शराब की गिरफ्त में दम तोड़ती जिंदगियां, बिखरते परिवार
स्वास्थ्य से परिवार और अर्थव्यवस्था तक शराब का गहरा असर, नशामुक्त समाज की राह अब भी लंबी
दैनिक रेवाँचल टाईम्स। शराब का नुकसान केवल शराब पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसकी निर्भरता का प्रभाव स्वास्थ्य, परिवार, रोजगार, आर्थिक स्थिति, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जीवन तक पहुंच सकता है।
शराब में मौजूद एथेनॉल एक मनोसक्रिय (psychoactive) और विषाक्त पदार्थ है, जिसमें निर्भरता पैदा करने की क्षमता होती है। लंबे समय तक अथवा अत्यधिक शराब सेवन व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
शराब पर निर्भरता को केवल व्यक्ति के चरित्र या नैतिकता की कमजोरी मानना उचित नहीं है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को अपमानित या परिवार से अलग करने के बजाय उपचार, परामर्श, पुनर्वास और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के उपलब्ध वैश्विक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में शराब सेवन से जुड़ी वजहों से दुनिया में करीब 26 लाख लोगों की मौत हुई।
WHO के अनुसार लगभग 40 करोड़ लोग Alcohol Use Disorders के साथ जीवन जी रहे थे, जिनमें करीब 20.9 करोड़ लोग शराब पर निर्भरता से प्रभावित थे।
WHO के मुताबिक शराब सेवन का संबंध लिवर रोग, हृदय रोग और कई प्रकार के कैंसर सहित अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से है। वर्ष 2019 में शराब से संबंधित हृदय रोगों से करीब 4.74 लाख मौतों का अनुमान लगाया गया।
शराब को कैंसरकारी पदार्थ के रूप में स्थापित किया गया है और इसका सेवन स्तन, लिवर, सिर एवं गर्दन, ग्रासनली तथा कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। वर्ष 2019 में दुनिया में कैंसर से हुई करीब 4.01 लाख मौतें शराब सेवन से संबंधित मानी गईं।
शराब निर्णय क्षमता, प्रतिक्रिया और शारीरिक नियंत्रण को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि शराब पीकर वाहन चलाना चालक के साथ सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बन जाता है।
WHO के अनुसार वर्ष 2019 में शराब से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं में करीब 2.98 लाख मौतें हुईं। इनमें लगभग 1.56 लाख मौतें किसी दूसरे व्यक्ति के शराब सेवन से जुड़ी थीं।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा AIIMS के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र के माध्यम से वर्ष 2018 में कराए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में लगभग 16 करोड़ लोगों के शराब सेवन करने का अनुमान सामने आया था।
सर्वेक्षण के अनुसार 5.7 करोड़ से अधिक लोग हानिकारक अथवा निर्भर शराब सेवन से प्रभावित थे और उन्हें शराब से जुड़ी समस्याओं के लिए मदद की आवश्यकता थी।
भारत में शराब सेवन के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव पर प्रकाशित एक अध्ययन ने अनुमान लगाया कि 2011 से 2050 के बीच शराब से संबंधित मौतों के कारण करीब 25.8 करोड़ जीवन-वर्ष का नुकसान हो सकता है।
अध्ययन में स्वास्थ्य व्यवस्था, लोगों की जेब से होने वाले खर्च और उत्पादकता के नुकसान सहित सामाजिक आर्थिक बोझ करीब ₹121,364 अरब आंका गया। शराब से मिलने वाले कर राजस्व को समायोजित करने के बाद भी अनुमानित शुद्ध आर्थिक नुकसान ₹97,895 अरब बताया गया, जो औसतन GDP के लगभग 1.45 प्रतिशत प्रति वर्ष के बराबर आंका गया।
जब किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य शराब पर निर्भर होने लगता है तो समस्या केवल उसके स्वास्थ्य की नहीं रहती। घर की आय, बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा की जरूरतें और पारिवारिक रिश्ते भी प्रभावित हो सकते हैं।
नशे से जुड़ी हिंसा, विवाद और दुर्घटनाएं परिवारों पर अतिरिक्त सामाजिक एवं आर्थिक बोझ डाल सकती हैं। इसलिए शराब की समस्या को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेना बेहद जरूरी है।
युवाओं और किशोरों को नशे से होने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक नुकसान के बारे में वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक जानकारी देना आवश्यक है। परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां नशे को प्रतिष्ठा, आधुनिकता या मनोरंजन की अनिवार्य शर्त के रूप में न देखा जाए।
भारत सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए राष्ट्रीय नशामुक्ति एवं टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन उपलब्ध है।
नशा छोड़ें — स्वस्थ और खुशहाल जीवन से नाता जोड़ें।
वर्ष 2008 में भारत ने विश्व स्वास्थ्य सभा में महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को “World No Alcohol Day” के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य शराब के हानिकारक प्रभावों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना था। हालांकि इसे WHO के औपचारिक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित नहीं किया गया, लेकिन विभिन्न संस्थाएं इस अवसर पर शराब-मुक्ति और नशामुक्त जीवन का संदेश देती हैं।
डॉ. प्रितम भि. गेडाम
महाराष्ट्र सरकार से सम्मानित लेखक
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विशेष आलेख | नशामुक्ति | शराब और स्वास्थ्य | 2 अक्टूबर 2026
