शिकायत लंबित रहने के बावजूद जारी हुई स्वीकृतियां, उपसरपंच व पंचों ने जनसुनवाई में कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला|जिले की जनपद पंचायत मवई अंतर्गत ग्राम पंचायत मवई में शासकीय भूमि पर कथित रूप से कराए जा रहे कॉम्प्लेक्स निर्माण का मामला अब गंभीर प्रशासनिक सवालों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि जिस भूमि पर निर्माण को लेकर शिकायतें दर्ज थीं और जांच प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी कर दी गईं। इससे पूरे प्रकरण की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
वही प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 मार्च 2026 को ग्राम पंचायत मवई की उपसरपंच श्रीमती दीपिका टांडिया ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बिछिया को लिखित शिकायत देकर शासकीय भूमि पर हो रहे निर्माण की जांच कराने की मांग की थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत मवई को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद 23 मार्च 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पंचायत समन्वय अधिकारी एवं संबंधित पटवारी को जांच के लिए पत्र जारी किया गया।
बताया जाता है कि शिकायत और जांच प्रक्रिया जारी रहने के दौरान ही 30 मार्च 2026 को जनपद पंचायत मवई के सहायक यंत्री कार्यालय द्वारा संबंधित निर्माण के लिए तकनीकी/प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई। इसके महज दो दिन बाद 2 अप्रैल 2026 को ग्राम पंचायत मवई द्वारा भी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई। जबकि जांच दल ने 6 अप्रैल 2026 को पंचनामा तैयार कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार संबंधित भूमि शासकीय आबादी भूमि है, जो पूर्व में राजस्व अभिलेखों में कांजी हाउस के रूप में दर्ज थी। पटवारी द्वारा नायब तहसीलदार को प्रस्तुत रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि उक्त स्थान पर कांजी हाउस हटाकर चार दुकानों वाला पक्का कॉम्प्लेक्स तथा लगभग 10×10 फीट का अतिरिक्त निर्माण कराया जा रहा था। वहीं पंचायत सचिव के कथन में यह भी दर्ज किया गया कि निर्माण किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा कराया जा रहा है।
मामले को लेकर 23 अप्रैल 2026 को उपसरपंच ने पुनः शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 13 जून 2026 को ग्राम पंचायत के पंचों ने भी लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए 26 जून 2026 को नायब तहसीलदार कार्यालय ने सरपंच एवं सचिव को नोटिस जारी कर निर्माण कराने वाले व्यक्ति का नाम एवं विवरण प्रस्तुत करने तथा 27 जून 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
जब भूमि की वैधता जांच के अधीन थी, तब तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां किस आधार पर जारी की गईं?
यदि भूमि वास्तव में शासकीय थी, तो निर्माण कार्य को रोकने के बजाय स्वीकृतियां जारी करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की, या फिर पूरे मामले में किसी स्तर पर संरक्षण प्रदान किया गया? यदि निर्माणकर्ता का नाम स्पष्ट नहीं था, तो स्वीकृतियां किसके पक्ष में जारी की गईं?
इन्हीं सवालों को लेकर उपसरपंच सहित ग्राम पंचायत के पंचों ने जिला स्तरीय जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर मंडला को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरे मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने तथा जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य एवं उससे संबंधित सभी अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
वही फिलहाल यह मामला शासकीय भूमि की सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। अब स्थानीय लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं।


