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आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बाजाक अस्पताल में नहीं है आपातकालीन दवाइयां ग्रामीण हो रहे परेशान...






रेवांचल टाईम्स :- आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी के अंतर्गत आने वाले विकास खण्ड बाजाक में लाचर है स्वाथ्य सुविधाएं मरीजों का ईलाज हो रहा भगवान भरोसे वैसे तो कहने को बजाग तहसील मुख्यालय है लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति किसी भी व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है किंतु बजाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उसी से खिलवाड़ किया जा रहा है, आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग में समस्याओं का लगातार अंबार लगा दिखाई पड़ रहा है कहने के तो यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है किंतु सुविधाओं के नाम पर किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी गया गुजरा है। जहां पर ना तो मैनुअली ऑपरेटेड बीपी मशीन है और ना ही आपातकालीन दवाइयां और तो और यहां पर स्टाफ नर्स ड्यूटी करने से भी कतराती हैं वार्ड बाय मरीजों को इंजेक्शन दे रहे हैं। वाकई में यहां स्वास्थ्य की खस्ताहाल व्यवस्था किसी को देखनी है तो वह एक बार बजाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्शन जरूर कर सकता है और अगर इस विषय पर आप किसी जिम्मेदार अधिकारी से बात करने का प्रयास करेंगे जो कि कहने को मात्र एक ही अधिकारी है। बीएमओ बजाग वह कहते हैं या तो मैं बीएमओ का काम कर लूं या डॉक्टर का और तो और अपनी जिम्मेदारियों से इस तरह पल्ला झाड़ते हैं कि इस विषय से उनका कोई लेना-देना ही नहीं हो तो अगर कोई डॉक्टर यह कह दे कि मरीज की ज्ञान बचाना या उसका इलाज करना यह कोई मेरा काम है तो सोचिए उस मरीज पर क्या गुजरेगी कुछ इसी तरह का हाल बजाग खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मित्रा का है इस विषय पर बहुत से मरीजों ने शिकायत की है और लगातार कहीं ना कहीं व्यवस्थाएं और चरमरा रही है जिसका जिम्मेदार कौन है यह प्रश्न उठता है और इस प्रश्न का जवाब कौन देगा पता नहीं तो जहां तक मुझे समझ में आ रहा है कि मजाक की भगवान भरोसे हैं इसको लेकर आज नगर के कुछ युवाओं ने हंगामा भी किया और जब खंड चिकित्सा अधिकारी से विषय पर जानकारी मांगी तो चिकित्सा अधिकारी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मेरा काम नहीं है कि मैं किसी को कोई भी को जवाब दूं अगर बात करनी है तो शासन प्रशासन से करें तो यह प्रश्न उठता है कि शासन ने अपना प्रतिनिधि बीएमओ को ही बनाया है और जब व्यक्ति उनसे बात करने जाए तो उनका कहना कि शासन से क्या सीएम से बात करेगा मरीज उन युवाओं में से तो जिसमें नगर के युवा लोकेश साहू ने बताया कि विगत दिवस उनकी माताजी की तबीयत खराब हुई और वह रात्रि 12:00 बजे उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे जब अस्पताल पहुंचे तो वहां पर आपातकालीन दवाई पैंटॉप उपलब्ध नहीं थी जोकि गैस की दवाई के रूप में उपयोग में आती है तो ऐसी परिस्थिति में मरीज को कह दिया जाता है कि आप दवाई बाहर चली आई है मतलब रात को 12:00 बजे आपातकालीन दवाइयां उपलब्ध ना हो और उसे 12:00 बजे मरीज कहां से लेकर आएगा यह भी बड़ा प्रश्न है और तो और गैस के दर्द को अगर हार्ट अटैक बता दिया जाए तो मरीज की क्या हालत होगी यही कुछ दिखाई पड़ता है बजाग के अस्पताल में डॉक्टर के द्वारा किसी भी तरह के दर्द को सीधे हार्ट अटैक बता दिया जाता है जिससे जो स्वस्थ मरीज भी हो वह भी हार्टअटैक से दम तोड़ सकता। 

वर्तमान परिस्थितियों में लगातार बजाग अस्पताल विवादों के घेरे में है लोगों की लगातार समस्या और मांग के बाद भी प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि दोनों ही लोगों की स्वास्थ्य विभाग की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसका सीधा असर लोगों की जान पे आ गई है। विभागीय कर्मियों का लापरवाही रवैया लोगों की मौत का सबब बन रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से अनुरोध किया कि इस संबंध में विशेष ध्यान देते हुए बजाग क्षेत्र में जल्द से जल्द डाक्टरों की समस्या से निजात मिले। 

        में आपकी समस्या का कोई समाधान नहीं कर सकता। आप प्रशासन से मांग करें। में अकेला आदमी चोबीस घंटे काम करता हूं। में जबलपुर और मुम्बई के एमबीबीएस डाक्टर की तरह इलाज नहीं कर सकता ना ही मेरे से बनता है, में नहीं जानता आपातकालीन दवाई जैसे हेपेरिन, पेंनटाप, क्या होता है में नहीं पढ़ा हूं। ना ही में ईसीजी पढ़ना जानता हूं- आर मित्रा, बी एम ओ बजाग


        अगर इस तरह के जिम्मेदार डाक्टर अपनी जिम्मेदारी से भागेंगे तो मरीजों का इलाज भगवान करेंगे क्या। प्रशासन से अपील है कि बजाग में लगनशील डाक्टर भेजा जाए। क्योंकि कंक्रीट की बिल्डिंग को अस्पताल नहीं कहते। 

          लोकेश साहू, मरीज के परिजन

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