पितृ पक्ष दशमी श्राद्ध आज: कुतुप और रौहिण मुहूर्त में करें तर्पण-पिंडदान, जानें नियम और महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की तृप्ति और स्मरण के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व
धर्म-आस्था। पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में पितर अपने वंशजों के समीप आते हैं और श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों से प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
आज 5 अक्टूबर को पितृ पक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जा रहा है। श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 5 अक्टूबर को भोर 3 बजकर 53 मिनट से प्रारंभ होकर 6 अक्टूबर को रात 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक
दशमी तिथि पर किसका श्राद्ध किया जाता है?
धार्मिक परंपरा के अनुसार दशमी श्राद्ध उन दिवंगत परिजनों के लिए किया जाता है, जिनका निधन किसी भी पक्ष की दशमी तिथि को हुआ हो। इसे दशमी या दसमी श्राद्ध भी कहा जाता है।
मान्यता है कि जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो ऐसे पूर्वजों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।
● भोजन तैयार होने के बाद परंपरा अनुसार पंचबलि भोग निकाला जाता है।
● गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी और देव के निमित्त अन्न अर्पित करने की परंपरा है।
● श्राद्ध का भोजन सात्विक और स्वच्छता के साथ तैयार किया जाता है।
● परंपरागत रूप से श्राद्ध भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता।
● श्राद्ध कर्म के बाद ब्राह्मण भोजन एवं दान-दक्षिणा देने की परंपरा है।
● तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने का विधान बताया गया है।
श्रद्धा और स्मरण का पर्व
पितृ पक्ष का मूल भाव पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और सम्मान से जुड़ा है। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण, पिंडदान, दान और भोजन आदि के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हैं।
