ROB बना तो उजड़ जाएगा नैनपुर का बाजार? 1100 मीटर लंबे ओवरब्रिज को लेकर व्यापारियों में चिंता
दुकानों और छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका; कलेक्टर से रेल प्रबंधन तक आपत्ति पहुंचाने का दावा—व्यापारियों ने अंडरपास की तकनीकी व्यवहार्यता जांचने की उठाई मांग
दैनिक रेवांचल टाइम्स — नैनपुर। नैनपुर जंक्शन पर प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज (ROB) अब केवल रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात की समस्या के समाधान का विषय नहीं रह गया है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की आशंकाओं के बाद यह मामला रोजगार, बाजार, निजी संपत्ति और संभावित विस्थापन से भी जुड़ गया है।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार नैनपुर जंक्शन स्थित LC No. GJ-91 पर करीब 1100 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा ROB प्रस्तावित बताया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि प्रस्तावित मार्ग नगर के घने और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए निर्माण के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है।
‘ब्रिज बनेगा, लेकिन गरीबों का रोजगार कौन बचाएगा?’
व्यापारियों का सबसे बड़ा सवाल है कि विकास परियोजना के कारण यदि सड़क किनारे वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों को हटाने की स्थिति बनती है, तो उनके पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था क्या होगी?
उनका कहना है कि दुकानें हटने की स्थिति में कई छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। ऐसे में परियोजना शुरू होने से पहले प्रभावित लोगों की संख्या, अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास के संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
व्यापारियों की मांग—ऐसा विकल्प तलाशें जिससे यातायात सुधरे और बाजार पर न्यूनतम असर पड़े।
कलेक्टर से रेल प्रबंधन तक आपत्ति पहुंचाने का दावा
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने प्रस्तावित निर्माण को लेकर अपनी आपत्तियां जिला प्रशासन और रेलवे के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई हैं। उनका आरोप है कि अभी तक उनकी प्रमुख मांगों पर अपेक्षित स्तर पर निर्णय अथवा स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
क्षेत्र में परियोजना को लेकर अधिकारियों पर कथित दबाव की चर्चाएं भी हैं, हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशासन और रेलवे का अधिकृत पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।
ROB की जद में कितना आएगा व्यावसायिक क्षेत्र?
व्यापारियों के मुताबिक प्रस्तावित ROB का हिस्सा नगर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ता है। यदि निर्माण के लिए सड़क के दोनों ओर मौजूद दुकानों अथवा संपत्तियों को हटाना पड़ता है तो इसका प्रभाव केवल भवनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन परिवारों की आजीविका पर भी पड़ सकता है जिनका जीवन इन कारोबारों पर निर्भर है।
इसी कारण स्थानीय लोग परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का विस्तृत आकलन सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
एक शहर में दो ROB? लागत और उपयोगिता पर भी उठाया सवाल
व्यापारियों ने परियोजना के औचित्य को लेकर एक और सवाल उठाया है। उनका कहना है कि NH-543 बायपास क्षेत्र में भी रेलवे लाइन आने के कारण भविष्य में वहां ओवरब्रिज की आवश्यकता उत्पन्न हो सकती है।
ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि एक ROB वर्तमान व्यावसायिक क्षेत्र और दूसरा बायपास क्षेत्र में आवश्यक होता है तो दोनों परियोजनाओं की संयुक्त उपयोगिता, यातायात भार और लागत का तकनीकी अध्ययन किया गया है या नहीं।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की मांग है कि रेलवे की भूमि, भू-स्तर, जल निकासी और अन्य तकनीकी परिस्थितियां अनुमति दें तो रेलवे अंडरपास की व्यवहार्यता का भी विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाए।
अंडरपास वास्तव में तकनीकी रूप से संभव है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय रेलवे और संबंधित तकनीकी एजेंसियों के अध्ययन से ही हो सकता है। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी वैकल्पिक डिजाइन से निजी संपत्तियों और रोजगार पर पड़ने वाला प्रभाव कम किया जा सकता है तो उस विकल्प का अध्ययन अवश्य होना चाहिए।
विकास चाहिए, लेकिन प्रभावित परिवारों की तस्वीर भी साफ हो
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे विकास अथवा यातायात सुधार के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि परियोजना का अंतिम स्वरूप तय करते समय बाजार, व्यापार, रोजगार और स्थानीय आबादी के हितों को भी ध्यान में रखा जाए।
- ROB से वास्तव में कितनी दुकानें और संपत्तियां प्रभावित होंगी?
- कितने परिवारों की आजीविका पर संभावित असर पड़ेगा?
- कितनी निजी भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है?
- प्रभावित लोगों के पुनर्वास की क्या योजना है?
- मुआवजे की प्रक्रिया और मानक क्या होंगे?
- वैकल्पिक मार्ग अथवा डिजाइन का तकनीकी परीक्षण हुआ है या नहीं?
- अंडरपास की व्यवहार्यता पर विशेषज्ञ रिपोर्ट ली गई है या नहीं?
- बायपास और प्रस्तावित ROB की संयुक्त उपयोगिता एवं लागत का अध्ययन हुआ है या नहीं?
अब फैसला केवल फाइलों में नहीं, जमीन की वास्तविकता देखकर हो
व्यापारियों की मांग है कि जिला प्रशासन और रेलवे के अधिकारी मौके का संयुक्त निरीक्षण करें और व्यापारियों, नागरिकों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना के प्रभाव और उपलब्ध विकल्पों पर पारदर्शी चर्चा करें।
क्योंकि सवाल केवल एक ROB के निर्माण का नहीं है। सवाल उस बाजार का भी है जहां छोटी-छोटी दुकानों से अनेक परिवारों की आजीविका चलती है। यदि परियोजना से किसी की संपत्ति अथवा रोजगार प्रभावित होता है तो उसके लिए कानून और नियमों के अनुरूप समाधान भी परियोजना की योजना का हिस्सा होना चाहिए।

