Breaking

revanchal times new

मंडला के किसली स्कूल में परीक्षा से पहले पढ़ाई पर संकट! दो शिक्षकों के भरोसे शाला, जन शिक्षक की नियुक्ति और उपस्थिति पर उठे सवाल

मंडला | घुघरी | शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

परीक्षा नजदीक, किसली के बच्चों की पढ़ाई पर संकट! दो शिक्षकों के भरोसे शासकीय शाला

जन शिक्षक की नियुक्ति और उपस्थिति पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

बीईओ बोले—नियम और संबंधित आदेश की जानकारी नहीं, इसलिए कुछ नहीं कह सकता

दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी। परीक्षा का समय नजदीक आते ही विद्यार्थियों की पढ़ाई और तैयारी को लेकर स्कूलों में गंभीरता बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि किसी शासकीय शाला में शिक्षकों की कमी हो और उपलब्ध शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायतें सामने आने लगें, तो बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।

मंडला जिले के जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत किसली स्थित शासकीय शाला की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।




ग्रामीणों के अनुसार, शाला में महज दो शिक्षक पदस्थ हैं। वहीं, शिक्षक अमित आरेले को जन शिक्षक की जिम्मेदारी सौंपे जाने और उनकी नियमित उपस्थिति को लेकर भी जांच की मांग की जा रही है।

मामला केवल शिक्षकों की संख्या तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि जब परीक्षाएं नजदीक हों, तब बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा कराने, कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त मार्गदर्शन देने और परीक्षा की तैयारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल—बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा?

ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार स्कूल में शिक्षकों की संख्या सीमित है। ऐसे में परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम, पुनरावृत्ति और कमजोर विद्यार्थियों की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए विभागीय हस्तक्षेप की मांग उठ रही है।

परीक्षा के समय शिक्षकों की कमी, विद्यार्थियों को नुकसान की आशंका

परीक्षा किसी भी विद्यार्थी के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। इस समय नियमित कक्षाएं, पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति, कठिन विषयों का समाधान और विद्यार्थियों की शंकाओं का निराकरण बेहद आवश्यक होता है।

लेकिन यदि किसी स्कूल में शिक्षकों की संख्या कम है, तो एक ही शिक्षक पर कई कक्षाओं या विषयों का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्रत्येक विद्यार्थी पर व्यक्तिगत ध्यान देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

विशेष रूप से कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने, नियमित अभ्यास में कमी और विषय संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं मिलने से परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने की आशंका रहती है।

हालांकि, किसली की शाला में विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति, पाठ्यक्रम की प्रगति और परीक्षा की तैयारियों का आकलन विभागीय निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

दो शिक्षकों के भरोसे व्यवस्था, कैसे पूरा होगा पाठ्यक्रम?

ग्रामीणों का कहना है कि किसली की शासकीय शाला में केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में यह जांचना आवश्यक है कि विद्यालय में कुल कितने विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, कितनी कक्षाएं संचालित हो रही हैं और प्रत्येक विषय के अध्यापन की जिम्मेदारी किस शिक्षक को दी गई है।

यदि शिक्षकों की कमी के कारण कक्षाओं का नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है, तो शिक्षा विभाग को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

परीक्षा के समय केवल शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाया जाए, उनका पाठ्यक्रम पूरा हो और परीक्षा से पहले उनकी तैयारी की समीक्षा की जाए।

स्कूल की व्यवस्था को लेकर जरूरी सवाल

  • शाला में विद्यार्थियों और संचालित कक्षाओं की वास्तविक संख्या कितनी है?
  • दो शिक्षकों के बीच विषयों और कक्षाओं का बंटवारा कैसे किया गया है?
  • परीक्षा से पहले कितना पाठ्यक्रम पूरा कराया जा चुका है?
  • कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की क्या व्यवस्था है?
  • शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विभाग ने अब तक क्या प्रयास किए?

परिवीक्षा अवधि में जन शिक्षक की जिम्मेदारी, आदेश और नियमों की जांच की मांग

शिक्षक अमित आरेले को परिवीक्षा अवधि के दौरान जन शिक्षक की जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।

शिकायतकर्ताओं की मांग है कि संबंधित विभागीय आदेश की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि जन शिक्षक का दायित्व सौंपने की प्रक्रिया किस नियम, पात्रता और विभागीय प्रावधान के अंतर्गत पूरी की गई थी।

इस मामले में लागू नियमों और आदेश की वास्तविक स्थिति सामने आना आवश्यक है। केवल परिवीक्षा अवधि का हवाला देकर किसी कर्मचारी को दायित्व सौंपे जाने की प्रक्रिया को स्वतः नियमविरुद्ध नहीं माना जा सकता।

इसलिए शिक्षा विभाग को संबंधित आदेश, पात्रता की शर्तों और उस समय लागू प्रावधानों की जांच कर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

जांच का महत्वपूर्ण बिंदु

क्या संबंधित शिक्षक को जन शिक्षक की जिम्मेदारी विभागीय नियमों और सक्षम अधिकारी के आदेश के अनुसार सौंपी गई थी? इसका उत्तर नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों और लागू नियमों की जांच से ही मिलेगा।

अनुपस्थिति की शिकायत, उपस्थिति रजिस्टर से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

ग्रामीणों ने संबंधित जन शिक्षक के लंबे समय तक शाला से अनुपस्थित रहने की शिकायत भी की है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ऐसे में संबंधित अवधि की उपस्थिति पंजिका, अवकाश अभिलेख, भ्रमण डायरी और कार्य प्रतिवेदन की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।

यदि संबंधित शिक्षक जन शिक्षक के रूप में क्षेत्रीय भ्रमण अथवा अन्य विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे, तो उसका दस्तावेजी सत्यापन होना चाहिए।

वहीं, यदि जांच में अनधिकृत अनुपस्थिति प्रमाणित होती है, तो लागू सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच की प्रक्रिया के दौरान बच्चों की नियमित पढ़ाई किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी हो तय

शाला की शैक्षणिक व्यवस्था और शिक्षकों की उपलब्धता की निगरानी संबंधित शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

ऐसे में संकुल प्राचार्य, बीआरसी और बीईओ स्तर पर किए गए निरीक्षणों की समीक्षा भी जरूरी है।

यदि विद्यालय में पहले से शिक्षकों की कमी थी, तो उसे दूर करने के लिए क्या प्रयास किए गए? यदि उपस्थिति को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, तो उनका सत्यापन कब किया गया?

इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों और विभागीय जांच के माध्यम से सामने आना चाहिए।

बीईओ एल.एस. उईके बोले—नियम और आदेश की जानकारी नहीं

इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी घुघरी एल.एस. उईके से संबंधित नियमों और आदेश के बारे में जानकारी चाही गई।

खंड शिक्षा अधिकारी का बयान

“नियम के विषय में तो मुझे जानकारी नहीं है और आदेश की जानकारी भी नहीं है मुझे, इसलिए मैं कुछ नहीं कह सकता।”

— एल.एस. उईके, खंड शिक्षा अधिकारी, घुघरी

बीईओ के इस बयान के बाद संबंधित आदेश, लागू नियमों और विभागीय निगरानी की स्थिति को स्पष्ट करने की आवश्यकता बढ़ गई है।

हालांकि, इस बयान मात्र से किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित नहीं होती। लेकिन संबंधित अभिलेखों की जांच कर आधिकारिक स्थिति सामने लाना आवश्यक है।

कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों एवं पालकों ने कलेक्टर मंडला और जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि किसली की शासकीय शाला का औचक निरीक्षण कराया जाए।

निरीक्षण में शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता, विद्यार्थियों की संख्या, कक्षाओं के संचालन, पाठ्यक्रम की प्रगति और परीक्षा की तैयारियों का आकलन किया जाए।

इसके साथ ही जन शिक्षक की जिम्मेदारी सौंपने संबंधी आदेश और उपस्थिति अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

ग्रामीणों और पालकों की प्रमुख मांगें

  1. किसली की शासकीय शाला का औचक निरीक्षण कराया जाए।
  2. शिक्षकों की वास्तविक संख्या और उपलब्धता का सत्यापन हो।
  3. जन शिक्षक का दायित्व सौंपने संबंधी आदेश और नियमों की जांच हो।
  4. उपस्थिति पंजिका, अवकाश और भ्रमण अभिलेखों की जांच की जाए।
  5. शिक्षकों की कमी होने पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
  6. बच्चों के लिए पुनरावृत्ति और विशेष मार्गदर्शन कक्षाएं संचालित हों।
  7. नियम उल्लंघन प्रमाणित होने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो।

परीक्षा से पहले बच्चों के लिए विशेष कार्ययोजना जरूरी

ग्रामीणों की मांग है कि यदि शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो शिक्षा विभाग तत्काल अतिरिक्त शिक्षकीय व्यवस्था करे।

इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति, कठिन विषयों का समाधान और कमजोर बच्चों को विशेष मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की जाए।

परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम पूरा कराने की स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर उसकी नियमित समीक्षा भी की जानी चाहिए।

विभागीय जांच और शैक्षणिक सुधार दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ चलें, ताकि प्रशासनिक सवालों के समाधान की प्रतीक्षा में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बच्चों के भविष्य का है

किसली की शाला से जुड़ी शिकायतें शिक्षा विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल रखती हैं—क्या परीक्षा के नजदीक विद्यार्थियों को वह शैक्षणिक सहयोग मिल पा रहा है, जिसकी उन्हें जरूरत है?

यदि शिक्षकों की कमी और विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति समय रहते स्पष्ट नहीं की गई, तो इसका नुकसान उन बच्चों को उठाना पड़ सकता है, जिनके पास बेहतर शिक्षा के सीमित विकल्प हैं।

अब जरूरत केवल जांच का आश्वासन देने की नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई और उसके परिणाम सामने लाने की है।

प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, शिक्षकों की कमी दूर की जाए और विद्यार्थियों की परीक्षा की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाए।

बच्चों की पढ़ाई से समझौता क्यों?

विभागीय आदेशों और जिम्मेदारियों पर उठे सवालों का जवाब अभिलेखों से मिल सकता है, लेकिन परीक्षा में होने वाले शैक्षणिक नुकसान की भरपाई आसान नहीं होगी।

किसली के विद्यार्थियों को चाहिए समय पर पढ़ाई, पर्याप्त शिक्षक और निष्पक्ष जांच।

संपादकीय नोट: शिक्षकों की संख्या, जन शिक्षक की जिम्मेदारी और उपस्थिति से संबंधित सवाल ग्रामीणों की शिकायतों पर आधारित हैं। संबंधित शिक्षक के विरुद्ध किसी अनियमितता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति विभागीय आदेश, उपस्थिति अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post
revanchal times new