मवई के 16 हजार बच्चों का भविष्य ‘शिक्षक संकट’ में!
50 स्कूलों में शिक्षक नहीं, 121 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे—16 व्याख्याता पद खाली होने का दावा
दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला। आदिवासी बाहुल्य वनांचल मवई में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आ रहे आंकड़े गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। करीब 16 हजार बच्चों की शिक्षा व्यवस्था वाले क्षेत्र में 50 स्कूल शिक्षकविहीन और 121 स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे बताए जा रहे हैं। वहीं 16 व्याख्याता पद रिक्त होने तथा अतिथि शिक्षकों का मानदेय कथित तौर पर दो माह से लंबित होने की बात भी सामने आई है।
16 हजार बच्चों के सामने सबसे बड़ा सवाल—पढ़ाएगा कौन?
मवई के दूरस्थ वनांचल में रहने वाले बच्चों के लिए कई स्थानों पर स्कूल तक पहुंचना ही चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में स्कूल पहुंचने के बाद पर्याप्त शिक्षक न मिलें तो इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है।
शिक्षकों की उपलब्धता और नियमित कक्षाओं की व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग से स्पष्ट जवाब अपेक्षित है।
50 स्कूल शिक्षकविहीन—फिर नियमित पढ़ाई कैसे?
यदि 50 विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं तो वहां नियमित शिक्षण व्यवस्था किस प्रकार संचालित की जा रही है? क्या विभाग ने वैकल्पिक शिक्षक व्यवस्था की है अथवा आसपास के विद्यालयों से शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
सिर्फ स्कूल भवन और नामांकन शिक्षा व्यवस्था को पूरा नहीं करते। बच्चों के लिए नियमित शिक्षक, विषयवार पढ़ाई और शैक्षणिक निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
121 स्कूलों में एक शिक्षक—एक व्यक्ति कितनी जिम्मेदारियां संभाले?
एक शिक्षक के भरोसे चल रहे विद्यालयों में एक ही व्यक्ति के सामने कई कक्षाओं को पढ़ाने के साथ उपस्थिति, शासकीय रिकॉर्ड और दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी हो सकती हैं। ऐसे में प्रत्येक कक्षा को पर्याप्त शिक्षण समय कैसे मिल रहा है, इसकी समीक्षा आवश्यक है।
16 व्याख्याता पद खाली—उच्च कक्षाओं की पढ़ाई पर सवाल
क्षेत्र में 16 व्याख्याता पद रिक्त होने की जानकारी भी सामने आई है। यदि यह स्थिति वर्तमान में बनी हुई है तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि विषयवार रिक्त पद किन विद्यालयों में हैं, वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था क्या है और स्थायी नियुक्ति अथवा पदस्थापना की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है।
‘शिक्षक पढ़ाएं या मानदेय मांगें?’
वनांचल के स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों का मानदेय कथित तौर पर दो माह से लंबित बताया जा रहा है। यदि भुगतान लंबित है तो शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि देरी किस स्तर पर हुई और मानदेय कब तक जारी किया जाएगा।
समय पर शिक्षण कार्य की अपेक्षा के साथ समय पर मानदेय भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी विभागीय जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।
पूर्णकालिक BEO नहीं तो जवाबदेही किसकी?
मवई जैसे बड़े और दूरस्थ विकासखंड में पूर्णकालिक विकासखंड शिक्षा अधिकारी की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि वर्तमान में पूर्णकालिक BEO पदस्थ नहीं है तो विद्यालयों की नियमित निगरानी, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त पदों और शैक्षणिक गुणवत्ता की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास है, इसे विभाग को सार्वजनिक करना चाहिए।
मवई की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आए आंकड़ों की विभागीय पुष्टि के साथ विद्यालयवार स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है। सवाल केवल पदों की संख्या का नहीं, बल्कि उन बच्चों की नियमित पढ़ाई का है जिनके लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का प्रमुख आधार हैं।
अब शिक्षा विभाग से इन सवालों के जवाब जरूरी
121 एकल-शिक्षक विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना कब होगी?
16 रिक्त व्याख्याता पद कब तक भरे जाएंगे?
अतिथि शिक्षकों का लंबित मानदेय कब जारी होगा?
मवई में पूर्णकालिक BEO की पदस्थापना की वर्तमान स्थिति क्या है?
