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धान पंजीयन की 22 क्विंटल सीमा पर किसानों का विरोध, 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की उठी मांग

धान पंजीयन की 22 क्विंटल सीमा पर किसानों का विरोध, 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की उठी मांग

सेवा संकल्प शिविर में किसानों के साथ कांग्रेस नेताओं ने सौंपा आवेदन; ₹3100 प्रति क्विंटल की चुनावी घोषणा पर भी निर्णय की मांग

दैनिक रेवाँचल टाईम्स, बजाग। धान पंजीयन की मात्रा को लेकर डिंडौरी जिले के किसानों ने सवाल उठाते हुए इसे 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर कम से कम 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने की मांग की है। सेवा संकल्प शिविर में किसानों के साथ पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने कृषि विभाग को आवेदन सौंपकर वास्तविक उत्पादन के अनुरूप सरकारी खरीदी की व्यवस्था करने की मांग रखी।






आवेदन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्यप्रदेश के संबंधित कृषि मंत्री के नाम संबोधित किया गया। आवेदनकर्ताओं का कहना है कि डिंडौरी में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका धान उत्पादन से जुड़ी है और यदि पंजीयन सीमा वास्तविक पैदावार से कम रहती है तो पूरी उपज समर्थन मूल्य व्यवस्था के तहत बेचने में परेशानी हो सकती है।

किसानों का सवाल—उत्पादन ज्यादा तो पंजीयन कम क्यों?

किसानों एवं आवेदनकर्ताओं का दावा है कि आसपास के कुछ जिलों में अधिक मात्रा के हिसाब से पंजीयन की व्यवस्था है, जबकि डिंडौरी में 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा बताई जा रही है। उन्होंने इस अंतर की समीक्षा कर जिले की वास्तविक उत्पादन क्षमता के आधार पर सीमा तय करने की मांग की।

खेती की बढ़ती लागत का भी दिया हवाला

आवेदन में किसानों ने खाद, बीज, मजदूरी, जुताई, कटाई और परिवहन की बढ़ती लागत का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि यदि वास्तविक उपज निर्धारित पंजीयन सीमा से अधिक होती है, तो अतिरिक्त धान को दूसरी व्यवस्था से बेचने की मजबूरी बन सकती है।

किसानों ने मांग की कि जिले की कृषि परिस्थितियों और वास्तविक उत्पादन के आंकड़ों का परीक्षण कर पंजीयन सीमा की पुनः समीक्षा की जाए।

धान हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा

आवेदनकर्ताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका है। ऐसे में सरकारी खरीदी और पंजीयन व्यवस्था का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है।

₹3100 प्रति क्विंटल की घोषणा का भी उठाया मुद्दा

किसानों के साथ पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र में धान की खरीदी ₹3100 प्रति क्विंटल करने की घोषणा का हवाला भी दिया। उन्होंने आवेदन के माध्यम से इस घोषणा के अनुरूप किसानों को लाभ देने की मांग की।

“वास्तविक उत्पादन के आधार पर हो खरीदी”

आवेदनकर्ताओं का कहना है कि समर्थन मूल्य व्यवस्था का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब किसान अपनी वास्तविक उपज के अनुरूप पंजीयन और बिक्री कर सके। उन्होंने प्रशासन और सरकार से जिले की स्थिति की समीक्षा कर निर्णय लेने की मांग की।

सेवा संकल्प शिविर में सौंपा आवेदन

आवेदन सौंपने के दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य लोकेश पटेरिया, पूर्व प्रदेश प्रतिनिधि एवं जनपद उपाध्यक्ष राधेश्याम कुशराम, मिढली सरपंच भुखऊ राम, बिलाईखार सरपंच राजेंद्र धुर्वे, कृपाल दास, रामचरन, नितेश मार्को, सेवक धुर्वे, हरि सिंह, सुखीराम, ज्ञान सिंह, जगत सिंह और उमेश कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

किसानों की प्रमुख मांगें

● धान पंजीयन सीमा 22 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की जाए।

● वास्तविक उत्पादन के आधार पर सरकारी खरीदी की व्यवस्था हो।

● ₹3100 प्रति क्विंटल की 2023 की चुनावी घोषणा पर सरकार निर्णय स्पष्ट करे।

● डिंडौरी में पंजीयन सीमा तय करने के आधार और जिलेवार अंतर की स्थिति स्पष्ट की जाए।

अब सरकार और कृषि विभाग के जवाब का इंतजार

किसानों द्वारा उठाई गई मांगों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष और वर्तमान पंजीयन नियमों का जिलेवार आधार सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। विशेष रूप से 22 क्विंटल की सीमा और अन्य जिलों से तुलना संबंधी दावों की विभागीय रिकॉर्ड से पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

दैनिक रेवाँचल टाईम्स | बजाग-डिंडौरी

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