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छात्रों और अभाविप के विरोध के बाद नैनपुर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. जेसी मेश्राम हटाए गए, डॉ. ज्योति सिंह को मिली जिम्मेदारी

मंडला | नैनपुर महाविद्यालय

छात्रों और अभाविप के विरोध के बाद नैनपुर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. जेसी मेश्राम हटाए गए

डॉ. ज्योति सिंह को सौंपी गई जिम्मेदारी, कॉलेज की अव्यवस्थाओं और फंड के उपयोग पर विद्यार्थियों ने उठाए थे सवाल

3 सदस्यीय
जांच टीम
8 अक्टूबर
कॉलेज में जांच
₹18 लाख
फंड पर छात्रों के सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला/नैनपुर। मंडला जिले के नैनपुर स्थित शासकीय महाविद्यालय में लंबे समय से चल रहे विरोध और विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद प्रभारी प्राचार्य डॉ. जेसी मेश्राम को पद की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। विद्यार्थियों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा कॉलेज की व्यवस्थाओं तथा प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जबलपुर अतिरिक्त संचालक स्तर से की गई कार्रवाई के बाद महाविद्यालय में वरिष्ठता के आधार पर समाजशास्त्र विषय की सहायक प्राध्यापक डॉ. ज्योति सिंह को प्रभारी प्राचार्य एवं आहरण-संवितरण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

लंबे समय से प्राचार्य की कार्यप्रणाली का विरोध

नैनपुर क्षेत्र के इस शासकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा समय-समय पर प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है। जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष भी विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए प्राचार्य का पुतला जलाया था। शिक्षकों की ओर से भी लिखित शिकायतें किए जाने की बात सामने आई थी।

इन शिकायतों और महाविद्यालय की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए जबलपुर अतिरिक्त संचालक द्वारा तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी।

8 अक्टूबर को जांच टीम के सामने विद्यार्थियों का प्रदर्शन

आठ अक्टूबर को जांच टीम शासकीय महाविद्यालय नैनपुर पहुंची। इसी दौरान विद्यार्थियों ने कॉलेज की समस्याओं को लेकर विरोध दर्ज कराया और प्रभारी प्राचार्य को हटाने की मांग उठाई।

छात्र-छात्राओं ने जांच टीम को आवेदन देकर महाविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी, रखरखाव में लापरवाही और अन्य समस्याओं की जानकारी दी। विद्यार्थियों का कहना था कि लगातार शिकायतों के बावजूद उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो रहा था।

18 लाख रुपये के फंड का हिसाब मांगा

विरोध प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के लगभग 18 लाख रुपये के फंड के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें इस राशि के खर्च का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

फंड में गड़बड़ी संबंधी आरोप विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए हैं। राशि के उपयोग में किसी वित्तीय अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसकी वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित अभिलेखों से ही स्पष्ट होगी।

खुले बिजली के तार, गंदगी और पेयजल की समस्या

विद्यार्थियों ने महाविद्यालय परिसर में बिजली के खुले तारों से दुर्घटना की आशंका जताई। उनका आरोप था कि कॉलेज परिसर में नियमित साफ-सफाई का अभाव है और कुछ स्थानों पर गुटखा, सिगरेट तथा शराब की खाली बोतलें भी मिलती हैं।

छात्रों ने बताया कि उनसे लगभग 4,000 से 4,500 रुपये तक फीस ली जाती है, लेकिन कक्षाओं में पंखों सहित कई बुनियादी सुविधाएं संतोषजनक स्थिति में नहीं हैं। पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने की शिकायत भी जांच टीम के सामने रखी गई।

छात्राओं ने गर्ल्स वॉशरूम की स्थिति पर जताई नाराजगी

महाविद्यालय की छात्राओं ने विशेष रूप से गर्ल्स वॉशरूम के टूटे दरवाजों और सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। छात्राओं का आरोप था कि शिकायत लेकर प्राचार्य के पास पहुंचने पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जाता और बातचीत का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं रहता।

विद्यार्थियों ने मांग की कि कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा, स्वच्छ शौचालय, पेयजल, बिजली और पढ़ाई के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए।

डॉ. ज्योति सिंह को मिला प्राचार्य का प्रभार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों की शिकायतों और जांच प्रक्रिया के बाद जबलपुर अतिरिक्त संचालक स्तर से डॉ. जेसी मेश्राम को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी से हटाया गया है।

महाविद्यालय में वरिष्ठता के आधार पर डॉ. ज्योति सिंह, सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र को प्रभारी प्राचार्य तथा आहरण-संवितरण अधिकारी का प्रभार सौंपा गया है।

नई प्रभारी प्राचार्य के सामने चुनौतियां

अब विद्यार्थियों की अपेक्षा है कि नई प्रभारी प्राचार्य कॉलेज में पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, बिजली, शिक्षण व्यवस्था और शिकायतों के समाधान को प्राथमिकता देंगी। इसके साथ ही फंड के उपयोग को लेकर उठे सवालों पर भी पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्राचार्य बदलने के बाद क्या सुधरेंगी कॉलेज की व्यवस्थाएं?

नैनपुर महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य के बदलाव के बाद विद्यार्थियों की निगाहें अब व्यवस्थाओं में वास्तविक सुधार पर टिकी हैं। विद्यार्थियों द्वारा उठाई गई समस्याओं का समाधान, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक पारदर्शिता नई व्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौतियां रहेंगी।

महाविद्यालय में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्र-छात्राओं की शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

दैनिक रेवांचल टाइम्स | शिक्षा • जनहित • जवाबदेही

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