बम्हनी बंजर के सरस्वती विद्यालय में ड्रेस बिक्री का आरोप, अभिभावकों ने जांच और कार्रवाई पर उठाए सवाल
मंडला | बम्हनी बंजर

हरदहा वार्ड क्रमांक 15, बम्हनी बंजर स्थित सरस्वती शिशु उच्च माध्यमिक विद्यालय में परिसर से गणवेश बेचने और भुगतान की रसीद नहीं देने का आरोप सामने आया है। जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत करने वाले अभिभावक ने जांच और कार्रवाई की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शासन और जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद विद्यालय से ड्रेस बेची गई।
नकद भुगतान के बाद रसीद नहीं मिलने की शिकायत
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने विद्यालय पहुंचकर अपने पुत्र के लिए ड्रेस खरीदी और नकद राशि प्राचार्य को दी। रसीद मांगने पर प्राचार्य ने कथित तौर पर कहा कि रसीदें एक साथ दी जाएंगी और उनके पुत्र के हाथ भेज दी जाएंगी। अभिभावक का कहना है कि इसके बाद भी उन्हें भुगतान की पावती नहीं मिली। इसी विषय को लेकर उन्होंने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत की।
सात दिन में जांच प्रतिवेदन देने के निर्देश का उल्लेख
शिकायतकर्ता के मुताबिक, दिनांक 29/9/26 को आवेदन क्रमांक 85 के माध्यम से शिकायत प्रस्तुत की गई थी। इस पर जिला कलेक्टर ने कार्यालय डीसीसी (शिक्षा), मंडला को सात दिवस के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
उनका कहना है कि लगभग 13 दिनों बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मंडला के सहायक संचालक माखन सिंह सेन्द्राम और कार्यालय डीपीसी, मंडला से राजेश पांडे ने विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान शिकायतकर्ता सहित अन्य अभिभावकों ने भी ड्रेस खरीदने, विद्यालय को राशि देने और रसीद नहीं मिलने के संबंध में जांच अधिकारियों को लिखित कथन दिए। शिकायतकर्ता ने अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति पर सवाल उठाया है।
ऑनलाइन भुगतान और दर सूची के साक्ष्य देने का दावा
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि अभिभावकों के लिखित कथन और भुगतान संबंधी साक्ष्य जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा किए गए हैं। उनके अनुसार, ड्रेस की राशि विद्यालय के क्यूआर कोड तथा विद्यालय में कार्यरत कक्षा शिक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर के खातों में ऑनलाइन भी भेजी गई थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय के लेटर पैड पर ड्रेस की दर सूची तैयार की गई थी, जिसे प्राचार्य के हस्ताक्षर से प्रमाणित कर नोटिस बोर्ड पर लगाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसमें अभिभावकों से मोलभाव नहीं करने की बात भी लिखी गई थी। उन्होंने जांच अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने और मिलीभगत का आरोप लगाया है; हालांकि उपलब्ध विवरण में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
निजी विद्यालयों के लिए जारी निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत मंडला द्वारा जारी आदेश का हवाला दिया गया है। इसमें उल्लेखित मध्य प्रदेश निजी विद्यालय फीस तथा संबंधित विषयों का विनिमय नियम 2020 और संशोधित अधिनियम 2025 के संबंध में कहा गया है कि निजी विद्यालय अपने परिसर से ड्रेस, पुस्तक या अन्य आवश्यक सामग्री नहीं बेच सकते और न ही अभिभावकों को इन्हें खरीदने के लिए बाध्य कर सकते हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विद्यालय ने इन निर्देशों का उल्लंघन किया।
निगरानी दलों की भूमिका पर भी सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, निजी विद्यालयों में अधिक शुल्क वसूली और ड्रेस बिक्री जैसी शिकायतों की निगरानी के लिए मंडला जिले के 9 ब्लॉक में अलग-अलग जांच दल गठित किए गए हैं। उन्होंने इन दलों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय में अधिकारियों की मौजूदगी के दौरान भी दर सूची की जानकारी दी गई थी।
उनका दावा है कि उस समय बीआरसी, डीपीसी कार्यालय के अधिकारी, संकुल केंद्र प्रभारी हवेली उच्च माध्यमिक विद्यालय विजय ठाकुर, जन शिक्षक और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। डीपीसी कार्यालय से राजेश पांडे की उपस्थिति का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, संबंधित लोगों को प्राचार्य की टेबल और नोटिस बोर्ड पर लगी दर सूची से अवगत कराने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
अभिभावकों ने जनआंदोलन की बात कही
शिकायतकर्ता ने कहा कि कार्रवाई नहीं होने से अभिभावकों में आक्रोश है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की अन्य कथित खामियों को भी साक्ष्यों के साथ सामने लाने और जनआंदोलन करने की बात कही है।
यह समाचार अभिभावकों की शिकायत और उनके दावों पर आधारित है। उपलब्ध सामग्री में विद्यालय प्रबंधन तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच का अंतिम निष्कर्ष शामिल नहीं है।