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निवास में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप, जांच के डेढ़ साल बाद भी इंतजार

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निवास में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप, जांच के डेढ़ साल बाद भी इंतजार

निवास (मंडला)। नगर परिषद निवास क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों को लेकर स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत पर हुई जांच में अनियमितताएं सामने आने और जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन देने के बावजूद लगभग डेढ़ साल (18 महीने) से कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं ने कॉलोनाइजरों को प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण मिलने का भी आरोप लगाया है।

निवास में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप, जांच के डेढ़ साल बाद भी इंतजार

संयुक्त जांच में अनियमितताएं मिलने का दावा

प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व कृषि भूमि पर प्लॉटिंग की शिकायत के बाद राजस्व और नगर निकाय की संयुक्त टीम ने मौका-मुआयना किया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट में कॉलोनी को अवैध पाया गया, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की।

भूमि का डायवर्सन: शिकायत में आरोप है कि उपजाऊ कृषि भूमि को सक्षम राजस्व व्यपवर्तन (डायवर्सन) के बिना रिहायशी प्लॉटों में बदल दिया गया।

ले-आउट और पंजीयन: नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) से ले-आउट स्वीकृत नहीं होने और भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (RERA) में पंजीयन नहीं कराए जाने का भी आरोप है।

बुनियादी सुविधाएं: शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कॉलोनियों में 30 फीट की मुख्य सड़कों, सीवर-ड्रेनेज, पानी की टंकी और सार्वजनिक पार्क के लिए जमीन का प्रावधान नहीं है। उनका आरोप है कि 10 से 15 फीट के संकरे रास्ते छोड़कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।

कलेक्टर तक शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद जिला कलेक्टर को भी लिखित शिकायत और संबंधित दस्तावेज सौंपे गए। इसके बावजूद न कॉलोनाइजरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हुई और न ही अवैध बाउंड्रीवॉल हटाई गईं। उन्होंने जांच के बाद भी फाइल लंबित रहने पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

प्लॉट खरीदारों की जमा-पूंजी पर संकट का आरोप

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विवादित जमीन पर नई बाउंड्री और खंभे लगाकर प्लॉटों की बिक्री जारी है। ग्रामीणों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को ‘तुरंत रजिस्ट्री’ और ‘सस्ते दाम’ का भरोसा देकर जमीन बेची जा रही है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, नगर परिषद क्षेत्र में खुलेआम बोर्ड लगाकर बिक्री होने से खरीदार इसे प्रशासन की अनुमति प्राप्त मान लेते हैं। उनका आरोप है कि खरीद के बाद मकान निर्माण की अनुमति, नल कनेक्शन और बिजली का मीटर लेने के लिए दफ्तर पहुंचने पर खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एफआईआर, रजिस्ट्री और नामांतरण पर उठाए सवाल

शिकायतकर्ताओं ने सवाल किया है कि जांच में अवैध कॉलोनी पाए जाने के दावे के बावजूद मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम और म.प्र. भू-राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने संबंधित जमीनों की रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक नहीं लगाए जाने तथा पंजीयन विभाग और राजस्व अमले की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे तहसीलदार, नगर परिषद सीएमओ और जिला कलेक्टर तक शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि तत्काल कार्रवाई नहीं होने पर कथित भ्रष्टाचार और संरक्षण की शिकायत लोकायुक्त तथा ईओडब्ल्यू (EOW) से करेंगे और उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। उनकी मांग है कि अवैध कॉलोनियों को हटाकर संबंधित कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

संपादकीय स्पष्टता: प्रशासनिक संरक्षण, भ्रष्टाचार, ठगी और जांच के निष्कर्षों से संबंधित बातें प्रस्तुत सामग्री तथा शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। उपलब्ध सामग्री में संबंधित जांच रिपोर्ट की प्रति और प्रशासन या कॉलोनाइजरों का पक्ष शामिल नहीं है।

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