाथभट्टी शराब और गांजे की खुलेआम बिक्री को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार गांव-गांव तक नशे का जाल फैल चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आती है। यही कारण है कि आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई स्थानों पर महुआ से अवैध शराब बनाई और बेची जा रही है, जबकि गांजे का कारोबार भी कथित रूप से बिना किसी डर के संचालित हो रहा है। यदि समय-समय पर कार्रवाई होती भी है तो उसका असर कुछ दिनों से अधिक नहीं दिखाई देता। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बार-बार शिकायतों के बावजूद यह कारोबार बंद क्यों नहीं हो पा रहा।सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा शिकार क्षेत्र की युवा पीढ़ी बन रही है। कम उम्र के युवक नशे की गिरफ्त में पहुंच रहे हैं। नशे की लत ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। नशे के कारण घरों में आए दिन विवाद, मारपीट, आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह की घटनाएं बढ़ रही हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले कई लोग अपनी मेहनत की कमाई नशे में उड़ा रहे हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों का जीवन प्रभावित हो रहा है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार आबकारी विभाग और पुलिस को शिकायतें दी गईं, लेकिन अवैध कारोबार पर स्थायी रोक नहीं लग सकी। इससे लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर किसकी शह पर यह धंधा लगातार फल-फूल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार जारी गतिविधियों ने विभागीय कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में प्रशासन चाहे तो एक संयुक्त अभियान चलाकर हाथभट्टी शराब की भट्टियों को ध्वस्त किया जा सकता है, गांजा तस्करों की पहचान कर उनके नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है और नशे के इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन अब तक ऐसी व्यापक और लगातार कार्रवाई दिखाई नहीं दी, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं।नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक एवं आबकारी विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध शराब और गांजे के कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो, जिनके कार्यक्षेत्र में लंबे समय से यह अवैध कारोबार संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।यदि अब भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो नशे का यह जाल आने वाली पीढ़ी का भविष्य निगल सकता है। क्षेत्रवासियों का साफ कहना है कि उन्हें खानापूर्ति नहीं, बल्कि ऐसी निर्णायक कार्रवाई चाहिए जिससे नारायणगंज क्षेत्र को नशे के इस काले कारोबार से स्थायी मुक्ति मिल सके।
Tuesday, July 14, 2026
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हाथभट्टी शराब और गांजे का बेखौफ कारोबार, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध धंधा
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