जनप्रतिनिधियों का शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा एक्शन जर्जर स्कूल, टपकती छतें,
एक कमरे में पांच कक्षाएं, पानी तक नहीं औचक निरीक्षण में खुली सरकारी शिक्षा की पोल
रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला जिले के मोहगांव क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जनपद पंचायत उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति के अध्यक्ष शिवकुमार आड़ू मिश्रा तथा जनपद सदस्य बोधसिंह मरकाम द्वारा क्षेत्र के चार शासकीय विद्यालयों का किए गए औचक निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने शिक्षा व्यवस्था के तमाम सरकारी दावों की हकीकत उजागर कर दी। कहीं बच्चों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है, तो कहीं बरसात में टपकती छत के नीचे पढ़ाई करने की मजबूरी है। सबसे हैरान करने वाली स्थिति यह रही कि एक विद्यालय में कक्षा चौथी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने शासकीय हाई स्कूल खीसी, एकीकृत शाला चुभावल, प्राथमिक शाला बाँझडीह तथा हाई स्कूल उमड़ीह की शैक्षणिक व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं, भवनों की स्थिति एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आई कमियों पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
खीसी हाई स्कूल में पानी नहीं, टपकती छत और शिक्षक की कमी
शासकीय हाई स्कूल खीसी में विद्यार्थियों ने जनप्रतिनिधियों को अपनी परेशानियां खुलकर बताईं। छात्रों ने कहा कि विद्यालय में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गर्मी हो या बरसात, पीने के पानी के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।
यहीं नहीं, बरसात के दिनों में विद्यालय भवन की छत टपकने से कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर पानी टपकने के कारण बच्चों को अपनी जगह बदलकर बैठना पड़ता है। विद्यार्थियों ने यह भी शिकायत की कि हिंदी विषय की नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो रही हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और परीक्षा परिणाम पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विद्यालय में विद्यार्थियों की अपेक्षाकृत कम संख्या को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई और विशेष नामांकन अभियान चलाकर अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के निर्देश दिए।
चुभावल स्कूल की हालत सबसे बदतर, एक कमरे में पांच कक्षाएं
निरीक्षण के दौरान सबसे चिंताजनक स्थिति एकीकृत शाला चुभावल में देखने को मिली। यहां कक्षा चौथी, पांचवीं, छठवीं, सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई एक ही कमरे में कराई जा रही है। ऐसे में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना लगभग असंभव नजर आया।
विद्यालय भवन भी पूरी तरह जर्जर अवस्था में मिला। बरसात के दौरान छत से पानी टपक रहा है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें और छत की खराब स्थिति देखकर जनप्रतिनिधियों ने चिंता व्यक्त की।
स्थिति इतनी खराब है कि मिडिल स्कूल के भवन में ही हाई स्कूल के विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इससे स्पष्ट है कि विद्यालय में पर्याप्त भवन और कक्ष उपलब्ध नहीं हैं। यह व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों पर सवाल खड़े करती है।
बाँझडीह प्राथमिक शाला भी बदहाल
प्राथमिक शाला बाँझडीह के निरीक्षण में भी विद्यालय भवन की खराब स्थिति सामने आई। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव स्पष्ट दिखाई दिया। विद्यालय परिसर और भवन की स्थिति देखकर जनप्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारियों को भवन की मरम्मत, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को बेहतर वातावरण मिलेगा तो शिक्षा की नींव मजबूत होगी। इसलिए ऐसे विद्यालयों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।
उमड़ीह हाई स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक नहीं
हाई स्कूल उमड़ीह के निरीक्षण में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा की गई। यहां अंग्रेजी विषय के शिक्षक का अभाव पाया गया। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए शीघ्र अंग्रेजी शिक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या भी अपेक्षा से कम मिली। इस पर भी चिंता व्यक्त करते हुए विशेष नामांकन अभियान चलाने तथा शिक्षा के प्रति अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
सरकारी दावों पर उठे सवाल
निरीक्षण में सामने आई तस्वीर ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्मार्ट स्कूल, मूलभूत सुविधाएं और बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराने के दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दी।
जब बच्चों को पीने का पानी नहीं मिले, बरसात में छत टपकती रहे, एक कमरे में पांच-पांच कक्षाएं संचालित हों और विषयवार शिक्षक तक उपलब्ध न हों, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। ऐसे हालात में विद्यार्थी किस प्रकार प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्राप्त करेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है।
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
निरीक्षण के बाद जनप्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर सभी विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था तत्काल सुधारने, जर्जर भवनों की मरम्मत अथवा नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने, रिक्त शिक्षकों की व्यवस्था करने तथा विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन विद्यालयों में समस्याएं सामने आई हैं, वहां शीघ्र सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
"बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं होगा"
जनपद पंचायत उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति के अध्यक्ष शिवकुमार आड़ू मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन, स्वच्छ पेयजल और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान सामने आई सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के सभी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण जारी रहेगा। जहां भी लापरवाही, अव्यवस्था या मूलभूत सुविधाओं की कमी मिलेगी, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब कार्रवाई का इंतजार
औचक निरीक्षण ने क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। जनप्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समस्याओं को सामने लाया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इन निर्देशों को गंभीरता से लेकर समयबद्ध कार्रवाई करेगा या फिर यह निरीक्षण भी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा।
क्षेत्र के अभिभावकों और विद्यार्थियों की निगाहें अब शिक्षा विभाग पर टिकी हैं। यदि समय रहते भवनों की मरम्मत, शिक्षकों की नियुक्ति, पेयजल व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ेगा। सरकारी विद्यालयों की साख बचाने के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

