Breaking

revanchal times new

आदिवासी बालक छात्रावास में शिक्षक को अधीक्षक का प्रभार, आदेश और पात्रता को लेकर उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी

आदिवासी बालक छात्रावास में शिक्षक को अधीक्षक का प्रभार, आदेश और पात्रता को लेकर उठे सवाल

किस आदेश और किन नियमों के तहत सौंपी गई जिम्मेदारी? जनजातीय कार्य विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग

घुघरी। तहसील मुख्यालय घुघरी में संचालित सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास में अधीक्षक के प्रभार को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्रावास की व्यवस्था की जिम्मेदारी वर्तमान में एक शिक्षक को दी गई है। संबंधित शिक्षक के ओबीसी वर्ग से होने की बात सामने आने के बाद यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि प्रभार किस विभागीय आदेश, पात्रता और लागू नियमों के आधार पर सौंपा गया।

मुद्दा शिक्षक की योग्यता नहीं, प्रभार की प्रक्रिया का

केवल किसी शिक्षक के सामाजिक वर्ग के आधार पर उनकी पदस्थापना को नियम-विरुद्ध नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति संबंधित प्रभार आदेश, विभागीय दिशा-निर्देश और निर्धारित पात्रता के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए स्थानीय स्तर पर विभाग से संबंधित आदेश और लागू नियम सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।

छात्रावास की अहम जिम्मेदारी अधीक्षक के कंधों पर

छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की भोजन, आवास, सुरक्षा, अनुशासन, अध्ययन और दैनिक व्यवस्थाओं के संचालन में अधीक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इस जिम्मेदारी का प्रभार सौंपते समय लागू विभागीय प्रक्रिया और पात्रता का पालन होना आवश्यक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन अथवा जनजातीय कार्य विभाग ने छात्रावास अधीक्षक की पदस्थापना या प्रभार के लिए विशेष दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि घुघरी के इस छात्रावास में प्रभार देते समय उनका पालन किस प्रकार किया गया।

किस आदेश के आधार पर मिला प्रभार?

विभाग से इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग—

• अधीक्षक का प्रभार किस आदेश के तहत दिया गया?

• प्रभार आदेश किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया?

• संबंधित शिक्षक की निर्धारित पात्रता क्या है?

• क्या अधीक्षक के प्रभार के लिए सामाजिक वर्ग से संबंधित कोई विशेष प्रावधान लागू है?

• प्रभार देने से पहले लागू शासनादेश एवं दिशा-निर्देशों का परीक्षण किया गया या नहीं?

• जिले के अन्य छात्रावासों में अधीक्षक का प्रभार देने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है?

विभागीय रिकॉर्ड से ही साफ होगी स्थिति

उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में छात्रावास एवं आश्रमों के संचालन तथा अधीक्षकों की पदस्थापना/प्रभार के लिए विभागीय दिशा-निर्देश होने का उल्लेख मिलता है। इसलिए घुघरी के मामले में भी वास्तविक स्थिति संबंधित आदेश और लागू नियमों को सामने रखकर ही तय की जा सकती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित शिक्षक को जारी प्रभार आदेश, उनकी मूल पदस्थापना, पात्रता और प्रभार देने के समय लागू दिशा-निर्देशों का परीक्षण किया जाए। यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत है तो विभाग आदेश और नियम स्पष्ट कर भ्रम की स्थिति समाप्त करे, और यदि कोई प्रक्रियागत कमी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इनका कहना है...

“इस विषय पर अभी मुझे कोई जानकारी नहीं है, लेकिन कल मैं ऑफिस जाकर दिखवा लेता हूं।”

— डॉ. अरुण शुक्ला
सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, मंडला
अब विभाग के जवाब का इंतजार

छात्रावास जैसी संवेदनशील संस्था में प्रभार की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत होना आवश्यक है। अब निगाह इस बात पर है कि विभाग रिकॉर्ड का परीक्षण कर संबंधित आदेश और नियमों की स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।

दैनिक रेवांचल टाइम्स
घुघरी | मंडला | जनजातीय कार्य विभाग | छात्रावास व्यवस्था

Post a Comment

Previous Post Next Post
revanchal times new