जनविरोध के बावजूद बनी गौशाला में हुई घटना; स्थानीय लोगों ने चारा, सफाई और रखरखाव पर उठाए सवाल, जांच की मांग
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला, नैनपुर। जनविरोध के बावजूद श्मशान घाट परिसर में बनाई गई नगर पालिका की गौशाला एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। सोमवार को गौशाला में एक गाय की मौत के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जिस गौशाला के निर्माण और संचालन को लेकर पहले से ही आपत्तियां जताई जा रही थीं, वहां अब पशुओं की सुरक्षा और देखभाल पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गौशाला में लंबे समय से साफ-सफाई, रखरखाव और चारे की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित देखभाल की जाती, तो शायद ऐसी घटना टाली जा सकती थी। हालांकि गाय की मौत का वास्तविक कारण आधिकारिक जांच और पशु चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया कि गौशाला के संचालन के लिए शासन से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है और सामाजिक स्तर पर भी चंदा एकत्र किया गया था। इसके बावजूद यदि गौशाला की स्थिति बदहाल है, तो उपलब्ध राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और व्यवस्था में कमी क्यों बनी रही।
यह गौशाला शुरू से ही विवादों में रही है। श्मशान घाट परिसर में इसके निर्माण का कई स्थानीय लोगों ने विरोध किया था और स्थान परिवर्तन की मांग भी उठाई थी, लेकिन नगर पालिका ने निर्माण का निर्णय नहीं बदला। अब गाय की मौत के बाद वही विरोध दोबारा तेज हो गया है।
मध्य प्रदेश में गौसंरक्षण और गौशालाओं के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि गौशाला में ही गाय सुरक्षित नहीं है, तो संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
घटना के बाद लोगों ने गाय की मौत की निष्पक्ष जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने, गौशाला के संचालन में खर्च हुए सरकारी अनुदान एवं प्राप्त चंदे का सामाजिक ऑडिट कराने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि नगर पालिका इस घटना पर क्या स्पष्टीकरण देती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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