छिंदवाड़ा के पूजा लॉज में ‘राधा रानी गरबा’ की धूम, डांडिया की थाप पर झूमे श्रद्धालु
भक्ति, लोकनृत्य और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम
दैनिक रेवांचल टाइम्स | छिंदवाड़ा। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर छिंदवाड़ा शहर में गरबा और डांडिया की धूम देखने को मिल रही है। शहर के हृदय स्थल स्थित पूजा लॉज में आयोजित ‘राधा रानी गरबा’ स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागी गरबा की ताल पर थिरकते हुए मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।
पूजा लॉज परिसर में भक्ति संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और डांडिया की खनक के बीच उत्सव का माहौल बना हुआ है। यह आयोजन शहर में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति के प्रति जुड़ाव को भी दर्शाता है।
‘राधा रानी गरबा’ में भक्ति और उल्लास का संगम
नवरात्रि के दौरान पूजा लॉज परिसर में आयोजित गरबा कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य की मनमोहक छटा दिखाई दे रही है। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे प्रतिभागी संगीत की लय पर गोलाकार समूहों में गरबा कर रहे हैं। डांडिया की खनक और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण उत्सवमय नजर आ रहा है।
यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि देवी आराधना, सामूहिक सहभागिता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।
गरबा की परंपरा में छिपा है जीवन और सृजन का संदेश
गरबा गुजरात की प्रसिद्ध लोकनृत्य परंपरा है, जिसका विशेष संबंध नवरात्रि और शक्ति उपासना से है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, गरबा शब्द का संबंध ‘गर्भ दीप’ से माना जाता है, जो जीवन, सृजन और ऊर्जा का प्रतीक है।
पारंपरिक गरबा में श्रद्धालु मिट्टी के छिद्रित घड़े में जलते दीपक अथवा देवी की प्रतिमा के चारों ओर गोलाकार घेरे में नृत्य करते हैं। यह परंपरा सामूहिक आराधना और सांस्कृतिक एकता का सुंदर उदाहरण मानी जाती है।
गरबा की वैश्विक पहचान
वर्ष 2023 में यूनेस्को ने ‘गुजरात के गरबा’ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। इस मान्यता ने भारत की इस पारंपरिक लोकनृत्य विधा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी।
छिंदवाड़ा में भी बढ़ रहा लोक संस्कृति का उत्साह
गुजरात से निकली गरबा की परंपरा आज देश के अनेक हिस्सों में नवरात्रि उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। छिंदवाड़ा में भी इस लोकनृत्य के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है। पूजा लॉज में चल रहा ‘राधा रानी गरबा’ इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की एक झलक प्रस्तुत करता है।
ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय लोक कलाओं, पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मां दुर्गा की आराधना के साथ लोक संस्कृति का उत्सव
‘राधा रानी गरबा’ छिंदवाड़ा में श्रद्धा, संगीत और सांस्कृतिक सहभागिता का आकर्षक केंद्र बना हुआ है।
