मंडला की यातायात व्यवस्था चौपट! सड़कों पर जाम का कब्जा, बेतरतीब पार्किंग ने बढ़ाई मुसीबत
मंडला। जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में बेतरतीब पार्किंग, सड़क किनारे ठेले और दुकानों के सामने खड़े वाहनों के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार की सीमित सड़क पर कार, ऑटो, दोपहिया वाहन, ठेले और पैदल राहगीरों का दबाव बढ़ने से कई स्थानों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई देती है।
वाहनों और ठेलों से सिकुड़ रही सड़क
व्यस्त बाजार क्षेत्रों में सड़क का उपयोग केवल आवागमन तक सीमित नहीं दिखाई देता। जगह-जगह खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहनों तथा सड़क किनारे लगने वाले ठेलों से उपलब्ध सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है।
ऐसी स्थिति में दोनों दिशाओं से आने वाले वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती और थोड़ी सी अतिरिक्त भीड़ भी जाम जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
जाम ही नहीं, दुर्घटना का खतरा भी
जब पैदल राहगीर, बाइक, कार, ऑटो और ठेले एक ही सीमित हिस्से में आवागमन करते हैं तो अचानक ब्रेक लगाने, गलत दिशा से वाहन निकलने या पैदल व्यक्ति के सड़क पर आने की स्थिति में दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। खासकर बाजार के पीक टाइम में प्रभावी यातायात नियंत्रण की जरूरत और बढ़ जाती है।
नियम हैं तो जमीन पर कार्रवाई भी दिखनी चाहिए
यातायात की समस्या केवल वाहन चालकों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। व्यवस्था लागू कराने वाले संबंधित विभागों की नियमित निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
यदि बाजार में नो-पार्किंग क्षेत्र निर्धारित हैं तो वहां नियमों का पालन कितना हो रहा है? ठेलों और अस्थायी व्यापार के लिए निर्धारित व्यवस्था क्या है? और सबसे महत्वपूर्ण—व्यस्त समय में यातायात संभालने के लिए मौके पर पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं? इन सवालों पर संबंधित विभागों को ध्यान देने की जरूरत है।
तस्वीर में कैद हुई बाजार की जमीनी स्थिति
दैनिक रेवांचल टाइम्स के पास मौजूद तस्वीर में बाजार क्षेत्र में वाहनों की भीड़, सड़क के हिस्से में ठेला और जगह-जगह खड़े दोपहिया वाहन दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन और उपलब्ध सड़क के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है।
व्यवस्था सुधारने के लिए इन बिंदुओं पर जरूरी है ध्यान
◆ नो-पार्किंग क्षेत्रों में नियमित निगरानी
◆ सड़क पर यातायात बाधित करने वाले अवरोधों की जांच
◆ ठेला-व्यवसाय के लिए व्यवस्थित स्थान की व्यवस्था
◆ पीक टाइम में प्रमुख चौराहों और बाजार मार्गों पर यातायात नियंत्रण
◆ नियम तोड़ने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई
अभियान नहीं, नियमित निगरानी से सुधरेगी व्यवस्था
शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए केवल समय-समय पर अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। बाजार क्षेत्रों में पार्किंग, ठेले, अवरोध और यातायात दबाव की नियमित निगरानी के साथ नियमों का लगातार पालन कराना जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस जमीनी स्थिति पर क्या कदम उठाते हैं।
बाजार की सड़कें सुगम आवागमन के लिए हैं। ऐसे में पार्किंग और यातायात प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था बनाकर उसका नियमित पालन कराना संबंधित विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
