दैनिक रेवाँचल टाईम्स - भुआ बिछिया (मंडला)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भुआ बिछिया में जिला कलेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण के बाद क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि जिन खामियों को जिला कलेक्टर ने एक ही निरीक्षण में चिन्हित कर लिया, वे अस्पताल के नियमित संचालन और निरीक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) और संबंधित अधिकारियों की नजर में पहले क्यों नहीं आईं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि ये कमियां लंबे समय से बनी हुई थीं तो समय रहते उनका निराकरण क्यों नहीं किया गया। वहीं यदि संबंधित अधिकारियों को इनकी जानकारी ही नहीं थी, तो यह नियमित निरीक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लोगों का मानना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील व्यवस्था में लापरवाही का सीधा असर मरीजों और आम नागरिकों पर पड़ता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भुआ बिछिया क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य संस्था है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार, जांच और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल की साफ-सफाई, दवा उपलब्धता, उपकरणों की कार्यशीलता, चिकित्सकीय व्यवस्थाएं, कर्मचारियों की उपस्थिति तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की नियमित समीक्षा और प्रभावी निगरानी प्रशासनिक अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि अस्पताल का नियमित और गंभीरता से निरीक्षण किया जाता, तो छोटी-छोटी कमियां समय रहते दूर हो जातीं और जिला कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान इस प्रकार की स्थिति सामने नहीं आती। लोगों का मानना है कि आकस्मिक निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां गिनाना नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करना और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करना होना चाहिए।
कलेक्टर के निरीक्षण के बाद अब यह मांग भी उठने लगी है कि अस्पताल में पाई गई प्रत्येक कमी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए। लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार तभी संभव है, जब निरीक्षण केवल कागजी औपचारिकता न रहकर वास्तविक सुधार का माध्यम बने और अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय हो।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और नागरिकों का भी कहना है कि ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में प्रशासन को अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग, संसाधनों की उपलब्धता और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
