मण्डला में ‘अनाम पथ का पथिक’ का विमोचन, महिष्मति घाट पर साहित्य और कबीर गायन का संगम
मण्डला। सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और चर्चित वकील रहे विभूति झा की नई पुस्तक ‘अनाम पथ का पथिक’ का विमोचन नर्मदा तट स्थित महिष्मति घाट पर किया गया। श्रद्धेय विजयदत्त श्यामादेवी झा मेमोरियल ट्रस्ट भंवरताल के आयोजन में साहित्य और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। पुस्तक विमोचन के बाद भोपाल की गायन मंडली ‘विरासत’ ने कबीर गायन प्रस्तुत किया।

साहित्य और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां रहीं उपस्थित
विमोचन कार्यक्रम में पद्मश्री महेश शर्मा, लेखक व चिंतक चिन्मय मिश्र, लेखक सहसंपादक श्री गौरीनाथ बिहार, लेखक प्रकाशक गौरीना, प्रख्यात सर्जक देवीलाल पाटीदार, गर्जन सिंह वरकड़े, पत्रकार पंकज शुक्ला एवं पत्रकार पूजा सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर मंचासीन रहे। भाजपा जिला अध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. संजय कुशराम विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया।
स्थापित जीवन से अनाम राह की यात्रा
‘अनाम पथ का पथिक’ एक नामी वकील की गुमनामी की ओर यात्रा को केंद्र में रखती है। पुस्तक के शीर्षक और विषयवस्तु ने साहित्यप्रेमियों को आत्मचिंतन, जीवन की दिशा और पहचान जैसे विषयों पर विचार करने का अवसर दिया। नर्मदा तट की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ने आयोजन को विशेष परिवेश प्रदान किया।
लेखक विभूति झा ने बताया कि यह आत्मकथात्मक कृति उनके जीवन की उस यात्रा से परिचित कराती है, जिसमें उन्होंने अपने स्थापित और लोकप्रिय जीवन को पीछे छोड़कर एक अनाम राह पर चलने का निर्णय लिया। लेखक के अनुसार, पुस्तक का आरंभ 29 जून 2007 से होता है। इसमें जीवन के विभिन्न पड़ावों, अनुभवों और यात्राओं के साथ उन परिस्थितियों का उल्लेख है, जिन्होंने उनके विचारों, निर्णयों और जीवन की दिशा को प्रभावित किया।
पुस्तक में घटनाओं के विवरण के साथ अनुभवों के भावनात्मक और सामाजिक पक्षों को भी सामने रखा गया है। व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से यह कृति पाठकों को जीवन, समाज और अपने निर्णयों के प्रभावों पर विचार करने का अवसर देती है।
‘विरासत’ की प्रस्तुति में गूंजी कबीर की वाणी
पुस्तक विमोचन के बाद भोपाल से आई प्रख्यात गायन मंडली ‘विरासत’ के राजीव सिंह और उनके साथियों ने कबीर के पदों और वाणी की प्रस्तुति दी। गायन के माध्यम से जीवन की सच्चाई, आत्मबोध, मानवीय मूल्यों और आडंबर से दूर रहकर सार्थक जीवन जीने का संदेश दिया गया। कबीर की वाणी में निहित सहजता, सामाजिक चेतना और जीवन-दर्शन ने घाट के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के अवसर पर संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इसमें भी ‘विरासत’ भोपाल के राजीव सिंह और अन्य साथियों ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में जयदत्त झा, आशीष कछवाहा, सारंग साहू सहित अन्य सामाजिक लोगों का योगदान रहा।