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शिविरों से नहीं हो रहा जनकल्याण




दैनिक रेवांचल टाइम्स  - मंडला। मध्य प्रदेश सरकार की जनहितकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे जनकल्याण शिविर मंडला जिले में महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। शिविरों में न तो जिम्मेदार अधिकारी पहुंच रहे हैं और न ही आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान हो पा रहा है। इससे शासन के सुशासन और जनसेवा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार 17 जुलाई को नैनपुर तहसील के ग्राम परसवाड़ा में आयोजित जनकल्याण शिविर में भारी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिविर का समय रहते प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। कोटवार द्वारा शिविर के दिन सुबह लगभग 10 बजे केवल सूचना दी गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि शिविर में विभिन्न विभागों की जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। अधिकांश ग्रामीण तब तक अपने-अपने कार्यों के लिए निकल चुके थे, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग शिविर में पहुंच ही नहीं सके।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें यह भ्रम दिया गया कि शिविर केवल स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित है, जबकि शासन के निर्देशों के अनुसार ऐसे शिविरों में राजस्व, पंचायत, सामाजिक न्याय, खाद्य, कृषि, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों की शिकायतों और समस्याओं का मौके पर निराकरण किया जाना था।


आलाअधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल


ग्रामीणों के अनुसार शिविर में कई जिम्मेदार विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित नहीं हुए। इससे लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने की प्रक्रिया प्रभावित रही। लोगों का आरोप है कि यदि अधिकारी ही शिविर में मौजूद नहीं रहेंगे तो ऐसे आयोजनों का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।


व्यवस्थाओं की भी खुली पोल


शिविर की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। बताया गया कि छात्रावास परिसर में बार-बार कार्यक्रम आयोजित करने का दबाव बनाया जाता रहा, लेकिन इस बार छात्रावास अधीक्षक द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने पर बाहर टेंट लगाया गया। टेंट पर बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। बारिश होने से पूरा परिसर भीग गया और शिविर की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई।


सचिव और रोजगार सहायक पर लापरवाही के आरोप


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव और रोजगार सहायक ने शिविर के प्रचार-प्रसार में गंभीर लापरवाही बरती। समय पर सूचना नहीं देने और ग्रामीणों तक सही जानकारी नहीं पहुंचाने के कारण लोग अपनी समस्याएं लेकर शिविर तक नहीं पहुंच सके। इससे शासन की मंशा पर भी पानी फिर गया।


कार्रवाई की मांग


वही ग्रामीणों ने मांग की है कि शिविर में अनुपस्थित रहे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही ग्राम पंचायत के सचिव एवं रोजगार सहायक की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनकल्याण शिविर केवल कागजी खानापूर्ति बनकर न रह जाएं।

यदि ग्रामीणों तक सूचना ही समय पर नहीं पहुंचे, अधिकारी शिविर से नदारद रहें और समस्याओं का समाधान न हो, तो जनकल्याण शिविरों का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है। ऐसे में जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि शासन की जनहितकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक पहुंच सके।

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