मंडला में शराबबंदी पर गंभीर सवाल: चार दुकानें बंद, 400 अवैध ठिकाने होने का दावा!
आखिर कहां है आबकारी विभाग और क्या कर रहे हैं जनप्रतिनिधि?
नर्मदा नगरी में अवैध शराब की बिक्री के आरोप, होटल-ढाबों से लेकर छोटी दुकानों तक सप्लाई का दावा; युवाओं के भविष्य को लेकर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला। मां नर्मदा की पावन धरा पर बसे मंडला शहर में शराबबंदी के बावजूद कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नगर और उपनगरीय महाराजपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर चोरी-छिपे देशी-विदेशी शराब बेची और परोसी जा रही है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस कथित अवैध कारोबार का असर युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सवाल केवल शराब की बिक्री का नहीं, बल्कि कानून के पालन, प्रशासनिक जवाबदेही और नई पीढ़ी के भविष्य का भी है।
नर्मदा नगरी में शराबबंदी, फिर बिक्री के आरोप क्यों?
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में मां नर्मदा के संरक्षण और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी से जुड़े निर्णय लिए जाने का हवाला दिया जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर नर्मदा के दोनों तटों से पांच किलोमीटर के दायरे में शराब पर प्रतिबंध का भी उल्लेख किया जा रहा है।
हालांकि, इस प्रतिबंध की वर्तमान कानूनी सीमा, लागू क्षेत्रों और शर्तों की पुष्टि संबंधित शासकीय आदेशों से की जानी आवश्यक है। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित क्षेत्रों में शराब बेची जा रही है, तो यह सीधे तौर पर निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
चाय की दुकान, होटल या शराब परोसने का अड्डा?
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के अनुसार, मंडला नगर और महाराजपुर के कुछ स्थानों पर चाय-कॉफी की दुकानों, भोजनालयों, अंडा दुकानों तथा चिकन-मटन और बिरयानी बेचने वाले प्रतिष्ठानों की आड़ में शराब उपलब्ध कराए जाने के आरोप हैं।
दावा किया जा रहा है कि कुछ प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को बैठाकर शराब पिलाने की व्यवस्था भी की जाती है। कथित तौर पर शराब पीने के लिए गिलास, पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
यदि ये आरोप सही हैं, तो सवाल उठता है कि ऐसे प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कितनी बार किया गया? क्या इनके पास शराब बेचने या परोसने की वैध अनुमति है? और बिना अनुमति शराब परोसने की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
शराब ठेकेदारों के नेटवर्क पर भी उठे सवाल
शिकायतों में छत्तीसगढ़ से जुड़े शराब ठेकेदारों और उनके कथित वितरण नेटवर्क की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि शहर से लगे ढाबों और अन्य स्थानों तक बिचौलियों के माध्यम से शराब पहुंचाई जाती है।
हालांकि, किसी विशिष्ट ठेकेदार, कर्मचारी या प्रतिष्ठान की अवैध कारोबार में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए शराब की आपूर्ति, परिवहन, स्टॉक रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
चार दुकानें बंद, 400 अवैध ठिकाने खुलने का दावा!
स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि मंडला नगर और महाराजपुर में पूर्व में संचालित चार लाइसेंसी शराब दुकानों के बंद होने के बाद अवैध बिक्री के ठिकानों की संख्या बढ़ गई और अब लगभग 400 स्थानों से शराब उपलब्ध कराई जा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि 400 ठिकानों की संख्या का कोई सत्यापित आधिकारिक रिकॉर्ड फिलहाल प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए प्रशासन को इस दावे की वास्तविकता जांचकर सार्वजनिक करनी चाहिए।
जिला मुख्यालय में आबकारी कार्यालय, फिर निगरानी पर सवाल क्यों?
मंडला जिला मुख्यालय में आबकारी विभाग का कार्यालय और नियंत्रण व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद कथित अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आना चिंता का विषय है।
सवाल उठाया जा रहा है कि क्या विभाग केवल कच्ची शराब के विरुद्ध कार्रवाई तक सीमित है? क्या होटल, ढाबों और छोटी दुकानों में कथित रूप से बेची जा रही देशी-विदेशी शराब की भी नियमित जांच होती है?
विभागीय अधिकारियों और शराब कारोबारियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच से नहीं हुई है। इसलिए किसी अधिकारी को दोषी ठहराने के बजाय शिकायतों, निरीक्षण अभिलेखों और की गई कार्रवाई का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाना चाहिए।
नशे की गिरफ्त में युवा, परिवारों की चिंता बढ़ी
अवैध शराब की आसान उपलब्धता को लेकर सबसे बड़ी चिंता युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति की है। कम उम्र में शराब की लत लगने से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।
शराब के अत्यधिक सेवन से घरेलू विवाद, आर्थिक परेशानियां और हिंसक घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। हालांकि, क्षेत्र में हुई किसी विशेष आपराधिक घटना को शराब से जोड़ने के लिए पुलिस रिकॉर्ड और ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता होगी।
सवाल यह है कि युवाओं को नशे से बचाने और अवैध शराब की उपलब्धता रोकने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधि तथा सामाजिक संगठन मिलकर क्या ठोस कदम उठा रहे हैं?
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी तय हो
नर्मदा नगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए अवैध शराब बिक्री की शिकायतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा है कि वे संबंधित विभागों से कार्रवाई का विवरण मांगें और प्रतिबंधित क्षेत्रों में शराब की बिक्री रोकने के लिए प्रभावी पहल करें।
केवल घोषणाओं से शराबबंदी प्रभावी नहीं हो सकती। इसके लिए नियमित निरीक्षण, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कदम और विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
प्रशासन से सात सीधे सवाल
- मंडला और महाराजपुर में शराबबंदी से संबंधित वर्तमान शासकीय आदेश क्या हैं?
- प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं?
- पिछले एक वर्ष में कितने होटल, ढाबों और अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई?
- अवैध शराब सप्लाई में ठेकेदारों या बिचौलियों की भूमिका की जांच हुई या नहीं?
- चार दुकानों के बंद होने के बाद 400 अवैध ठिकाने खुलने के दावे की वास्तविकता क्या है?
- कितने मामलों में शराब जब्त की गई और कितने व्यक्तियों पर कार्रवाई हुई?
- युवाओं को नशे से बचाने और शिकायतकर्ताओं की पहचान सुरक्षित रखने के लिए क्या व्यवस्था है?
अब आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए
मंडला नगर, महाराजपुर, नर्मदा घाटों के आसपास और शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में कथित अवैध शराब बिक्री की शिकायतों की संयुक्त जांच कराई जानी चाहिए। आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों द्वारा चिन्हित स्थानों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
यदि किसी प्रतिष्ठान में बिना अनुमति शराब की बिक्री या सेवन की व्यवस्था पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार की मिलीभगत के प्रमाण सामने आते हैं, तो उसकी जवाबदेही भी तय हो।
इस पूरे मामले में संबंधित आबकारी विभाग, जिला प्रशासन और आरोपों से जुड़े पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना भी आवश्यक है, ताकि जनता को तथ्यात्मक स्थिति की जानकारी मिल सके।
क्या प्रशासन कथित अवैध शराब कारोबार की निष्पक्ष जांच कराएगा या शिकायतें यूं ही उठती रहेंगी?
