स्कूलों के गैस सिलेंडरों में कथित कटौती का खेल, दो बुकिंग पर एक और चार पर दो देने के आरोप
नैनपुर की शुभम भारत गैस एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल; ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त वसूली की शिकायतें, जांच की मांग
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला। जिले में सरकारी स्कूलों तक पहुंचने वाले गैस सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार नैनपुर में संचालित शुभम भारत गैस एजेंसी द्वारा स्कूलों की बुकिंग के अनुरूप पूरी संख्या में सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
शिकायतों में दावा किया गया है कि यदि स्कूल द्वारा दो सिलेंडर बुक किए जाते हैं तो एक ही सिलेंडर दिया जाता है, जबकि चार सिलेंडर की बुकिंग पर दो सिलेंडर उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आ रही है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी संस्थानों के लिए आवश्यक ईंधन की आपूर्ति में गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है।
नागरिकों का सवाल है कि जब स्कूल नियमानुसार सिलेंडरों की बुकिंग और भुगतान करते हैं, तो उन्हें पूरी मात्रा में आपूर्ति क्यों नहीं मिल रही? क्या इसके पीछे कोई अधिकृत नियम है या वितरण स्तर पर मनमानी हो रही है? इसकी स्थिति संबंधित विभाग की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
स्टॉक रजिस्टर और बुकिंग रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए गैस एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर, उपभोक्ता बुकिंग रिकॉर्ड, स्कूलों को जारी किए गए सिलेंडरों की संख्या, भुगतान विवरण और डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच कराई जानी चाहिए।
यदि स्कूलों के नाम पर निर्धारित संख्या में सिलेंडर दर्ज हो रहे हैं लेकिन वास्तविक आपूर्ति कम की जा रही है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है। वहीं यदि पूरी आपूर्ति की गई है, तो एजेंसी को रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
नैनपुर की शुभम भारत गैस एजेंसी के साथ पिंडरई की अनुजा एचपी गैस एजेंसी को लेकर भी ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित दर से अधिक राशि लिए जाने और डिलीवरी शुल्क के नाम पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।
गांव तक सिलेंडर पहुंचाने के नाम पर कितनी राशि ली जा रही?
ग्रामीण उपभोक्ताओं के बीच चर्चा है कि सिलेंडर की निर्धारित कीमत के अलावा गांव तक डिलीवरी के नाम पर अतिरिक्त राशि ली जाती है। ऐसी स्थिति में प्रशासन और संबंधित गैस कंपनियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उपभोक्ताओं से अधिकतम कितनी राशि ली जा सकती है और कौन-सी वसूली अधिकृत है।
यदि किसी एजेंसी द्वारा निर्धारित दर से अधिक राशि ली जा रही है तो यह उपभोक्ता हितों से जुड़ा गंभीर मामला है। वहीं आरोप गलत हैं तो एजेंसियों को सार्वजनिक रूप से दर और डिलीवरी व्यवस्था स्पष्ट करनी चाहिए।
नागरिकों ने जिला प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा संबंधित गैस कंपनियों से स्कूलों को सिलेंडर वितरण, बुकिंग और आपूर्ति की वास्तविक संख्या, ग्रामीण उपभोक्ताओं से वसूली, डिलीवरी शुल्क और निर्धारित दरों के पालन की जांच कराने की मांग की है।
स्कूलों की रसोई से जुड़ा मामला, इसलिए जांच जरूरी
सरकारी स्कूलों में गैस सिलेंडर सीधे बच्चों के भोजन निर्माण और रसोई संचालन से जुड़े होते हैं। ऐसे में आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी का असर स्कूल की भोजन व्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि शिकायतों की तत्काल और पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी माना जा रहा है।
अब नजर जिला प्रशासन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और संबंधित गैस कंपनियों पर है। जांच होने पर ही स्पष्ट होगा कि शिकायतें वास्तविक अनियमितता की ओर इशारा करती हैं या वितरण व्यवस्था को लेकर किसी तरह की गलतफहमी है।
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