नेवसा में भागवत कथा की अमृत वर्षा, ऋषि महाराज बोले—‘पिता के कर्म, संस्कार और आशीर्वाद से खुलता है पुत्र की उन्नति का मार्ग’
स्व. शंभू सिंह राजपूत की वार्षिक पुण्यतिथि पर 27 सितंबर से 3 अक्टूबर तक धार्मिक आयोजन
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला। ग्राम नेवसा (भुआ बिछिया) में स्वर्गीय शंभू सिंह राजपूत की वार्षिक पुण्यतिथि के अवसर पर श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में आयोजकों के अनुसार टीकमगढ़ के श्रीश्री 1008 पीठाधीश्वर श्रद्धेय श्री ऋषि महाराज जी श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का रसपान करा रहे हैं।
कथा के दौरान श्रद्धेय श्री ऋषि महाराज जी ने कहा कि पिता के कर्म, संस्कार और आशीर्वाद से पुत्र के जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार और उनका आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। प्रत्येक व्यक्ति को माता-पिता और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए।
ऋषि महाराज जी ने पितृपक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पितरों का स्मरण, उनका सम्मान और उनके निमित्त धार्मिक अनुष्ठान सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में भागवत कथा का आयोजन, कथा श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों को पुण्यदायी माना गया है।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मनुष्य को सदाचार, सत्य, भक्ति, सेवा और संस्कारों की दिशा देने वाला ग्रंथ है। कथा के श्रवण से व्यक्ति को जीवन के उद्देश्य को समझने और धर्म-संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
ग्राम नेवसा में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। धार्मिक वातावरण के बीच कथा में भक्ति के साथ परिवार, संस्कार, सेवा, माता-पिता के सम्मान और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का संदेश दिया जा रहा है।
स्वर्गीय श्री शंभू सिंह राजपूत जी की स्मृति में आयोजित इस भागवत सप्ताह के माध्यम से परिवार द्वारा धार्मिक अनुष्ठान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। कथा का समापन 3 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
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