BA LLB चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी परीक्षा में बड़ा सवाल, आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों के आरोप के बाद परीक्षा निरस्त
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में विधि छात्रों का विरोध प्रदर्शन; प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की जांच और नई परीक्षा तारीख जल्द घोषित करने की मांग
प्रश्नपत्र देखते ही छात्रों ने जताई आपत्ति
महाकौशल विधि छात्र संघ के अध्यक्ष अंकुश चौधरी ने आरोप लगाया कि BA LLB चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी भाषा की परीक्षा के लिए तैयार प्रश्नपत्र में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न शामिल किए गए थे। छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरे सत्र निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर तैयारी की थी, लेकिन परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र मिलने के बाद कई प्रश्नों को लेकर आपत्ति सामने आई।
छात्रों ने प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके परीक्षण और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कथित आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न प्रश्नपत्र में कैसे शामिल हुए।
परीक्षा निरस्त होने से छात्रों की बढ़ी परेशानी
छात्रों का कहना है कि परीक्षा निरस्त होने का असर उनके समय और आगे की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। कई विद्यार्थी ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों से परीक्षा देने जबलपुर पहुंचे थे। अब उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी के साथ यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं का अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा।
विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में यदि किसी स्तर पर त्रुटि हुई है तो उसका खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।
विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने खोला मोर्चा
परीक्षा निरस्त किए जाने के बाद बड़ी संख्या में विधि छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध जताया। छात्र प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच से जुड़े जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- प्रश्नपत्र और निर्धारित पाठ्यक्रम का आधिकारिक मिलान कराया जाए।
- जांच में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।
- निरस्त परीक्षा की नई तारीख जल्द घोषित की जाए।
- विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न होने दिया जाए।
नई परीक्षा तारीख जल्द घोषित करने की मांग
छात्र संघ अध्यक्ष अंकुश चौधरी ने मांग की है कि निरस्त की गई हिंदी भाषा की परीक्षा की नई तारीख विश्वविद्यालय जल्द घोषित करे। छात्रों का कहना है कि तारीख तय करने में देरी होने से आगामी परीक्षाओं और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है।
प्रश्नपत्र तैयार करने से पहले सिलेबस की जांच कैसे हुई?
विवाद के बाद सबसे अहम सवाल प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच की व्यवस्था को लेकर है। यदि छात्रों का आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न पूछे जाने का दावा सही पाया जाता है, तो यह जांच का विषय होगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर अंतिम रूप देने तक किस स्तर पर चूक हुई।
कहां हुई चूक, किसकी होगी जिम्मेदारी और दोबारा परीक्षा कब? छात्रों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर
